Rajnath Singh At SCO: अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाक को राजनाथ की फटकार, आतंकवाद पर धुलाई, US-चीन को भी दिया डोज
Rajnath Singh At SCO: इस बार भारत की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SCO (Shanghai Co-Operation Organisation) में हिस्सा लिया। SCO की ये बैठक तब हो रही है जब भारत एक युद्ध पाकिस्तान से लड़ चुका है और इजरायल-अमेरिका बनाम ईरान की जंग से पूरी दुनिया अस्त-व्यस्त हो रखी है। लिहाजा इस बैठक में राजनाथ सिहं ने आतंकवाद, पाकिस्तान की भूमिका, चीन के एजेंडे और वैश्विक व्यवस्था जैसे कई बड़े मुद्दों पर भारत का साफ और मजबूत पक्ष रखा। पहलगाम आतंकी हमले की बरसी के बाद दिए गए इस बयान को बेहद अहम माना जा रहा है। पाकिस्तान और चीन की मौजूदगी में राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों पर सीधा निशाना साधा। जिससे पाकिस्तानी डेलीगेशन का सिर शर्म से नीचे झुक गया।
पाकिस्तान क्या बोले राजनाथ सिंह?
राजनाथ सिंह ने मंच से साफ कहा कि आतंकवादियों को पनाह देने, उन्हें बढ़ावा देने या सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा:
"हमें राज्य-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को नहीं भूलना चाहिए, जो किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है। दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं है। SCO को आतंकवादियों को समर्थन देने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।"भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान को संदेश माना जा रहा है। बहुत कम ही मौकों पर राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के लिए इतने तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पाक को जलाया
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर' का भी जिक्र किया और कहा कि अब आतंक के ठिकाने हमारी पहुंच से दूर नहीं रहेंगे। भारत ने पहले भी पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और POK में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी।
भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसके अपराधियों के खिलाफ Zero Tolerance नीति पर चलता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती और न ही कोई धर्म। उन्होंने कहा-
"कोई भी शिकायत, चाहे असली हो या कथित, आतंकवाद और मानव जीवन की हानि का बहाना नहीं बन सकती।"एक सवाल पूछकर खोली दुनिया की आंखें
राजनाथ सिंह ने SCO मंच से एक और बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया को तय करना होगा कि उसे "नया वर्ल्ड ऑर्डर" चाहिए या "मोर ऑर्डरली वर्ल्ड"। यानी एक नई व्यवस्थित दुनिया चाहिए या अधिक व्यवस्थित दुनिया। उन्होंने कहा-
"हम अक्सर नई विश्व व्यवस्था की मांग सुनते हैं। लेकिन क्या दुनिया को नई व्यवस्था चाहिए या ऐसी दुनिया चाहिए जो ज्यादा व्यवस्थित हो? हमें ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां हर नागरिक के साथ गरिमा और सम्मान से व्यवहार हो। जहाँ मतभेद विवाद न बनें और विवाद आपदा में न बदलें।"यह बयान खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि चीन लंबे समय से SCO के जरिए अपनी वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देता रहा है।
चीन के एजेंडे पर भारत का संतुलित जवाब
कई सालों से चीन SCO को G7 के रणनीतिक विकल्प के तौर पर पेश करता रहा है। चीन इस मंच के जरिए अपनी विश्व व्यवस्था की सोच को मजबूत करना चाहता है। लेकिन भारत की मौजूदगी इस संगठन को पूरी तरह चीन-नियंत्रित मंच बनने से रोकती रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की लगातार सक्रिय भागीदारी ने SCO में शक्ति संतुलन बनाए रखा है और चीन-पाकिस्तान की संयुक्त रणनीति पर भी अंकुश लगाया है।
दुनिया में बढ़ते संघर्षों पर जताई चिंता
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस समय दुनिया एकतरफावाद, युद्ध और बढ़ते संघर्षों की चुनौती से गुजर रही है। उन्होंने इशारा किया कि अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े हालिया तनावों ने वैश्विक स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि असली संकट किसी नई व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि मौजूदा नियम-आधारित विश्व व्यवस्था पर उठते सवाल हैं। जो पहले से तय नियमों का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने SCO सदस्य देशों से कहा कि यह संगठन विश्व जनसंख्या के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की भी है।
बातचीत और कूटनीति ही रास्ता
राजनाथ सिंह ने कहा कि SCO को बल प्रयोग की जगह बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद का बिना किसी अपवाद के मुकाबला करना होगा।
अमेरिका को भी दिखाया आईना
राजनाथ सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका की inward-looking यानी अंतर्मुखी नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की सोच बंटी हुई दिख रही हो और देश अपने-अपने हितों तक सीमित हो रहे हों, तब SCO जैसे मंच की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारत ने दिया सहयोग का संदेश
रक्षा मंत्री ने सदस्य देशों से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा- "हमारी सफलता स्पष्टता और एकाग्र उद्देश्य के साथ सहयोग करने में है। आइए, इन बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए।
सिर्फ भाषणबाजी नहीं, दुनिया को दिया बड़ा हिंट
राजनाथ सिंह का यह भाषण सिर्फ एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि इसमें पाकिस्तान को आतंकवाद पर चेतावनी, चीन को वैश्विक एजेंडे पर जवाब, और दुनिया को संतुलित व्यवस्था का भारतीय विजन दिखा। यही वजह है कि किर्गिस्तान में दिया गया यह बयान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
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