'पाकिस्तान के प्यादों ने कराया राहुल गांधी के लिए US में कार्यक्रम?', सुरक्षा एजेंसियों के भीतर गहराई चिंता...

Rahul Gandhi US Visit: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया 10 दिवसीय संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा भारत की खुफिया एजेंसियों की रडार पर है। द संडे गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में राहुल गांधी के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें से इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और इस्लामिक सर्किल ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ICNA) ने भी कार्यक्रमों का आयोजन किया था।

लेकिन, ये दोनों इस्लामिक संगठन कुछ और नहीं, बल्कि पाकिस्तान के 'प्यादे' हैं। इन दोनों संगठनों के ऊपर आरोप हैं, कि ये पाकिस्तान का खाते हैं और पाकिस्तान के लिए बजते हैं। यानि, आरोप ये हैं, कि इनका काम भारत विरोधी एजेंडों को बढ़ाना है। द संडे गार्जियन के मुताबिक, IAMC और ICNA, दोनों ही पाकिस्तान डीप स्टेट के जाने-माने हथियार हैं और इन दोनों संगठनों ने राहुल गांधी के लिए सभा का आयोजन किया था, लिहाजा इस कार्यक्रम में कौन-कौन लोग जुटे थे, अब उनकी स्कैनिंग की जा रही है।

क्या राहुल की सुरक्षा से हुआ समझौता?

द संडे गार्जियन ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि राहुल गांधी की सुरक्षा से समझौता होने के अलावा, तथ्य यह है, कि उन्हें इन दो संगठनों से जुड़े ऐसे लोगों के साथ घनिष्ठ रूप से घुलने-मिलने दिया गया था, जिससे भारत और विदेशों में खुफिया एजेंसियों के बीच उनके आसपास की धारणा को काफी नुकसान पहुंचा था।

ये दोनों ही संगठन पाकिस्तान के इशारों पर भारत विरोधी काम करने के लिए कुख्यात हैं और ये दोनों पाकिस्तान और कुछ पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर भारत में अल्पसंख्यकों से अत्याचार के काल्पनिक मुद्दों को उठाकर भारत की सॉफ्ट-पावर छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए भी कुख्यात रहे हैं।

ऐसा नहीं है, कि आईएएमसी और आईसीएनए ने भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद भारत विरोधी एजेंडो को फैलाया है, बल्कि ये 2014 में बीजेपी की सरकार बनने से काफी पहले से ही भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते रहे हैं।

rahul gndhi us visit

अमेरिका में भारत विरोधी कैम्पेन

IAMC का नेतृत्व रशीद अहमद कर रहे हैं, जो इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ़ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) के कार्यकारी निदेशक (2008-17) थे, जबकि IMANA के ऑपरेशनल डायरेक्टर ज़ाहिद महमूद, पाकिस्तान नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं।

IAMC, यानि इंडियन अमेरिका मुस्लिम काउंसिल ने वाशिंगटन डीसी में भारत के खिलाफ कैम्पेन करने के लिए लॉबिंग फर्म फिदेलिस गवर्नमेंट रिलेशंस (FGR) को काम पर लगाया था। उनकी सेवाओं के लिए, IAMC ने अकेले 2013 और 2014 के बीच FGR को 40 हजार डॉलर का भुगतान किया था।

FGR को बर्मा टास्क फोर्स (BTF) द्वारा भी काम पर रखा गया था, जो भारत की आलोचना करने वाला एक और मोर्चा था। बीटीएफ की स्थापना शैक उबैद ने की थी, जिन्होंने 2018 और 2020 के बीच अमेरिकी कांग्रेस के साथ भारत के खिलाफ कैम्पेन करने के लिए एफजीआर को 267,000 डॉलर दिए थे।

दिलचस्प ये है, कि BTF ने ISI एजेंट गुलाम नबी फई की भी मेजबानी की थी, जिसे 2011 में FBI ने अमेरिका से पाकिस्तान में 3.5 मिलियन डॉलर ट्रांसफर करने का दोषी पाया था। जांच में पता चला था, ये संगठन ने ISI के इशारे पर कश्मीरी अलगाववादियों के लिए एक प्रसिद्ध लॉबिंग एजेंट का काम करता था।

