SCO Summit: शहबाज और शी जिनपिंग से मिल सकते हैं PM मोदी, बिलावल से मिलेंगे जयशंकर?

भारत इस साल एससीओ की बैठक की मेजबानी करने वाला है और भारत से पहले उज्बेकिस्तान एससीओ की मेजबानी कर रहा था।

नई दिल्ली, जुलाई 23: पूर्वी लद्दाख में चीनी आक्रामकता और एलएसी पर जारी तनाव के बीद सभी की निगाहें 15 और 16 सितंबर को समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन पर टिकी हुई है, जहां भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात को लेकर संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, बीते कुछ महीनों से भारत ने चीन को लेकर काफी सख्त रवैया अपना रहा है, लिहाजा सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे?

शी जिनपिंग से मिलेंगे पीएम मोदी?

शी जिनपिंग से मिलेंगे पीएम मोदी?

एससीओ की यह बैठक संभावनाओं से भरी हुई है, क्योंकि दोनों नेताओं ने 7 जुलाई 2017 को हैम्बर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर एक त्वरित बैठक में मुलाकात की थी और दोनों नेताओं के बीच की गई वो बैठक डोकलाम तनाव के ठीक बात हुई थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आखिरी आमने-सामने की बैठक 13 नवंबर 2019 को ब्राजील की राजधामी ब्रीसीलिया में हुई थी, जब दोनों नेताएं ने ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लिया था, लेकिन उसके बाद अलग अलग प्लेटफॉर्म पर हुए वर्चुअल बैठक में तो दोनों नेता शामिल हुए हैं, लेकिन आमने-सामने की बैठक नहीं हो पाई है और इस दौरान दोनों देशों के बीच के संबंध में काफी गिरावट आई है और जब पीएलए ने 5 मई 2020 को पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर और फिर गालवान, खुगरंग में जमीनी स्थिति को बदलने की कोशिश की, तो 17 मई 2020 को पूर्वी लद्दाख सेक्टर में नाला, गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में तनाव भड़क उठा, जो जून महीने में हिंसक झड़प में तब्दील हो गया।

अब भारत करेगा एससीओ की अध्यक्षता

अब भारत करेगा एससीओ की अध्यक्षता

भारत इस साल एससीओ की बैठक की मेजबानी करने वाला है और भारत से पहले उज्बेकिस्तान एससीओ की मेजबानी कर रहा था। लिहाजा, पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित एससीओ के सभी नेताओं के साथ बातचीत करेंगे और यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ भी पीएम मोदी की शिष्टाचार मुलाकात भी संभव है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर 29-29 जुलाई को एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए अगले सप्ताह समरकंद जाने वाले हैं और उनकी इस यात्रा के बाद साफ हो जाएगा, कि एससीओ की बैठक को लेकर क्या भारत क्या कदम उठाने वाला है।

चीन के साथ रिश्ते सामान्य करने की कोशिश

चीन के साथ रिश्ते सामान्य करने की कोशिश

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने 7 जुलाई को इंडोनेशिया की राजधानी बाली में जी-20 मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की थी, जिसमें दोनों नेताओं के बीच एलएसी पर तनाव कम करने और दोनों देशों की सेनाओं की मौजूदगी को कम कर द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई थी। वहीं, दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद ही 17 जुलाई को भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडर लेवल की बातचीत हुई थी। एलएसी विवाद को हल करने के लिए ये बातचीत सही दिशा में जा रही है और दोनों पक्षों की तरफ से इस बाबत संयुक्त बयान भी जारी किया गया था और चीन के संदर्भ में ऐसा करना दुर्लभ है। 17 जुलाई की बैठक के बाद संयुक्त बयान में कहा गया, कि "दोनों पक्षों ने पुष्टि की है, कि शेष मुद्दों के समाधान से एलएसी के पश्चिमी क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति हो सकेगी।"

पाकिस्तानी विदेशी मंत्री से मुलाकात संभव

पाकिस्तानी विदेशी मंत्री से मुलाकात संभव

चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात के इतर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की एक हफ्ते बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी के बीच भी बैठक होने की संभावना है। आतंकवाद या जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के रवैये में कोई बदलाव नहीं होने के कारण, शिष्टाचार मुलाकात में शायद ही किसी महत्वपूर्ण नतीजे निकलने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, सभी की निगाहें भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली संभावित बैठक पर लगी है, क्योंकि उस वक्त तक शी जिनपिंग लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बन चुके हैं और वो चीन के अंदर अपने सभी विरोधियों का सफाया कर चुके हैं, लिहाजा अब चीन के अंदर शी जिनपिंग सबसे ताकतवर नेता बन चुके हैं। ऐसे में कुछ एक्सपर्ट्स उम्मीद जता रहे हैं, कि द्विपक्षीय मुलाकात के दौकान पीएलए अध्यक् शी जिनपिंग पीएलए को भारतीय सेना के साथ लद्दाख एलएसी मुद्दों को हल करने का निर्देश दे सकते हैं और द्विपक्षीय बहाली की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

एलएसी पर सख्त है भारतीय सेना

एलएसी पर सख्त है भारतीय सेना

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध,जिसने द्विपक्षीय संबंधों को और भी तनावपूर्ण किया है, वो मई 2022 में अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर गया है। 17 जुलाई को हुई बैठक से पहले भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने आखिरी बार 11 मार्च को इस मामले पर बातचीत की थी। हालांकि, अभी भी इस बात की पूरी उम्मीद नहीं है, कि बातचीत के बाद चीन की सेना पीछे हट जाएगी और तनाव खत्म हो जाएगा। दोनों सेनाओं ने 2020 में आठ दौर की बातचीत की थी और उसी साल जून में पहली बार बातचीत हुई थी। वहीं, साल 2021 में पांच दौर और इस साल अब तक दो दौर की बातचीत हो चुकी है।

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