कैमिकल हथियारों के साथ युद्ध की शुरूआत? यूक्रेन संकट पर अमेरिका-रूस में आखिरी जुबानी जंग!
सैटेलाइट्स तस्वीरों से पता चला है कि, रूस के निशाने पर सीधे तौर पर यूक्रेन की राजधानी कीव है।
वॉशिंगटन/मॉस्को, फरवरी 18: अमेरिका ने गुरुवार को चेतावनी देते हुए कहा है कि, यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले रूस की तरफ से फॉल्स फ्लैग कैमिकल हथियारों के साथ हमला किया जा सकता है और उसके बाद रूस की सेना यूक्रेन पर हमला करेगी। अमेरिका की तरफ से ये चेतावनी उस वक्त जारी की गई है, जब रूस ने मॉस्को से अमेरिका के उप-राजदूत को बाहर निकाल दिया है और रूस की तरफ से कहा गया है कि, अमेरिका फौरन मध्य और पूर्वी यूरोप से अपने सैनिकों को बाहर ले जाए।

कैमिकल हथियारों से लड़ाई की शुरूआत?
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि, रूस फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की योजना के तहत पहले अपने ही लोगों पर कैमिकल हथियारों के साथ हमला कर सकता है और फिर वो यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा है कि, उसे रूस की कई योजनाओं के बारे में पता है, जिसमें कैमिकल हथियारों के साथ लड़ाई की शुरूआत करने की भी एक योजना है। इसके साथ ही अमेरिका ने मांग करते हुए कहा कि, रूस को फौरन यूक्रेन की सीमा से अपने सैनिकों को पीछे हटने के लिए कहना चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि, रूस 'आने वाले दिनों में' आक्रमण की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हम वास्तव में औपचारिक रूप से नहीं जानते हैं।' उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि पुतिन हमले का बहाना बनाकर आक्रमण शुरू करेंगे।
हमले के लिए बहाने की तलाश
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि, '''रूस के अंदर एक मनगढ़ंत और तथाकथित आतंकवादी हमला हो सकता है, जिसमें आतंकवादी बमबारी कर सकते हैं और रूस के अंदर एक सामूहिक कब्र की भी खोज की गई है, या फिर रूस खुद अपने ही नागरिकों पर कोई ड्रोन हमला करवा सकता है या फिर रूस वास्तविक में अपने ही नागरिकों पर रासायनिक हथियारों से हमला कर सकता है और उसकी जिम्मेदारी वो यूक्रेन पर डालकर, यूक्रेन पर हमला कर सकता है।'' अमेरिकी विदेश मंत्री ने यूएनएससी में रूस के ऊपर ये तमाम आरोप तब लगाए हैं, जब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि, अब कूटनीति की संभावना काफी कम हो गई है।

रूस की अमेरिका से मांगे
वहीं, रूस की तरफ से अमेरिका के राजदूत को कुछ दस्तावेज सौंपे गये हैं, जिसमें रूस की तरफ से अमेरिका के सामने कई मांगे रखी गईं हैं। रूस ने अमेरिका से कहा है कि, वो फौरन मध्य और पूर्वी यूरोप से अपने तमाम सैनिकों को बाहर निकाले। इसके साथ ही रूस ने मांग की है, कि अमेरिका फौरन बाल्टिक क्षेत्र से भी अपने सैनिकों और अपने हथियारों को बाहर ले जाए। रूस की तरफ से दस्तावेज में कहा गया है कि, अमेरिका ने पिछले कई महीनों में यूक्रेन को जो हथियार दिए हैं, उसे वापस ले जाए और यूक्रेन को नाटो में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाए जाए। लेकिन, ये कुछ ऐसी मांगे हैं, जिनको लेकर पूरी उम्मीद है, कि अमेरिका इसे अस्वीकार कर देगा। यानि, युद्ध का खतरा टला नहीं है।

अमेरिका ने फिर की बातचीत की पेशकश
वहीं, यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में अमेरिका ने एक बार फिर से बातचीत की पेशकश करते हुए कहा है कि, 'अमेरिका का मानना है कि, यूक्रेन संकट से निपटने के लिए आखिरी रास्ता बातचीत ही और डिप्लोमेटिक बातचीत के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है''। वहीं, रूस ने मॉस्को में मौजूद उस अमेरिकी उप-राजदूत को देश के बाहर निकाल दिया है, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि, 'रूस अगले कुछ दिनों में यूक्रेन पर हमला करेगा और इस बीच वो पुतिन से बात नहीं करेंगे।'

रूस पर प्रेशर बनाने की कोशिश
वहीं, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट स्पोक्स नेड प्राइस ने कहा कि, 'अमेरिका अपने सहयोगियों, भागीदारों के साथ समन्वय के साथ काम करना जारी रखेगा और नाटो-रसिया काउंसिल और ओएससीई के जरिए रूस के साथ बातचीत जारी रखेगा।' अमेरिका ने कहा कि, 'रूस ने आने वाले दिनों में बातचीत को लेकर नई तिथियां दी हैं और अगर वो इस बीच यूक्रेन पर हमला करता है, तो माना जाएगा कि रूस के लिए कूटनीति कोई मायने नहीं रखती है।' वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी कहा है कि, 'रूस को यूक्रेन पर हमला करने की किसी भी स्थिति से बचना चाहिए '

यूक्रेन की राजधानी है टार्गेट
वहीं, इन सबके बीच सैटेलाइट्स तस्वीरों से पता चला है कि, रूस के निशाने पर सीधे तौर पर यूक्रेन की राजधानी कीव है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि, बेलारूस में पिपरियात नदी के पार, जो यूक्रेन के चेरनोबिल के करीब है और राजधानी कीव से लगभग 80 मील उत्तर में स्थित है, वहां पर रूस ने एक नया पोंटून पुल बनाया गया है। यह आशंका है कि इस पुल का निर्माण सीधे तौर पर यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला करने के लिए बनाया गया है और इस पुल के पास भारी तादाद में रूसी टैंक्स तैनात हैं और इनका इस्तेमाल राजधानी पर हमले के लिए किया जा सकता है।












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