वहीं, गुलाम नबी फई को अक्सर कथित "मानवाधिकार" कार्यकर्ता अंगना चटर्जी के साथ भी देखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, बीटीएफ, आईसीएनए का ही एक और मोर्चा है। आईसीएनए ने ही 2005 में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जबकि, गुलाम नबी फई, ISI के इशारे पर कश्मीरी अलगाववादियों के लिए काम करने वाला एक प्रसिद्ध लॉबिंग एजेंट था।

ICNA के भारत विरोधी कामों को जानिए

आईसीएनए का पहले का अवतार हलका-ए-अहबाब-ए-इस्लामी (एचएआई) था, जिसे 1968 में स्थापित किया गया था। वहीं, 1971 में बंगाली बुद्धजीवियों के नरसंहार में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश का एक आरोपी अशरफुज ज़मान खान था, जो ICNA क्वीन्स के न्यूयॉर्क चैप्टर का हिस्सा है और वो बर्मा टास्क फोर्स के सह-संस्थापकों में से एक था।

यानि, इंडियन अमेरिका मुस्लिम काउंसिल से वो शख्स जुड़ा था, जिसपर बंगाली बुद्धजीवियों के कत्ल का इल्जाम था।

इतना ही नहीं, हिजबुल मुजाहिदीन के संस्थापक सैयद सलाहुद्दीन के साथ भी आईसीएनए के कथित संबंध रहे हैं।

साल 2016 में, ICNA ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी और अल-बद्र के नेता मोतीउर रहमान निज़ामी को सम्मानित किया था, जो 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान बंगाली बुद्धिजीवियों के सामूहिक नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार थे। ICNA ने उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया और इस्लाम के लिए उनके "उत्कृष्ट योगदान" और 1971 की त्रासदी में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सम्मानित किया।

वहीं, IAMC ने सिमी के संस्थापक डॉ मोहम्मद सिद्दीकी को भी एक मंच दिया था। यानि, IAMC ने हर वो काम किए, जिससे एंटी-इंडिया तत्वों को मदद मिलती रहे।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने द संडे गार्जियन को बताया, कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में कौन लोग शामिल हो रहे थे और उनका बैकग्राउंड क्या था, इसकी कोई तहकीकात नहीं की गई थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कहा, कि कार्यक्रम के आयोजक जिन मेहमानों को बुला रहे थे, उनका बैकग्राउंड क्या है और उनके एजेंडे क्या रहे हैं, इसकी जानकारी जुटाने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से कोई संपर्क नहीं किया गया था।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पहले जब राहुल गांधी का इस तरह का कोई कार्यक्रम होता था, तो उनकी टीम से संबंधित सदस्य भारतीय खुफिया एजेंसियों से संपर्क करते थे और कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के बैकग्राउंट की जांच की जाती थी, उनके बारे में जानकारियां जुटाई जाती थीं और उसके बाद ही उनकी टीम के लोग तय करते थे, कि राहुल गांधी किन लोगों से मुलाकात करेंगे। हालांकि, ये पूरी प्रक्रिया अनौपचारिक होती थी।

लेकिन, अब वह अनौपचारिक व्यवस्था भी सक्रिय नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, राहुल गांधी को शायद बताया गया था, कि कैसे ये दोनों संगठन वर्तमान भाजपा सरकार के मुखर आलोचक हैं और इसलिए उन्हें उनकी बातचीत का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।

हालांकि, इस सुझाव में इन दोनों संगठनों के बैकग्राउंड का उल्लेख करने की संभावना को नज़रअंदाज़ किया गया है, जबकि इन दोनों संगठनों के पाकिस्तान के साथ कितने गहरे संबंध हैं, इसकी जानकारी भारतीय मीडिया के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में भी कई बार बताया गया है।

वहीं, संडे गार्जियन ने दावा किया है, कि इंडियन ओवरसीज कांग्रेस और उसके प्रमुख सैम पित्रोदा से संपर्क किया, जिन्होंने इस राजनीतिक दौरे का प्रबंधन किया और इस पर प्रतिक्रिया मांगी, कि क्या उन्होंने IAMC और ICNA की पृष्ठभूमि की जांच की थी, और राहुल गांधी से बातचीत में इन दोनों संगठनों ने क्या भूमिका निभाई थी?

लेकिन, सैम पित्रोदा ने खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया है।

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