PM Modi Israel Visit: नेतन्याहू को मोदी का इंतजार क्यों? ये 5 कारण बताते हैं भारत बना ग्लोबल पावर
PM Modi Israel Visit 2026: इजराइल-फिलिस्तीन के बीच जारी भीषण युद्ध और गहराते वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25-26 फरवरी का इजराइल दौरा कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है। ऐसे समय में जब इजराइल अंतरराष्ट्रीय अलगाव और भारी दबाव का सामना कर रहा है, पीएम मोदी का वहां पहुंचना प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए किसी 'रणनीतिक संजीवनी' से कम नहीं है।
नेतन्याहू के लिए यह केवल एक द्विपक्षीय दौरा नहीं, बल्कि अपने सबसे भरोसेमंद वैश्विक मित्र का साथ है, जिनके साथ उनका निजी तालमेल जगजाहिर है। भारत जैसे प्रभावशाली राष्ट्र का समर्थन इस कठिन समय में इजराइल को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान करता है। आइए जानते हैं वे 5 बड़े कारण, जो पीएम मोदी के इस दौरे को नेतन्याहू के लिए बेहद खास और अनिवार्य बनाते हैं।

India Israel Relations: अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बीच 'वैश्विक मान्यता'
युद्ध के चलते इजरायल इस समय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काफी दबाव और अकेलेपन का सामना कर रहा है। कई यूरोपीय देशों और वैश्विक संगठनों के रुख के बीच, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का इजरायल आना नेतन्याहू के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह दौरा दुनिया को संदेश देता है कि भारत जैसा प्रभावशाली देश इजरायल को एक जायज और महत्वपूर्ण साझीदार मानता है, जो नेतन्याहू के लिए एक 'वैश्विक ढाल' का काम करेगा।
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घरेलू विरोध के खिलाफ 'दोस्ती का सहारा'
नेतन्याहू इस समय इजराइल के भीतर भी जनता के गुस्से और राजनीतिक विरोध का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी के साथ उनकी तस्वीरें और मोदी का 'क्नेसैट' (संसद) में प्रस्तावित भाषण इजराइली जनता को यह संदेश देगा कि उनके प्रधानमंत्री के पास दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता का समर्थन है। यह 'पर्सनल बॉन्ड' नेतन्याहू की गिरती लोकप्रियता को संभालने और अपनी जनता के बीच यह साबित करने में मदद करेगा कि वे अब भी इजराइल के लिए सबसे मजबूत नेता हैं।
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मानव संसाधन (वर्कफोर्स) की भारी कमी
युद्ध की लंबी अवधि के कारण इजराइल में अन्य देशों के मजदूर अपने वतन लौट गए हैं, जिससे वहां निर्माण और खेती जैसे क्षेत्रों में काम ठप पड़ा है। नेतन्याहू को उम्मीद है कि पीएम मोदी के साथ बातचीत के बाद भारत से कुशल कामगारों (Indian Workers in Israel) की बड़ी खेप दोबारा इजराइल आएगी। अभी भी वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं, और इजराइल इस वर्कफोर्स को और बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना चाहता है।
'हेक्सागन' गठबंधन और क्षेत्रीय संतुलन
नेतन्याहू मध्य पूर्व में 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' (छह देशों का गठबंधन) बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसमें भारत की भूमिका सबसे अहम है। वे चाहते हैं कि भारत, ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों के साथ मिलकर एक ऐसा 'स्थिरता का धुरी' (Axis of Stability) तैयार किया जाए जो क्षेत्र में कट्टरपंथी ताकतों को संतुलित कर सके। मोदी का यह दौरा इस नए रणनीतिक ढांचे को हकीकत में बदलने के लिए बहुत जरूरी है।
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'मिशन सुदर्शन' और डिफेंस का नया दौर
इजराइल और भारत अब केवल हथियारों के खरीदार-बेचने वाले नहीं रहे, बल्कि 'को-डेवलपर' बन रहे हैं। नेतन्याहू को इंतजार है कि 'मिशन सुदर्शन' (Project Kusha) के तहत भारत और इजराइल मिलकर अगली पीढ़ी के एयर डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियारों पर काम शुरू करें। इजराइल अपनी सबसे एडवांस तकनीक भारत के साथ साझा करने को तैयार है, जो युद्ध के समय में दोनों देशों की सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा।












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