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श्रीलंका में भीषण आर्थिक संकट के लिए राजपक्षे भाई दोषी करार... श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Sri Lanka News: श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक प्रतीकात्मक फैसला सुनाते हुए कहा है, कि श्रीलंका में आए भीषण आर्थिक संकट के लिए शक्तिशाली राजपक्षे भाई जिम्मेदार हैं। श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट ने प्रतीकात्मक फैसला सुनाते हुए कहा, कि राजपक्षे भाइयों के कार्यकाल के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को गलत तरीके से संभाला गया, जिसकी वजह से श्रीलंका आजादी के बाद के सबसे खराब आर्थिक संकट में फंस गया।

आपको बता दें, कि श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला प्रतीकात्मक है और ये टिप्पणी श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं। लिहाजा, इस फैसले का मतलब ये नहीं है, कि राजपक्षे ब्रदर्स को जेल जाना होगा या किसी तरह की सजा उन्हें सुनाई जाएगी।

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श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

श्रीलंका की भ्रष्टाचार निगरानी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका (टीआईएसएल) और चार अन्य कार्यकर्ताओं ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और महिंदा राजपक्षे सहित शीर्ष पूर्व अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर कर रखा है और मामले की सुनवाई श्रीलंकन सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में आरोपी राजपक्षे परिवार के सबसे छोटे भाई बासिल राजपक्षे, जो आर्थिक संकट के समय देश के वित्त मंत्री थे, उन्हें और दो पूर्व केंद्रीय बैंक गवर्नर और अन्य शीर्ष ट्रेजरी अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के वकील नादिशानी परेरा ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, कि "हमने अदालत से यह घोषणा करने की मांग की, कि पूर्व राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अर्थव्यवस्था पर गलत प्रबंधन या निष्क्रियता ने लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।"

उन्होंने कहा, कि "हमें सुप्रीम कोर्ट से वह फैसला मिल गया है। अब आगे कोई कार्रवाई करना नागरिकों पर निर्भर है।"

पांच सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 4-1 से राजपक्षे भाइयों के खिलाफ ये फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है, कि दोनों भाई साल 2019 और 2022 के बीच आर्थिक कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदार थे, और उन्हें याचिकाकर्ताओं को कानूनी लागत के रूप में $450 (150,000 रुपये) से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा है, कि "यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता जनता के हित में अदालत में आए थे, और याचिकाकर्ताओं ने अपने लिए मुआवजे की मांग नहीं की है, लिहाजा अदालत आरोपियों को कोर्ट की सुनवाई में आई लागत का खर्च वहन करने का आदेश देती है और कोर्ट मुआवजे का भुगतान करने का आदेश नहीं देती है, क्योंकि इसकी मांग नहीं की गई थी।"

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आपको बता दें, कि श्रीलंका पिछले साल भीषण आर्थिक संकट में फंस गया था और देश का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की वजह से भोजन, ईंधन और दवाओं की भारी कमी हो गई, जिसकी वजह से हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने राजपक्षे परिवार के पुश्तैनी घर को जला दिया, वहीं राष्ट्रपति भवन पर भी कब्जा कर लिया था।

प्रदर्शनकारियों की वजह से पहले प्रधानमंत्री महिदा राजपक्षे ने इस्तीफा दिया और फिर उनके छोटे भाई गोटाबाया राजपक्षे इस्तीफा देकर देश से फरार हो गये। हालांकि, इस साल गोटाबाया राजपक्षे वापस श्रीलंका लौट आए हैं। राजपक्षे परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा है, जिसपर अभी फैसला नहीं आया है।

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