अब भारत में तैयार होंगे लड़ाकू विमानों के इंजन, GE और HAL के बीच हुआ समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की चल रही आधिकारिक यात्रा के दौरान अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच फाइटर प्लेन के F414 इंजन बनाने का समझौता हो गया है।
समझौते के बाद अब भारतीय लड़ाकू विमानों के इंजन भारत में ही बनेंगे। पहले GE इन्हें सप्लाई करती थी। GE ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के समय हुए इस समझौते को मील का पत्थर बताया है।

भारत दुनिया का पांचवा ऐसा देश बन जाएगा, जो लड़ाकू विमानों के इंजनों का निर्माण करेगा।
GE ने बताया है कि डील से दोनों देशों को इकोनॉमिक और सुरक्षा से जुड़े फायदे होंगे। GE और HAL के बीच हुई डील भारतीय एयरफोर्स के हल्के लड़ाकू विमान बनाने के प्रोग्राम Mk2 में अहम भुमिका निभाएगी।
जानकारी के मुताबिक जनरल इलेक्ट्रिक जेट इंजन की 80 फीसदी तकनीक का ट्रांसफ़र एचएचएल को करेगी। अभी तक भारतीय वायुसेना में शामिल तेजस के वेरिएंट में अमेरिकी जीई का ही कम शक्ति का इंजन F 404 लगा है।
GE की एक सहायक कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस ने गुरुवार को ऐलान किया है कि वह भारत में F141 इंजन का उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के (HAL) के साथ करेगी।
जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस ने कहा कि जीई एयरोस्पेस ने कहा है कि F414 इंजन अपने आप में बेजोड़ है। ये F414 इंजन भारत के स्वदेशी निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस को और भी ज्यादा ताकत प्रदान करेगा।
जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस के CEO एच लॉरेंस कल्प जूनियर ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समझौता है, यह भारत और एचएएल के साथ उनकी लंबी साझेदारी का परिणाम है।
जीईएयरोस्पेस के सीईओ ने कहा कि वे पीएम मोदी और प्रेसिडेंट जो बाइडेन के उस विजन को पूरा करने में गर्वित महसूस कर रहे हैं जिसमें दोनों देशों के क्लोजर कॉर्डिनेशन की बात की जा रही है।












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