इंफोसिस के खिलाफ अमेरिका में दर्ज हुआ 'नस्लीय भेदभाव' का केस

टेक्सास। आईटी कंपनी इंफोसिस की अमेरिकी ब्रांच के खिलाफ एक पूर्व कर्मचारी ने नस्लीय भेदभाव का केस दर्ज कराया है। अफ्रीकी अमेरिकी नागरिक डेविना लिंगुइस्ट ने इंफोसिस पर आरोप लगाया है कि, 2016 में कंपनी के खिलाफ पहले के क्लास एक्शन सूट में गवाही दी थी, जिसके बाद कंपनी ने उसका बदला लिया। उन्हें कंपनी ने पद से हटा दिया। यह मामला उस समय सामने आया है जब अमेरिका में अफ्रीकी अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लायड की मौत के बाद बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।

race discrimination case against Infosys in US
डेविना ने टेक्सास कोर्ट में कंपनी से हर्जाना मांगा है। कोर्ट में दर्ज करायी गई शिकायत में कहा गया है कि, इंफोसिस अमेरिका में लगभग 20,000 कर्मचारियों को नियुक्ति की है, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत दक्षिण एशियाई और भारतीय हैं और स्थानीय लोगों को मौका नहीं दे रही है, जबकि अमेरिका की आबादी का केवल 1-2 प्रतिशत दक्षिण एशियाई है। इन आरोपों से इंफोसिस ने इनकार किया है।

डेविना ने एक अमेरिकी आवेदक ब्रेंडा कोहलर द्वारा दायर मामले में गवाही दी थी, जिसने कंपनी पर दक्षिण एशिया लोगों और स्थानीय नौकरी आवेदकों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया था। डेविना ने अपने आरोपों में कहा कि कंपनी ने पहले के कोहलर बनाम इन्फोसिस मामले में गवाही देने के बाद कंपनी में 'शत्रुतापूर्ण वर्क एंवायरमेंट' सहना पड़ा। इसके बाद मुझे उस पद से भी हटा दिया गया।

इंफोसिस ने किसी भी जातिगत भेदभाव के आरोप को नकार दिया है। इंफोसिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, कंपनी हर कर्मचारी एक ही नजरिए से देखती है, किसी में कोई भेदभाव नहीं करती है। इन्फोसिस की नीति है कि सभी के साथ उचित व्यवहार किया जाए और सभी को समान रोजगार का अवसर और एक समावेशी कार्यस्थल प्रदान किया जाए। कंपनी ने कहा कि वह इस मामले पर कोर्ट में अपना बचाव करेगी।

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