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Mehul Choksi Arrested: मेहुल चोकसी को भारत ला पाना कितना आसान या मुश्किल? क्या आतंकी राणा की तरह लगेंगे 16 साल

Mehul Choksi Arrested: भारत के भगोड़ों की लिस्ट में शुमार मेहुल चोकसी को आखिरकार बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया। चोकसी पर पीएनबी घोटाले में 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इस घोटाले में वांछित चोकसी लंबे समय से भारत की जांच एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

Mehul Choksi Arrested

बता दें कि हाल ही में मुंबई में 26/11 आतंकी हमले की साजिश में अहम भूमिका निभाने वाले आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा को प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। ऐसे में मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी भारत के लिए दूसरी बड़ी कामयाबी है। अब सवाल है कि क्या भारत मेहुल चोकसी को जल्दी वापस ला पाएगा, या फिर यह प्रक्रिया तहव्वुर राणा जैसे आतंकी के प्रत्यर्पण की तरह लंबी और जटिल होगी, जिसे भारत लाने में 16 साल लग गए?

भारतीय वारंट पर पकड़ा गया मेहुल चोकसी

बेल्जियम पुलिस ने भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को गिरफ्तार करते वक्त मुंबई कोर्ट के दो अरेस्ट वारंट का हवाला दिया। ये वारंट 23 मई 2018 और 15 जून 2021 को जारी किए गए थे। हालांकि, अब चोकसी की टीम खराब स्वास्थ्य और अन्य कारणों का बहाना बनाकर उसकी जमानत और तुरंत रिहाई की मांग कर सकती है। यह वही रणनीति है जो उसने पहले डोमिनिका और अन्य देशों में भी अपनाई थी।

मेहुल चोकसी का मामला: अब तक की कहानी

चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 14,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। उसे भारत सरकार ने फगेटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया है। मेहुल चोकसी अपने भतीजे नीरव मोदी के साथ मिलकर PNB घोटाले में शामिल रहा। जनवरी 2018 में घोटाला सामने आने के बाद चोकसी भारत छोड़कर भाग गया और एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले ली।

भारत ने उसके खिलाफ CBI, ED और इंटरपोल के जरिए कार्रवाई शुरू की। 2021 में चोकसी डोमिनिका में पकड़ा गया था, लेकिन कानूनी दांवपेच और स्वास्थ्य आधार पर वहां से रिहा हो गया। अब उसे बेल्जियम पुलिस ने गिरफ्तार किया है और भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

इंटरपोल रेड नोटिस हटा, फिर भी गिरफ्तारी

बता दें कि इंटरपोल ने उसके खिलाफ जारी रेड नोटिस को हटा दिया था, लेकिन भारतीय एजेंसियों-ED और CBI-ने बेल्जियम से उसके प्रत्यर्पण की मांग की। ED ने आरोप लगाया है कि चोकसी और उसकी कंपनी गीतांजलि जेम्स ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से धोखाधड़ी की और PNB को भारी नुकसान पहुंचाया।

क्या भारत लाना होगा आसान?

अब सवाल यह है कि क्या भारत सरकार चोकसी को जल्दी देश वापस ला पाएगी या फिर यह मामला आतंकी राणा की तरह 16 साल तक खिंचेगा? जांच एजेंसियों ने अब तक उसके खिलाफ तीन चार्जशीट दाखिल की हैं, लेकिन कानूनी लड़ाई लंबी होने की आशंका है।हालांकि, तहव्वुर राणा जैसे 16 साल लगने की संभावना कम है। इसके कई कारण हैं:

  • तेज होती प्रक्रिया: भारत ने हाल के वर्षों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने के लिए कदम उठाए हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय दबाव: वैश्विक स्तर पर आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लिया जाता है। बेल्जियम जैसे देश भारत के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य हो सकते हैं।
  • सबूतों की मजबूती: चोकसी के खिलाफ सबूत पहले से ही मौजूद हैं, जो प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।

देखना यह भी होगा कि अगर चोकसी कानूनी रास्तों का सहारा लेता है, तो यह कितना लंबा चलेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बेल्जियम की अदालतें कितनी जल्दी फैसला लेती हैं और चोकसी की अपीलें कितनी मजबूत होती हैं।

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