पोप ने बदले यौन उत्पीड़न से जुड़ी जानकारियां छिपाने के नियम

पोप फ्रांसिस पर दबाव था कि वो चर्च में यौन उत्पीड़न के संकट का हल निकालें
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पोप फ्रांसिस पर दबाव था कि वो चर्च में यौन उत्पीड़न के संकट का हल निकालें

पोप ने ऐलान किया है कि नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में 'पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी' यानी 'पोप संबंधित मामलों की गोपनीयता' का नियम लागू नहीं होगा. चर्च का कहना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता लाने के मक़सद से यह क़दम उठाया गया है.

इससे पहले चर्च में यौन शोषण के मामलों पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता था. चर्चा का कहना था कि यह क़दम पीड़ितों की निजता और अभियुक्तों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उठाया जाता था.

मगर मंगलवार को जारी किए गए पोप संबंधित नए दस्तावेज़ों के अनुसार, अब जो लोग अपने साथ उत्पीड़न होने की शिकायत करते हैं या कहते हैं कि वो पीड़ित रहे हैं, उनपर ये पाबंदी नहीं रहेगी.

फ़रवरी में हुए वेटिकन समिट में चर्च के धार्मिक नेताओं ने इससे जुड़े नियमों को ख़त्म करने की मांग की थी.

उनका कहना था कि ये नियम ख़त्म करने से ऐसे मामलों में पारदर्शिता आएगी, साथ ही पुलिस और न्यायिक संस्थाएं चर्च से जानकारी ले सकेंगी, जिससे उनका काम आसान होगा.

पोप फ्रांसिस
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पोप ने अपनी घोषणा में कहा कि उत्पीड़न से जुड़ी जानकारियों के मामले में अभी भी "सुरक्षा, सच्चाई और गोपनीयता" का ध्यान रखा जाना चाहिए.

उन्होंने वेटिकन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वो ऐसे मामलों की जांच में क़ानून का पालन करें और न्यायिक संस्थाओं का सहयोग करें.

चाइल्ड पोर्न की परिभाषा भी बदली

पोप ने चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की 'वेटिकन की परिभाषा' में भी बदलाव किया. उन्होंने सब्जेक्ट यानी वीडियो में दिखने वाले की उम्र को 14 से बढ़ाकर 18 साल तक कर दिया है. यानी अब अगर पोर्न वीडियो में 18 या इससे कम उम्र का व्यक्ति है तो उसे चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी माना जाएगा.

चार्ल्स शिक्लूना, माल्टा के आर्चबिशप हैं और वेटिकन के सबसे अनुभवी यौन उत्पीड़न जांचकर्ता भी. उन्होंने इस क़दम को महत्वपूर्ण बताया है और कहा कि "इससे जांच के रास्ते में आने वाली अड़चने कम हो जाएगीं."

उन्होंने वेटिकन न्यूज़ से कहा कि पारदर्शिता के सवाल को अब उच्चतम स्तर पर लागू किया गया है.

चर्च में उस वक्त भूचाल आ गया था जब दुनियाभर में पादरियों द्वारा यौन उत्पीड़न की हज़ारों रिपोर्टें आने लगी थीं और वरिष्ठ पादरियों पर इस तरह के मामलों को छिपाने के आरोप लगे थे.

इसके बाद पोप फ्रांसिस पर दबाव बढ़ा कि वो इस संकट का कोई हल निकालें.

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क्या है 'पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी

'पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी' से जुड़े नियम संवेदनशील सूचनाओं जैसे कि वेटिकन और पोप के दूतावासों के बीच होने वाली बातचीत को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए हैं. यह उसी तरह की प्रक्रिया है जिस तरह से देश अपने दूतावासों के डिप्लोमैटिक केबल्स को सुरक्षित रखते हैं.

पोप संबंधित मामलों की गोपनीयता के नियमों को सालों तक न्यायिक मामलों पर भी लागू किया जाता रहा ताकि पीड़ितों की निजता और अभियुक्तों की पहचान छिपाई जा सके.

आलोचकों का कहना है कि पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी का चर्च के कुछ अधिकारियों ने दुरुपयोग किया है ताकि वे शोषण के मामलों में पुलिस का सहयोग करने से बच सकें.

आर्चबिशप शिक्लूना ने कहा, "हो सकता है कि कई बार पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी का हवाला देकर कह दिया गया हो कि वे सरकारी संस्थाओं या पीड़ितों के साथ सूचनाएं साझा नहीं कर सकते या इसके लिए अधिकृत नहीं हैं. लेकिन अब हम कह सकते हैं कि कोई पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी का बहाना नहीं बना पाएगा."

नए दिशानिर्देश जारी होने के बाद पोप के कामकाज में हाथ बंटानेवाले कार्यालय अब बच्चों के यौन शोषण और चाइल्ड पोर्न से जुड़े अपराधों को लेकर पॉन्टिफ़िकल सीक्रेट के आधार पर सूचनाओं को नहीं छिपा सकेंगे.

गवाह, अभियुक्त और शिकायतकर्ताओं पर भी मामलों को लेकर चुप रहने की बाध्यता नहीं होगी.

पोप फ्रांसिस
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अपने 83वें जन्मदिन पर पोप फ्ऱांसिस ने पीड़ितों की लंबे वक्त से चली आ रही मांग को देखते हुए घोषणा की कि चर्च के पास यौन उत्पीड़न के मामलों, नाबालिगों के उत्पीड़न और चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी को लेकर जो भी जानकारी होगी, वो प्रशासन को मुहैया कराई जाएगी.

इससे पहले चर्च पर आरोप थे कि वो गोपनीयता नियमों का हवाला देकर उत्पीड़न की शिकायतों को छिपाता रहा था. अगर कोई 'पॉन्टिफ़िकल सीक्रेसी' का उल्लंघन करता तो परिणाम स्वरूप चर्च उससे सारे रिश्ते तोड़ लेता. इसलिए लोग सरकारी संस्थाओं को कुछ बताने में हिचकते थे. लेकिन अब ये प्रतिबंध हटा लिए गए हैं.

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