अफगानिस्तान मुद्दे पर पीएम मोदी- व्लादिमीर पुतिन की 45 मिनट तक बातचीत, लिया बड़ा फैसला
अफगानिस्तान संकट और भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों को लेकर पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच 45 मिनट तक बातचीत हुई है।
नई दिल्ली/मॉस्को, अगस्त 24: अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बेहद महत्वपूर्ण बताचीत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीत करीब 45 मिनट तक अफगानिस्तान के साथ साथ कई और वैश्विक मसलों पर बात हुई है। आपको बता दें कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद वैश्विक परिस्थितियां काफी तेजी से बदल रही हैं, वहीं अफगानिस्तान के मुद्दे पर रूस का नजरिया भारत को लेकर 50-50 का रहा है।

मोदी-पुतिन में बातचीत
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए कहा है कि उनकी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ करीब 45 मिनट तक बात हुई है। पीएम मोदी ने ट्वीट में कहा है कि ''अफगानिस्तान में हाल के घटनाक्रम पर अपने मित्र और राष्ट्रपति पुतिन के साथ विस्तृत और उपयोगी चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान किया गया है। हमने द्विपक्षीय एजेंडे के मुद्दों पर भी चर्चा की है, जिसमें COVID-19 के खिलाफ भारत-रूस सहयोग शामिल है। हम महत्वपूर्ण मुद्दों पर करीबी परामर्श जारी रखने पर सहमत हुए।'' अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति को अभी हर देश समझने की कोशिश में है। कट्टरपंथी संगठन के काबुल पर कब्जे के बाद रूस को भी आतंकी घटनाओं का देश में होने का डर सता रहा है तो भारत को भी ऐसा ही डर है। लिहाजा दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की गई है।
अफगानिस्तान पर रूस-भारत
रूस और भारत के बीच अफगानिस्तान के मुद्दे पर 50-50 विचार रहा है। कई मौके पर रूस ने भारत के बजाए पाकिस्तान का साथ लिया है, जबकि अमेरिका ने भारत का पक्ष लिया है। पिछले महीने ही जब ट्रोयका प्लस की बैठक हुई थी तो उसमें रूस ने अध्यक्ष होने के नाते भारत को आमंत्रित नहीं किया था। रूस के विदेश मंत्री सर्गेल लावरेव ने कहा था कि चूंकि भारत का तालिबान के साथ कुछ खास रिश्ता नहीं है और तालिबान पर भारत का प्रभाव भी नहीं है, लिहाजा भारत के लिए बैठक में शामिल होने का कोई मतलब नहीं था। रूस ने भले ही ये दलील दी थी, लेकिन माना गया कि रूस ने पारिस्तान के प्रभाव में आकर भारत को बैठक में आमंत्रित नहीं किया।

भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति
आपको बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इस साल के अंत में भारत के दौरे पर आने वाले हैं। हर साल भारत और रूस के नेताओं का सम्मेलन होता है। एक साल भारत के राष्ट्राध्यक्ष मॉस्को जाते हैं तो एक साल रूस के राष्ट्रपति भारत आते हैं। पिछली बार कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से पीएम मोदी मॉस्को नहीं जा पाए थे और उस बार पुतिन का भारत आने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस साल मार्च में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरेव ने भारत आकर व्लादिमिर पुतिन के भारत आने के कार्यक्रम की रूपरेखा भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ तैयार की थी।

नई ऊंचाई पर भारत-रूस संबंध
इसी साल पांच जून को भारतीय न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि 'भारत रूस का एकमात्र ऐसे भागीदार हैं जो उन्नत हथियार प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के विकास और निर्माण के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। भारत दुनिया का एकमात्र देश है, जिसे रूस अपनी टेक्नोलॉजी देता है, वो भी भारत के अंदर निर्माण कार्य करने के लिए और उसके तहत हम भारत में हथियार निर्माण करते हैं। लेकिन सिर्फ रक्षा क्षेत्र ही एक मात्र ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां हमारा सहयोग समाप्त होता है। हमारा सहयोग बहुआयामी है।












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