यूक्रेन की जनता का मनोबल तोड़ने वाला पुतिन का खौफनाक प्लान, रूस की अगली क्रूर रणनीति समझिए

कीव/लंदन, 4 मार्च: रूस अब यूक्रेन को उस जगह चोट पहुंचाने की रणनीति बना चुका है, जो अबतक उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है। रूसी आक्रमण के 9 दिन हो चुके हैं और अभी तक यूक्रेन की सबसे बड़ी शक्ति उसके नागरिकों का हौसला रहा है। लेकिन, अब पुतिन उसे ही तोड़ने की योजना तैयार कर चुके हैं। पिछले एक-दो दिनों में रूसी सेनाओं ने जो रणनीति अपनाई है, उससे भी इन आशंकाओं की पुष्टि हो रही है। आने वाले दिनों में पुतिन के इन खौफनाक इरादों की और भी झलक देखने को मिल सकती है। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया को इस योजना की भनक भी लगी है।

तालिबान की तरह सोचने लगे हैं रूसी राष्ट्रपति पुतिन ?

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माना जा रहा है कि रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस ने यूक्रेन के खिलाफ बहुत ही क्रूर रणनीति तैयार कर ली है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके तहत रूस अब यूक्रेन में विरोध करने वालों के खिलाफ बहुत ही सख्त कार्रवाई करेगा। एक अज्ञात यूरोपीय इंटेलिजेंस अफसर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस भयानक सोच का खुलासा किया है। यूके में ब्लूमबर्ग न्यूज की पॉलिटिकल एडिटर किटी डॉनाल्डसन ने इस स्टोरी को ब्रेक करते हुए ट्विटर पर लिखा है, 'नया: एक यूरोपीय इंटेलिजेंस ऑफिसर के मुताबिक रूसी इंटेलिजेंस एजेंसी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस ने शहरों पर कब्जा कर लेने के बाद सार्वजनिक तौर पर फांसी देने का मसौदा तैयार किया है।'

यूक्रेन का मनोबल तोड़ने की क्रूर रणनीति

यूक्रेन का मनोबल तोड़ने की क्रूर रणनीति

अगले ट्वीट में वो ये भी लिखती हैं, ' (रूसी)एजेंसी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हिंसक तरीका इस्तेमाल करने की भी योजना पर काम कर रही है और यूक्रेन के लोगों का मनोबल तोड़ने के लिए विरोध आयोजित करने वालों को हिरासत में लेने जैसी दमनकारी रणनीति तैयारी कर रही है।' पुतिन के इस इरादे का खुलासा ऐसे समय में हुआ, जब यूक्रेन के अफसरों के मुताबिक दुनिया ने देखा कि यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पॉपर प्लांट जपोरिजिया पर कब्जे के लिए रूसी सेना ने किस तरह से टैंकों और मिसाइलों का इस्तेमाल किया। अगर यूक्रेन की जनता का मनोबल तोड़ने का पुतिन ने इरादा पक्का कर रखा है तो न्यूक्लियर पॉपर प्लांट पर हमला, सबसे बड़ा उदाहरण लग रहा है। क्योंकि, इसने सिर्फ यूक्रेन को नहीं, पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है।

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    लगातार रियाशी इलाके बन रहे हैं पुतिन के गुस्से का शिकार

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    एक बात और गौर करने वाली है कि पुतिन के इरादों का नया खुलासा ऐसे समय में हो रहा है, जब उन्होंने उलटा दावा किया था कि यूक्रेन ही अपने नागरिकों और विदेशियों (भारतीय समेत) को 'मानवीय ढाल' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। जबकि, रूसी सेना की ओर से घनी आबादी वाले इलाकों में भी गोलाबारी की घटनाएं देखने को मिल चुकी हैं, जिसकी चपेट में आकर एक भारतीय स्टूडेंट की भी मौत हो चुकी है। रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव और खारकिव जैसे शहरों में भयानक हमले किए हैं, जिसकी तबाही का मंजर तस्वीरों के जरिए दुनिया देख रही है।

    क्यों बार-बार याद आ रही है हिटलरशाही ?

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    इससे पहले यूक्रेन सरकार की ओर से कहा जा चुका है कि उसके बंदरगाह शहर मारियुपोल में विनाशकारी बमबारी हुई है और वह 'लेनिनग्राद की तरह' बनने की ओर बढ़ रहा है। रूस का मौजूदा शहर सेंट पीटर्सबर्ग सोवियत संघ के जमाने में लेनिनग्राद कहलाता था, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नाजियों के गुस्से का शिकार हुआ था और लगभग दो वर्षों में वहां 15 लाख लोगों का नरसंहार कर दिया गया था।

    बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं लोग, नहीं पिघल रहे हैं पुतिन

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    रूसी सेना जैसे-जैसे यूक्रेन के उत्तरपूर्वी, पूर्वी और दक्षिणपूर्वी शहरों की ओर से कब्जा करते हुए आगे की ओर बढ़ती जा रही है, भारी गोलाबारी की वजह से रिहायशी इलाके भी तबाह होते जा रहे हैं और ब्लैकआउट की स्थिति पैदा होने के चलते आम लोगों के लिए बूंद-बूंद पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। स्थिति इतनी विपरीत है कि ना तो लोगों को निकाला जा सकता है और ना ही उन्हें सप्लाई उपलब्ध करवाई जा सकती है। गुरुवार को चेर्निहिव में एक अपार्टमेंट ब्लॉक पर हवाई हमला भी किया गया था, जिसमें कम से कम 22 नागरिकों की मौत का दावा किया गया है।

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