Quad summit 2022: जापान में भारत की लोकप्रियता की एक वजह ‘रजनीकांत’ भी
नई दिल्ली, 24 मई। सिनेमा न केवल मनोरंजन है बल्कि कला और संस्कृति का वाहक भी है। अभिनय की लोकप्रियता को न भाषा की दीवार रोक पाती है और न सरहद की लकीरें। जैसे रूस में कभी राजकपूर लोकप्रिय थे वैसे ही जापान में रजनीकांत को लेकर बेहद दीवानगी है। रजनीकांत की लोकप्रियता ने ही जापान में हिंदी सिनेमा के लिए रास्ता तैयार किया। जापानी भी रजनीकांत की स्टाईल पर उतने ही फिदा हैं जितने की भारत के लोग। रजनीकांत की एक हिट फिल्म है 'बासा'। इस फिल्म में रजनीकांत ने एक ऑटो ड्राइवर की भूमिका निभायी है।

जापान के रहने वाले याशूदा ने जब ये फिल्म देखी तो वे रजनीकांत की एक्टिंग के दीवाने हो गये। उन्होंने एक ऑटो रिक्शा खरीद लिया और रजनीकांत की तरह ही दक्षिण भारतीय अंदाज में धोती को लुंगी की तरह बांध कर घूमने लगे। वे रजनीकांत के ऐसे जबर्दस्त फैन बन गये कि चेन्नई आकर उनकी फिल्में देखने लगे। इसके लिए उन्होंने तमिल भाषा भी सीखी। रजनीकांत कैसे जापान में इतने मशहूर हो गये ? इसकी भी दिलचस्प कहानी है।

जापान में रजनीकांत की फिल्म ‘मुथु’ ने किया था कमाल
वैसे तो जापान में प्रदर्शित होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी- राजू बन गया जेंटलमैन। शाहरुख खान की यह फिल्म भारत में 1992 में रिलीज हुई थी। पांच साल बाद इसे जापान में प्रदर्शित किया गया था। लेकिन टिकट खिड़की पर इसका सामान्य प्रदर्शन रहा। लेकिन एक साल बाद ही जापान में भारतीय सिनेमा के एक नये युग की शुरुआत हुई। 1998 में रजनीकांत की फिल्म 'मुथु' जापान में प्रदर्शित हुई। रजनीकांत की एक्टिंग ने जापानियों पर जैसे जादू कर दिया। ये फिल्म जापान के सिनेमाघरों में लगातार 100 दिनों तक हाउसफुल चलती रही। इस फिल्म ने करीब 13 करोड़ रुपये का बिजनेस किया। इस फिल्म के बाद जापान में रजनीकांत की लोकप्रियता जुनून की हद तक बढ़ गयी। तमिल भाषा में बनी मुथु का निर्माण 1995 में हुआ था। इस फिल्म में रजनीकांत ने एक जमींदार के बग्गी चालक 'मुथु' की भूमिका निभायी है। मुथु का कथानक ये है कि जमींदार और उसका बग्गीचालक एक ही महिला से प्रेम कर बैठते हैं। महिला जमींदार के बारे में कुछ नहीं जानती। फिर कहानी में कई नाटकीय मोड़ आते हैं। अंत में पता चलता है कि मुथु ही असली जमींदार है। लेकिन मुथु जमींदार के रूप में नहीं बल्कि जनता के सेवक के रूप में रहना चाहता है। 1995 में जब ये फिल्म रिलीज हुई तो इसने पूरे तमिलनाडु में धूम मचा दी। कई सिनेमाघरों में इसने सिल्वर जुबली मनायी। राज्यस्तर पर इस फिल्म को कई अवार्ड मिले। रजनीकांत को बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला।

तमिल फिल्म ‘मुथु’ कैसे पहुंची जापान ?
1996 की बात है। जापानी फिल्म आलोचक जून एडोकी सिंगापुर के 'लिटिल इंडिया' वीडियो स्टोर में गये थे। कुछ खोजने के दौरान उन्होंने फिल्म मुथु का वीडियो कैसेट देखा। एडोकी को कैसेट के कवर पर लिखा फिल्म का सारांश कुछ अनोखा लगा। वे कैसेट खरीद कर घर लौटे। फिल्म तमिल भाषा में थी और इसका कोई अंग्रेजी सबटाइटल भी नहीं था। सिंगापुर में तमिल लोगों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। तमिल, सिंगापुर की आधिकारिक भाषाओं में एक है। इसलिए वहां रजनीकांत की फिल्मों के वीडियो कैसेट खूब बिकते थे। एडोकी ने तमिल फिल्म 'मुथु' देखी। किसी तरह दृश्यों के माध्यम से उन्होंने कहानी को समझने की कोशिश की। बहुत कुछ तो उनके पल्ले नहीं पड़ा लेकिन वह रजनीकांत की स्टाईल पर मंत्रमुग्ध हो गये। एडोकी के मन में ख्याल आया कि अगर इस फिल्म को जापानी भाषा में डब कर रिलीज किया जाय तो यहां के लोगों को बहुत पसंद आएगी। रजनीकांत की डांसिंग और स्टाइलिश एक्टिंग जापानी लोगों के लिए एक नया अनुभव होगा। उन्होंने जापान के कई फिल्म वितरकों से इस विषय पर चर्चा की। शुरू में जापानी वितरकों ने इसमें रुचि नहीं दिखायी। लेकिन अंत में जापान की एक निर्माण कंपनी 'मुथु' को डब करने के लिए तैयार हुई। जापानी भाषा में यह फिल्म- मुथु ओडोरू महाराजा ( मुथु- द डांसिंग महाराजा) के नाम से रिलीज हुई।

बाद में ‘मुथु’ जापान के 100 सिनेमाघरों में रिलीज हुई
जून 1998 में टोकियो के शिबुएया जिले के राइज सिनेमा हॉल में ये फिल्म प्रदर्शित हुई। वितरक को इस फिल्म पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं था। इसलिए उसने सीमित रूप से पहले इसे एक सिनेमा घर में रिलीज किया। लेकिन फिर तो कमाल हो गया। फिल्म लगातार 25 हफ्ते तक चली और करीब साढ़े बारह करोड़ रुपये का बिजनेस किया। इस सिनेमा हॉल के लिए ये फिल्म मेगाहिट साबित हुई। मुथु की सफलता देख कर फिर इसे 100 सिनेमाघरों में रिलीज किया। तब इसने 23 करोड़ 74 लाख रुपये का बिजनेस किया। इस रिकॉर्डतोड़ कमाई पर जापानी वितरक एत्सुशी इचिकावा ने मुथु की तुलना टाइटेनिक (जापानी डब) से की थी। जापान में मुथु के तहलका मचाने के बाद रजनीकांत वहां के पसंदीदा एक्टर बन गये। रजनीकांत के अभिनय की अदा जापानी नायकों से बिल्कुल अलग थी। सिगरेट को हवा में उछाल कर अपने होठों से लगाने की उनकी अनोखी अदा देख कर जापानी दर्शक रोमांचित हो गये। यह नयापन उन्हें भा गया। इस तरह रजनीकांत जापान में सबसे लोकप्रिय भारतीय अभिनेता बन गये। 2006 में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह टोकियो गये थे तब उन्होंने 'मुथु" के जरिये जापान में भारत की पहुंच का जिक्र किया था। अपार लोकप्रियता की वजह से रजनीकांत भी जापान को अपने करीब पाते हैं। 2011 में सुनामी और भूकंप ने जापान में भारी तबाही मचायी थी। तब रजनीकांत ने जापान के पीड़ित लोगों की मदद की थी।
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