यूक्रेन पर साथ पाने के लिए भारत को धमका रहा है अमेरिका? QUAD बैठक में दबाव बनाने की कोशिश

यूक्रेन पर रूस का हमला लगातार जारी है और भारत ने संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग के दौरान गैर- हाजिर रहने का फैसला किया था, लेकिन अमेरिका किसी भी हाल में रूस विरोधी अभियान में भारत को शामिल करने की कोशिश कर रहा है।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, मार्च 04: यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने न्यूट्रल रहने की कोशिश करते हुए किसी का भी साथ देने से इनकार कर दिया है, लेकिन भारत का ये फैसला अमेरिका समेत पश्चिमी देश पचा नहीं पा रहे हैं और बार बार भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। क्वाड की बैठक के दौरान एक बार फिर से अमेरिका ने भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत की तरफ से भी अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दिया गया है।

क्वाड में यूक्रेन संकट पर चर्चा

क्वाड में यूक्रेन संकट पर चर्चा

यूक्रेन पर रूस का हमला लगातार जारी है और भारत ने संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग के दौरान गैर- हाजिर रहने का फैसला किया था, लेकिन अमेरिका किसी भी हाल में रूस विरोधी अभियान में भारत को शामिल करने की कोशिश कर रहा है और गुरुवार को जब क्वाड की बैठक हो रही थी, उस दौरान एक बार फिर से अमेरिका की तरफ से रूस विरोधी अभियान चलाया गया, लेकिन भारत को अपने स्टैंड से बदलने की कोशिश में अमेरिका को खास सफलता नहीं मिल पाई। क्वाड की बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री किशिदा फुमियो शामिल हुए थे, लेकिन क्वाड की बैठक में भारत ने साफ कर दिया, कि यूक्रेन उद्येश्य के लिए क्वाड के मंच का उपयोग करने की बात को स्पष्ट तौर पर खारिज कर दिया।

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिका ने क्या कहा?

क्वाड सदस्यों की एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ट्वीट करते हुए कहा कि, उन्होंने क्वाड नेताओं प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधान मंत्री किशिदा फुमियो के साथ मुलाकात की, जिसमें "यूक्रेन पर रूसी हमले हमले के साथ साथ हिंद-प्रशांत सहित दुनिया में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के बारे में बात की"। हालांकि, जो बाइडेन के इस ट्वीट में इसके अलावा कुछ भी जाहिर नहीं किया गया था और ना ही क्वाड की बैठक से निकले परिणाओं पर ही कोई बात की गई थी। बाद में व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि, "क्वाड नेताओं ने यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और मानवीय संकट पर चर्चा की और इसके व्यापक निहितार्थ का आकलन किया"। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अपने बयान में यह नहीं बताया, कि क्या बैठक में रूस की निंदा भी की गई है?

संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर जोर

व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि, क्वाड नेताओं ने "एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिसमें सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात की गई और सभी देश सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक दबाव से मुक्त होने का वादा दोहराया गया।" यानि, व्हाइट हाउस के दूसरे बयान में भी यूक्रेन को लेकर कोई बात नहीं की गई, लेकिन अमेरिका की तरफ से क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक तंत्र के तौर पर क्वाड के समर्पण की पुष्टि की गई।

क्वाड की बैठक में भारत ने क्या कहा?

क्वाड की बैठक में भारत ने क्या कहा?

वहीं, क्वाड की बैठक में भारतीय विदेश मंत्रालय ने, क्वाड की इंडो-पैसिफिक केंद्रित प्रकृति पर जोर देते हुए कहा कि, पीएम मोदी ने "इस बात को रेखांकित किया कि क्वाड को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के अपने मुख्य उद्देश्य पर केंद्रित रहना चाहिए।" यानि, भारत की तरफ से साफ कर दिया गया, कि क्वाड के मंच का इस्तेमाल यूक्रेन संकट पर बात करने के लिए नहीं होना चाहिए। क्वाड की बैठक को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि, ''क्वाड बैठक में यूक्रेन डेवलपमेंट पर चर्चा की गई, जिसमें इसके मानवीय निहितार्थ भी शामिल हैं"। भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान ने स्वीकार किया कि, पीएम मोदी ने रूस की सीधे निंदा किए बिना, संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि वाशिंगटन ने भारत पर भी दबाव डाला है।

अमेरिका का भारत पर प्रेशर

अमेरिका का भारत पर प्रेशर

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि, "क्वाड नेताओं ने दक्षिण पूर्व एशिया, हिंद महासागर क्षेत्र और प्रशांत द्वीप समूह की स्थिति सहित अन्य सामयिक मुद्दों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का पालन करने के महत्व को दोहराया।" हालांकि, यूनाइटेड नेशंस चार्टर, इंटरनेशनल लॉ, सुंप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का पालन करने का संदर्भ रूस की आलोचना के तौर पर देखा जाता है, क्योंकि, उसे यूक्रेन पर हमला करने वाले देश के तौर पर देखा जा रहा है, और पीएम मोदी ने भी इसका जिक्र किया, लेकिन क्वाड में इसकी उपयोगिता पर सवाल उठाकर अमेरिकी अपेक्षाओं को काफी कम कर दिया। हाल के दिनों में यूक्रेन संकट के समय भारत के रूख की अमेरिका में काफी आलोचना की जा रही है और बाइडेन प्रशासन और सासदों ने 'भारत के बहिष्कार का सुझाव' भी दिया और भारत को वैश्विक राय के समर्थन में आना चाहिए, जो रूस को आक्रामक के तौर पर देख रहा है, लेकिन भारत ने यूक्रेन संकट पर रूस की आलोचना करने से अब तक परहेज किया है।

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