भारत-अमेरिका संबंधों के लिए आज परीक्षा का दिन! मोदी-बाइडेन में होगी बैठक, राजनाथ, जयशंकर भी US में मौजूद
जो बाइडेन और नरेन्द्र मोदी के बीच वर्चुअल बैठक होगी तो दूसरी तरफ भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर और अपने अमेरिकी समकक्ष रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन और विदेश सचिव एंटनी जे ब्लिंकन के साथ बैठक करेंगे।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, अप्रैल 11: यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते में हल्का सा तनाव जरूर आया है, लेकिन इस तनाव के बीच ही दोनों देशों के बीच आज दो अहम बैठकें होंने जा रही हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, आज भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच वर्चुअल बैठक होगी। दोनों नेताओं के बीच की ये बैठक, भारत और अमेरिका के बीच 2+2 बैठक से पहले होगी, जिसमें हिस्सा लेने के लिए भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका पहुंच चुके हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि, दोनों देशों के बीच आज की बैठक जिन परिस्थियों के बीच हो ही है, वो एक परीक्षा की घड़ी है और भारत इसमें संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका अगर भारत से संबंध खराब करता है, तो वो दक्षिण एशिया से अपने संपर्क को काट लेगा, जो उसके लिए सबसे बड़ा झटका होगा।

बाइडेन-मोदी वर्चुअल बैठक
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन "यूक्रेन के खिलाफ रूस के क्रूर युद्ध के परिणामों और वैश्विक खाद्य आपूर्ति और कमोडिटी बाजारों पर इसके अस्थिर प्रभाव को कम करने के परिणामों पर निकट परामर्श" जारी रखेंगे। यानि, अमेरिका की तरफ से साफ कर दिया गया है, कि दोनों नेताओं की बीच की बैठक में यूक्रेन का मुद्दा सबसे अहम रहने वाला है और अमेरिका की तरफ से एक बार फिर से रूस के खिलाफ एक्शन लेने के लिए दवाब बनाने की कोशिश की जाएगी। वहीं, बैठक को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि, "दोनों नेता, दोनों देशों के बीच चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे और दक्षिण एशिया, भारत-प्रशांत क्षेत्र और पारस्परिक हित को देखते हुए वैश्विक मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।'
अमेरिका में 2+2 बैठक
एक तरफ जो बाइडेन और नरेन्द्र मोदी के बीच वर्चुअल बैठक होगी तो दूसरी तरफ भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर और अपने अमेरिकी समकक्ष रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन और विदेश सचिव एंटनी जे ब्लिंकन के साथ बैठक करेंगे। ये बैठक भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे के करीब प्रस्तावित है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक से पहले यूक्रेन संकट में अपने न्यूट्रल रूख को देखते हुए भारत ने काफी सावधानी के साथ डिप्लोमेटिक प्रस्ताव तैयार किया गया है। भारत की कोशिश काफी सावधानी के साथ रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की है।

यूक्रेन संकट पर संतुलन बनाने की कोशिश
भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने के प्रस्ताव में भाग नहीं लिया था, जबकि भारत की तरफ से बूचा में की गई हत्याओं की निंदा की गई थी। इसे दिल्ली द्वारा यूक्रेन के खिलाफ अपनी कार्रवाइयों के लिए मास्को को एक संकेत भेजने के रूप में देखा गया और भारत ने अप तक का रूस के खिलाफ सबसे 'कठोर' बयान यही दिया है। हालांकि, भारत के इस कदम ने साफ तौर पर ये भी सुनिश्चित कर दिया है, कि, रूस के साथ अपने सामरिक हितों को देखते हुए भारत, अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ पूरी तरह से गठबंधन नहीं करेगा। हाल के हफ्तों में वाशिंगटन डीसी से उच्च स्तरीय वार्तामंडलों ने कई बार नई दिल्ली की यात्रा की है, जिसमें राजनीतिक मामलों के लिए अमेरिकी अवर सचिव विक्टोरिया नुलैंड और अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र पर अमेरिकी उप एनएसए दलीप सिंह शामिल हैं।

किन मुद्दों पर मोदी-बाइडेन में होगी बात?
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के बीच के संबंधों को गहरा करने के उद्येश्य से 11 अप्रैल को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वर्चुअल मुलाकात करेंगे। व्हाइट हाउस ने कहा कि, 'दोनों नेताओं के बीच कोविड महामारी को खत्म करने, जलवायु संकट का मुकाबला करने, वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक स्वतंत्र वातावरण, फ्री एंड ओपन इंडोपैसिफिक और एक नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने समेत कई और मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा इंडो-पैसिफिक में समृद्धि पर बात होगी।' आपको बता दें कि, इंडो-पैसिफिक का सीधा मतलब है, कि अमेरिका अपने सबसे बड़े 'प्रतियोगी' चीन को लेकर सतर्क है और अमेरिका को हर हाल में भारत का साथ चाहिए।

काफी महत्वपूर्ण है 2+2 बैठक
आपको बता दें कि, भारत और अमेरिका के बीच होने वाली 2+2 बैठक काफी महत्वपूर्ण है और अमेरिका ने इस बात को स्वीकार भी किया है और कहा है कि, इस बैठक से अमेरिका और भारत के बीच बढ़ती प्रमुख रक्षा साझेदारी को उजागर करने का एक मौका मिलेगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच संबंध सामान्य मूल्यों और लचीला लोकतांत्रिक संस्थानों की नींव पर बने हैं, और एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का निर्माण करना हमारा उद्येश्य है। खासकर, हमारी साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हित के लिए है, जो इस क्षेत्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करते हैं, मानवाधिकारों को बनाए रखते हैं और क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि का विस्तार करते हैं।"












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