जेल में बंद दो पत्रकारों को मिला प्रतिष्ठित पुलित्जर अवॉर्ड, एक ने किया था रोहिंग्या नरसंहार का खुलासा
नई दिल्ली। न्यूज एजेंस रॉयटर्स ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग के लिए 2 पुलित्जर पुरुस्कार हासिल किया। इसमें बौद्ध गांव वालों और म्यांमार सेक्योरिटी फोर्सेज द्वारा 10 रोहिंग्या मुस्लमानों द्वारा के नरसंहार की इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट शामिल है। दूसरा पुरस्कार संयुक्त राज्य अमेरिका में शरण लेते हुए मध्य अमेरिकी प्रवासियों की तस्वीरें लेने के लिए मिला है। गौरतलब है कि इस पुरस्कार को हासिल करने वाले 2 रिपोर्टर्स को नरसंहार का खुलासा करने के लिए म्यांमार की जेल में 490 दिन की सजा सुनाई गई है।

बता दें कि ये लगातार दूसरा साल है जब रॉयटर्स ने एक साथ दो पुलित्जर जीते हैं। साल 2008 से रॉर्यटर्स 8 पुलित्जर हासिल कर चुका है। ये अमेरिकी पत्रकारिता का सबसे सम्मानजनक पुरस्कार है। रॉयटर्स के एडिटर इन चीफ स्टीफन डी एडलर ने कहा कि- हालांकि इस काम के लिए पहचाने जाने के लिए हमें खुशी है लेकिन जनता का ध्यान उन लोगों पर अधिक ध्यान केंद्रित होना चाहिए जिनके बारे में हम रिपोर्ट करते हैं: इस मामले में, रोहिंग्या और मध्य अमेरिकी प्रवासी वे लोग हैं।
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वहीं पुरस्कार हासिल करने वालों में अन्य कैटेगरी की बात करें तो अमेरिता में समूहिक हत्या और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर जांच शामिल हैं। द न्यूयार्क टाइम्स और द वाशिंगटन पोस्ट ने भी पुलित्जर हासिल किया है। रॉयटर्स और एसोसिएट प्रेस दोनों को ही अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर मिला है। पुलित्जर हासिल करने वाले बंदी दोनों रिपोर्टर्स वा लोन और क्याव सो ओ म्यांमार के वासी है। उन्हें एक मौदान में सामूहिक तौर पर पड़ी लाशें मिली थीं जिसके बाद उन्होंने जांच शुरू कर दी। अजीब बात है कि जिस काम के लिए पुरस्कार मिला है उसी के लिए कैद।
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