राफेल डील पर नया 'खुलासा' , फ्रांस मीडिया का दावा-बिचौलिए को दिए गए 65₹ करोड़ घूस, BJP ने किया खंडन

नई दिल्ली, 08 नवंबर: विपक्षी दल लगातार राफेल डील में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं। अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है। फ्रांसीसी पोर्टल मीडियापार्ट ने दावा किया है कि, इस डील को पूरा करने के लिए बिचौलिए सुशेन गुप्ता को 7.5 मिलियन यूरो (जो लगभग 65 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी गई थी। ये रिश्वत फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन की ओर से दी गई थी, जिसके सबूत भी उनके पास हैं।

rafale deal Mediapart claims Dassault paid at least 7.5 million euros kickbacks to middleman

फ्रेंच मैगजीन मीडियापार्ट ने आरोप लगाया है कि, भारत को राफेल जेट की बिक्री को सुरक्षित करने के लिए डसॉल्ट ने 2007 से 2012 के बीच एक शेल कंपनी के साथ "ओवरबिल" आईटी अनुबंधों के माध्यम से बिचौलिए सुशेन गुप्ता को कम से कम 7.5 मिलियन यूरो का भुगतान किया था। अक्टूबर 2018 से संबंधित कागजात मौजूद होने के बावजूद सीबीआई और ईडी ने कोई एक्शन नहीं लिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दस्तावेजों के होने के बावजूद भारतीय एजेंसियों ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

जांच एजेंसियों ने गुप्ता पर मॉरीशस स्थित शेल कंपनी इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और कई अन्य संस्थाओं के माध्यम से 2010 अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में कमीशन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। सुशेन गुप्ता को पहले अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में कथित रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मीडियापार्ट ने अप्रैल में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें खुलासा किया गया था कि कैसे एक प्रभावशाली भारतीय बिजनसमैन को राफेल निर्माता दसॉल्ट एविएशन और फ्रांसीसी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स फर्म थेल्स की तरफ से गुप्त रूप से लाखों यूरो का भुगतान किया गया था।

फ्रांसीसी पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, मॉरीशस में अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने हेलीकॉप्टर सौदे मामले में जानकारी मांगने वाले अनुरोध पत्र के जवाब में 11 अक्टूबर, 2018 को सीबीआई निदेशक को दस्तावेज भेजे थे। एक हफ्ते पहले 4 अक्टूबर 2018 को सीबीआई को वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी से राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने की शिकायत मिली थी।

मीडियापार्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि, सुशेन गुप्ता की मॉरीशस वाली कंपनी, इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज ने 2007 और 2012 के बीच फ्रांसीसी विमानन फर्म से कम से कम 7.5 मिलियन यूरो प्राप्त किए। उसके पास भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की बिक्री सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए फ्रांसीसी विमान निर्माता डसॉल्ट एविएशन की ओर से रिश्वत का भुगतान किए जाने के सबूत हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, कथित झूठे चालानों की एक प्रणाली का उपयोग करते हुए अधिकांश पैसा सावधानी से मॉरीशस भेजा गया था। इनमें से कुछ चालानों में फ्रांसीसी कंपनी का नाम भी गलत था।

मीडियापार्ट ने दावा किया कि, भारतीय जासूसों द्वारा प्राप्त अन्य दस्तावेजों से पता चलता है कि 2015 में राफेल डील की अंतिम वार्ता के दौरान सुशेन गुप्ता को भारत के रक्षा मंत्रालय से गोपनीय दस्तावेज प्राप्त हुए थे। जिसमें भारतीय वार्ताकारों के रुख का विवरण दिया गया था कि,कैसे उन्होंने विमान की कीमत की गणना की है।मीडियापार्ट द्वारा संपर्क किए जाने पर सुशेन गुप्ता ने कोई जवाब नहीं दिया है, वहीं डसॉल्ट ने इन दस्तावेजों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने इस दावे का खंडन किया है। मीडियापार्ट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि यूपीए रिश्वत ले रहा था, लेकिन सौदा बंद नहीं कर सका। एनडीए ने बाद में इसे रद्द कर दिया और फ्रांसीसी सरकार के साथ अनुबंध किया।

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