राष्ट्रपति गोटाबाया भागे नहीं, देश में ही हैं, ये क्या हो रहा है श्रीलंका में
श्रीलंका संसद की अध्यक्ष महिंदा यापा ने कहा है कि, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश में ही हैं। वे भागे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि, पीएम रानिल विक्रमसिंघे भी श्रीलंका में ही हैं।
कोलंबो, 11 जुलाई : श्रीलंका की स्थिति अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। बढ़ती महंगाई के चलते देश में खाद्य पदार्थ, दवा, ईंधन की घोर क़िल्लत हो रखी है. देश में देर तक बिजली कटौती हो रही है। गुस्साए लोग सड़कों पर महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। कई लोग ऐसे हालात के लिए राजपक्षे परिवार और उनकी सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं। वहीं, श्रीलंका संसद की अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने ने कहा है कि, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश में ही हैं (sri lankan president gotabaya rajapaksa is still in the country)। वे भागे नहीं हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को इस बात की पुष्टि की। उन्होंने इससे पहले एक साक्षात्कार में कहा था कि, राष्ट्रपति देश छोड़कर चले गए हैं। उन्होंने पीएम को लेकर पुछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि, रानिल विक्रमसिंघे भी श्रीलंका में ही हैं। शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा करने वाले श्रीलंकाई राष्ट्रपति के बारे में कहा गया था कि वह भाग कर किसी अन्य देश में चले गए हैं।

हालात बिगड़ गए हैं श्रीलंका के
श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने ने सोमवार को स्पष्ट किया कि गोटबाया राजपक्षे अभी भी देश में हैं। इससे पहले रिपोर्ट में कहा गया था कि, वे देश छोड़ चुके हैं। बता दें कि, श्रीलंका में ताजा राजनीतिक हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि एक सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए वे पार्टी नेताओं की सबसे अच्छी सिफारिश को स्वीकार करते हैं। रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और सरकार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दावा किया जा रहा है कि जल्द ही श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे भी इस्तीफा दे सकते हैं। फिलहाल वे राष्ट्रपति भवन पर हुए प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद फरार हैं। विक्रमसिंघे को भी सुरक्षा कारणों से अज्ञात स्थान पर लेकर जाया गया है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक भी की थी।
परिवारवाद ने देश को बर्बाद कर दिया
परिवारवाद ने एक ऐसे राष्ट्र को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। अब देखना यह है कि श्रीलंकाई जनता इतना सब देखने-भोगने के बाद भी 'परिवारवाद' की जकड़न से मुक्त होती है या 'राजपक्षे' के बाद 'सिरिसेना' परिवार को रहनुमा बनाकर हमेशा के लिए राजनीतिक गुलाम रहना चाहती है? श्रीलंका का भविष्य उसकी जनता के रुख पर निर्भर है।

अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा श्रीलंका
1948 में स्वतंत्रता के बाद श्रीलंका अपने इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा है। नागरिक सड़कों पर अराजक हो चुके हैं, राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो गया है और प्रधानमंत्री के निजी निवास को आग के हवाले किया जा चुका है। इन सबके बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने 13 जुलाई को त्यागपत्र देने की घोषणा की है। फिलहाल वो किसी गुप्त स्थान पर चले गये हैं। श्रीलंका में फिलहाल सर्वदलीय सरकार बनाने की चर्चा चल रही है ताकि आगामी चुनाव तक सरकार के खिलाफ जनता के इस विद्रोह को थामकर रखा जाए।

श्रीलंका की जनता सरकार की नीति से नाराज
बता दें कि, श्रीलंका में हालात और ज्यादा बिगड़ गए है। 9 जुलाई को, प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो में राष्ट्रपति आवास को घेर लिया था, जिसके बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे आवास छोड़कर कहीं दूसरे जगह चले गए थे।

श्रीलंका में आगे क्या होगा ?
वहीं, देश की ताजा हालात की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पार्टी नेताओं की आपात बैठक बुलाई थी। वहीं, गाले फेस में विरोध मार्च में शामिल होने की कोशिश करने पर पूर्व मंत्री रजिता सेनेरथ को प्रदर्शनकारियों ने पीटा था।












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