#WorldEconomicForum2018: दावोस में फिसली मोदी की जुबान, बताए 600 करोड़ वोटर, 17 साल की आजादी
दावोस में विश्व आर्थिक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वैश्विक नेता के तौर पर भाषण दिया। 52 मिनट के इस संबोधन में पीएम मोदी ने कई वैश्विक चुनौतियों का जिक्र किया और उनसे पार पाने के रास्ते भी सुझाए. हालांकि भाषण के दौरान कई मौके पर पीएम मोदी की जुबान भी फिसली
नई दिल्ली। वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम 2019 की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उदार हृदय वाले लोगों की तो पूरी धरती ही परिवार है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने भारत के विजन की कई खास बातें रखीं। लेकिन अपने संबोधन में कई जगह उनकी जुबान फिसली जिससे अर्थ का अनर्थ हो गया। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सामने आंकड़े गिनाते हुए कई बार चूक कर गए। इसमें भारत की आजादी का जिक्र करते हुए उन्होंन कहा कि 'भारत की आजादी के 17 साल'। यहां वो भारत की आजादी के 70 साल का जिक्र करना चाहते थे। एक और जगह वो रोज मर्रा को 'रोज मरा' बोल गए।

सवा सौ करोड़ की आबादी में 600 करोड़ वोटर बता बैठे पीएम मोदी
दावोस में विश्व आर्थिक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वैश्विक नेता के तौर पर भाषण दिया। 52 मिनट के इस संबोधन में पीएम मोदी ने कई वैश्विक चुनौतियों का जिक्र किया और उनसे पार पाने के रास्ते भी सुझाए. हालांकि भाषण के दौरान कई मौके पर पीएम मोदी की जुबान भी फिसली। पीएम मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत का जिक्र करते हुए भारत में मतदाताओं की संख्या को गलती से 600 करोड़ बता दिया। आपको बता दें कि भारत की कुल आबादी करीब 130 करोड़ है जबकि वोटरों की संख्या 80 करोड़ के आस-पास है।

एक जगह तो दुनिया खत्म करने की बात कह डाली
अपने भाषण के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने एक जगह तो दुनिया खत्म करने की बात कह डाली। दरअसल यहां वह दूरियां खत्म करने की बात कर रहे थे, लेकिन उनकी जुबान से दूरियां की जगह दुनिया निकल गया।

संस्कृत के श्लोक के सहारे दुनिया को संदेश दिया
वहीं पीएम मोदी ने संस्कृत के श्लोकों का सहारा लेते हुए भारतीय परंपरा और विचारधारा को लोगों के सामने रखा। दावोस में विश्व में आर्थिक क्षेत्र की महान हस्तियों के सम्मेलन के संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने संस्कृत के श्लोकों का सहारा लेते हुए भारतीय परंपरा और विचारधारा को लोगों के सामने रखा। पीएम ने दावोस संस्कृत के श्लोकों को पढ़ा और उसका मतलब भी बताया। पीएम मोदी ने भारतीय परम्परा में प्रकृति के साथ गहरे तालमेल के बारे में बताया। पीएम ने कहा कि हजारो साल पहले हमारे शास्त्रों में मनुष्यमात्र को बताया गया- 'भूमि माता, पुत्रो अहम् पृथ्व्या' इसके अलावा पीएम मोदी ने दुनिया के कष्टों को दूर करने की बात कही।

पीएम ने कहा 'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया'
इसके अलावा दावोस में पीएम ने कहा 'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत' यानि 'सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मङ्गलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हजारों साल पहले हमारे मनीषियों ने इसी विचार को आत्मसात कर विश्व को राह दिखाने का काम किया और आज हम भी उसी विचार मानने वाले हैं। प्रकृति से प्यार करने की सीख हमारे ग्रंथों में, हमारी जीवन शैली में शामिल है। पूरे विश्व को परिवार मानने की सीख हमारे मनीषियों ने दी।

नरेंद्र मोदी ने मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था का खाका पेश किया
स्विट्जरलैंड के दावोस में 48वें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजबूत भारतीय अर्थव्यवस्था का खाका पेश करते हुए वैश्वीकरण की सीमाओं का जिक्र किया।मोदी ने कहा भारत में आर्थिक और सामाजिक नीतियों में केवल छोटे-मोटे सुधार ही नहीं कर रहा बल्कि आमूल चूल रुपांतरण कर रहे हैं वहीं तेजी से वैश्वीकरण की चमक फीकी पड़ती जा रही है। उन्होंने कहा, 'हमने जो रास्ता चुना है वह रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का है।' मोदी ने कहा भारत की अर्थव्यवस्था को निवेश के लिए सुगम बनाया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में अनादी काल से हम मानव मात्र को जोड़ने में विश्वास करते आएं हैं, उसे तोड़ने में नहीं, बांटने में नहीं। हजारों साल पहले संस्कृत में लिखा है कि भारतीय चिंतकों ने कहा है कि वसुधैव कटुंबकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। इसलिए हम सब एक परिवार की तरह हैं।












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