डेमोक्रेसी समिट में पीएम मोदी ने दिखाई हिन्दुस्तान की ताकत, बाइडेन के सामने भारतीय लोकतंत्र पर कही बड़ी बात
डेमोक्रेसी समिट में अमेरिका ने चीन और तुर्की को आमंत्रित नहीं किया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया था।

PM Modi at Democracy Summit: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा, कि कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकतंत्र शिखर सम्मेलन में बोल रहे थे और इस दौरान पीएम मोदी संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ डेमोक्रेसी शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी कर रहे थे। शिखर सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, कि "अर्थव्यवस्था पर भारत का बढ़ता प्रभाव इस बात का प्रमाण है, कि लोकतंत्र काम कर सकता है"।
डेमोक्रेसी समिट में क्या बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डेमोक्रेसी समिट में बोलते हुए कहा, कि "भारत, कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, आज सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। यह अपने आप में लोकतंत्र और दुनिया के लिए सबसे अच्छा विज्ञापन है। और ये इस बात का उदाहरण है, कि लोकतंत्र काम कर सकता है।" समिट फॉर डेमोक्रेसी, 2023 के एक वर्चुअल संबोधन में, पीएम मोदी ने यह भी कहा, कि उनकी सरकार की हर पहल भारत के नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से संचालित होती है। आपको बता दें, कि डेमोक्रेसी को लेकर ये दूसरा शिखर सम्मेलन हो रहा है, जिसे अमेरिका संचालित कर रहा है, जिसमें चीन और तुर्की को आमंत्रित नहीं किया गया है, जबकि चीन को न्योता नहीं मिलने की वजह से पाकिस्तान ने इस शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
भारत ने की शह-मेजबानी
दूसरी डेमोक्रेसी समिट की मेजबानी जहां अमेरिका कर रहा था, वहीं इसकी सह मेजबानी भारत, जाम्बिया, कोस्टा रिका और नीदरलैंड ने की है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल ने'लीडर-लेवल प्लेनरी ऑन डेमोक्रेसी डिलीवरिंग इकोनॉमिक ग्रोथ एंड शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी' सत्र के दौरान बोलते हुए कहा, कि चुने हुए नेताओं का विचार भारत में प्राचीन समय में ही था और उस वक्त पूरी दुनिया में ये विचार नहीं फैला था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, कि "हमारा महाकाव्य महाभारत, अपने स्वयं के नेता को चुनने के रूप में नागरिकों के पहले कर्तव्य का वर्णन करता है। हमारा पवित्र वेद, व्यापक तौर पर सलाहकार निकायों द्वारा राजनीतिक शक्ति का प्रयोग करने की बात करते हैं। प्राचीन भारत में गणतंत्र राज्यों के कई ऐतिहासिक साक्ष्य भी हैं, जहां शासक वंशानुगत नहीं थे।"
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'लोकतंत्र की जननी है भारत'
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, कि "भारत वास्तव में लोकतंत्र की जननी है और लोकतंत्र सिर्फ एक संरचना नहीं है, बल्कि यह एक भावना भी है। यह इस विश्वास पर आधारित है, कि हर इंसान की जरूरतें और आकांक्षाएं समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। यही कारण है कि भारत में, हमारा मार्गदर्शक दर्शन 'सबका साथ, सबका विकास' है, जिसका अर्थ समावेशी विकास के लिए एक साथ प्रयास करना है।" पीएम मोदी ने कहा, कि "चाहे जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से लड़ने का हमारा प्रयास हो, या फिर भंडारण के माध्यम से पानी का संरक्षण करना हो या सभी को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन प्रदान करना हो, हर पहल भारत के नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से संचालित होती है। कोविड-19 के दौरान, भारत की प्रतिक्रिया लोगों की तरफ से ही संचालित थी।"












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