Qatar: कतर में इंडियन नेवी के 8 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ ट्रायल, मौत की सजा मिलने की आशंका, क्या होगा आगे?

कई रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, कि इन आठ अधिकारियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने फंसा दिया है। कतर का कहना है, कि इनके खिलाफ उसके पास इलेक्ट्रॉनिक सबूत हैं।

Indian Navy qatar

Qatar Indian Navy: कतर में करीब 8 महीने पहले गिरफ्तार किए गये इंडियन नेवी के आठ अधिकारियों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है और कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि इंडियन नेवी के इन अधिकारियों को कथित जासूसी के लिए मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौसेना में विभिन्न पदों पर काम कर चुके इन पूर्व अधिकारियों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप है।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आठ भारतीय, जिन्होंने विभिन्न पदों पर भारतीय नौसेना के साथ काम किया है, उनके ऊपर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि इन आठ पूर्व अधिकारियों को कतर में अकेले में रखा गया है और 3 मई को इनके खिलाफ कतर के एक अदालत में अगली सुनवाई होने वाली है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि कोर्ट की कार्रवाई में इंडियन नेवी के इन पूर्व आठ अधिकारियों को जासूसी के लिए कड़े आरोपों का सामना करना पड़ सकता है और उन्हें मौत की सजा मिलने की संभावना है।

कौन कौन हैं पूर्व अधिकारी?

कतर में जिन नौसेना के पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था, उनके नाम कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनकर पाकला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी एक ट्वीट के जरिए भारत सरकार की इस मामले के लिए आलोचना कर चुके हैं, कि भारत सरकार इन अधिकारियों को बचाने के लिए सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इजरायल के लिए जासूसी का आरोप

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में, कतरी अधिकारियों के पास इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक सबूत होने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना के ये सभी पूर्व उच्च अधिकारी दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज के लिए काम करते थे, जो इटली की टेक्नोलॉजी पर आधारिक कतर में पनडुब्बियों के निर्माण के लिए एक अत्यधिक संवेदनशील परियोजना पर काम करते थे। आरोप है, कि इस संवेदनशील जानकारियों को इन्होंने इजरायल तक पहुंचाया।

आधिकारिक भारतीय सूत्रों का हवाला देते हुए, एएनआई की रिपोर्ट है, कि "मामले को अब भारतीय एजेंसियों द्वारा उच्चतम संभव स्तर पर उठाया गया है, लेकिन कतरी सरकार ने इस मुद्दे पर भरोसा करने का कोई संकेत नहीं दिखाया है"। सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया, कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों द्वारा भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को "फंसाए" जाने की संभावना है।

इन आठ नौसेना के पूर्व अधिकारियों के अलावा, ओमान वायु सेना के पूर्व अधिकारी खमीस अल-अजमी सहित दो कतरियों के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं, जो दाहरा ग्लोबल के सीईओ हैं। द ट्रिब्यून के अनुसार, कतर के अंतर्राष्ट्रीय सैन्य संचालन प्रमुख, मेजर जनरल तारिक खालिद अल ओबैदली, वो कतरी नागरिक हैं, जिन पर भी जासूसी का आरोप लगाया गया है।

वहीं, अब कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को बताया गया है, कि कंपनी पनडुब्बी परियोजना पर मई महीने में काम बंद कर रही है और कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक भुगतान कर दिया जाएगा।

भारत सरकार की क्या है प्रतिक्रिया?

अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, कि 'हम कतरी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। दोहा में हमारा दूतावास परिवारों के संपर्क में बना हुआ है। अगली सुनवाई मई की शुरुआत में है। हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि उस सुनवाई के संबंध में उससे पहले क्या किया जा सकता है।

ट्रिब्यून के मुताबिक, डाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज ने परियोजना पर काम करने के लिए बड़ी संख्या में पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों को नियुक्त किया था। और अब उन सभी को सूचित किया गया है, कि कंपनी 31 मई से बंद हो रही है और उन्हें सेवरेंस पैकेज की पेशकश की गई है।

कानूनी खर्चों के भुगतान के लिए भविष्य में कोई वेतन नहीं होने के कारण, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह "इन भारतीयों की सहायता के लिए सभी प्रयास" कर रहा है।

अरिंदम बागची ने कहा, कि "यह अब कानूनी प्रक्रिया में है। मैं इस बात पर जोर देता हूं, कि हम हिरासत में लिए गए इन भारतीयों की सहायता के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया के तहत कानूनी सहायता के साथ-साथ कांसुलर सहायता भी प्रदान कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, कि भारतीय दूतावास भी परिवार के सदस्यों के नियमित दौरे की सुविधा प्रदान कर रहा है और हिरासत में लिए गए आठ लोगों को कांसुलर और कानूनी सहायता प्रदान कर रहा है।

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