इतिहास नहीं रच पाया जापान, चांद पर नहीं उतर सका दुनिया का पहला निजी लैंडर, UAE का भी सपना टूटा

आईस्पेस कंपनी ने कहा कि इसकी संभावना अधिक है कि यान चंद्रमा की सतह पर उतरने की कोशिश करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यदि ये मिशन सफल होता तो 'आइस्पेस' चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यान उतारने वाली पहली निजी कंपनी बन जाती।

Japan Hakuto-R Private Moon Mission

जापान का एक निजी चांद मिशन असफल हो गया। लैंडर हकोतो-आर मंगलवार की रात चंद्रमा की सतह पर उतरने में नाकाम रहा। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से उतरने की कोशिश में लैंडर रोवर हादसे का शिकार हो गया। हादसे के बाद उसका संपर्क टूट गया।

अगर यह मिशन सफल होता तो 'आइस्पेस' चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यान उतारने वाली पहली निजी कंपनी बन जाती। आइस्पेस के अधिकारियों ने इस घटना के लगभग 6 घंटे बाद एक लाइव स्ट्रीम में माना कि लैंडिक के 35 मिनट बाद उनका संपर्क टूट गया।

आईस्पेस की टीम मून मिशन के लिए साढ़े चार महीने से भी अधिक वक्त से मेहनत कर रही थी। जापानी कंपनी के इस सैटेलाइट को पिछले साल दिसंबर में फ्लोरिडा के केप केनवरल से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया था।

कंपनी ने कहा कि उसके इंजीनियर यह जांच कर रहे हैं कि लैंडिंग विफल क्यों हुई। आपको बता दें कि एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के साथ मिलकर ये मिशन चल रहा था। स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किए जाने के बाद स्पेस जेट करीब एक महीने पहले चांद की कक्षा में पहुंचा था।

हकोतो-आर ने मंगलवार को चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई से 6,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरते हुए चंद्र सतह पर उतरना शुरू किया। लैंडिंग करने के दौरान संपर्क में रुकावट आई।

शुरू में आईस्पेस की टीम को ऐसा लगा कि रोवर लैंड कर जाएगा मगर कुछ देर बाद उसका पूरी तरह से संपर्क टूट गया। जापान के लैंडर को JAXA, जापानी टॉयमेकर टॉमी और सोनी ग्रुप की ओर से डिजाइन किए गए दो पहियों वाले बेसबॉल आकार के रोवर को तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया था।

संयुक्त अरब अमीरात का चार पहियों वाला 'राशिद' रोवर भी इसी के सहारे चंद्रमा पर भेजा गया था। यूएई का राशिद रोवर का काम चंद्रमा पर जाने के बाद वहां से मूल्यवान डेटा, अनोखई छवियां लेने के साथ-साथ सौर प्रणाली की उत्पत्ति, पृथ्वी और जीवन से संबंधित मामलों पर वैज्ञानिक डेटा का संग्रह करना था।

हालांकि जापानी कंपनी आईस्पेस का ये मिशन असफल जरूर हो गया मगर फिर भी, हकोतो-आर चंद्र कक्षा में प्रवेश करने और लैंडिंग का प्रयास करने में कामयाब रहा और ऐसा करने वाला यह पहला निजी रूप से वित्त पोषित मिशन बन गया।

आपको बता दें कि जापान के पहले अमेरिका, रूस और चीन ने ही चांद पर आरामदायक लैंडिंग करने में सफलता हासिल कर सका है। इसके अलावा इजरायल और भारत भी इस मामले में असफल साबित हुए हैं। भारत का विक्रम लैंडर भी 2019 में चांद पर उतरने में असफल साबित हुआ था।

जापान ने इस मिशन से जुड़े दूसरे यान को अगले साल यानी 2024 में लॉन्च करने की योजना बनाई है। ये उम्मीद है कि अगले साल आईस्पेस अपना खुद का लैंड रोवर लेकर आएगी।

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