पीएम मोदी ने व्लादिमीर पुतिन को नहीं लगाया गले, क्या भारत बदल रहा है रूस को लेकर विदेश नीति?

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने इससे पहले जब भी व्लादिमीर पुतिन से मिले हैं, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को गले से लगाकर स्वागत किया है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

समरकंद, सितंबर 17: प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी वैश्विक नेताओं से गर्मजोशी से मिलने के लिए जाने जाते हैं और जियो पॉलिटिक्स में एक नेता दूसरे नेता से कैसे मिलता है, इसपर काफी ज्यादा ध्यान दिया जाता है। पिछले दिनों जब जो बाइडेन सऊदी अरब की यात्रा पर गये थे, तो उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ मुट्ठियां टकराईं थीं, जिसने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं, कि अमेरिका सऊदी अरब से अपने रिश्ते सुधारना चाहता है, लेकिन इस बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले, तो मोदी ने पुतिन को गले से नहीं लगाया, जिसको लेकर विश्लेषकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।

मोदी ने नहीं लगाया पुतिन को गले

मोदी ने नहीं लगाया पुतिन को गले

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने इससे पहले जब भी व्लादिमीर पुतिन से मिले हैं, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति को गले से लगाकर स्वागत किया है। चाहे मोदी ने रूस का दौरा किया हो, या फिर पुतिन भारत आए हों, पीएम मोदी ने हर बार उन्हें गले लगाया है, लेकिन इस बार शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन की बैठक के दौरान पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन मिले, तो दोनों नेताओं के बीच की वो स्पार्किंग गर्मजोशी गायब नजर आई। पीएम मोदी जब रूसी राष्ट्रपति से मिले, तो दोनों नेताओं ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और फिर बातचीत शुरू की। वहीं, जब दोनों नेताओं की बातचीत सामने आई, तो पता चला, कि पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी राष्ट्रपति को नसीहत दी है और उनसे साफ तौर पर कहा, कि आज का युग युद्ध का नहीं है। पीएम मोदी विश्व के पहले नेता हैं, जिन्होंने रूसी राष्ट्रपति के मुंह पर युद्ध को गलत बताया हो, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं, कि क्या भारत की विदेश नीति में बदलाव के ये संकेत हैं?

क्या बदल रही है विदेश नीति?

क्या बदल रही है विदेश नीति?

नेशनल सिक्योरिटी के जानकार RAND Corporation के इंडो-पैसिफिक के एनालिस्ट डेरेक जे. ग्रॉसमैन ने इस तरफ इशारा किया है और उन्होंने कहा कि, भारत इस बार रूस के साथ कुछ अलग तरीके से पेश आया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि, 'आज भारत ने रूस के साथ एक अलग रास्ता अपनाया। युद्ध को समाप्त करने के लिए पुतिन को निजी तौर पर मनाने के बजाय, पीएम मोदी ने उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया। हम देखेंगे कि, अब वह (पुतिन) कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन मुझे यह कहना होगा कि यह संदेश अमेरिका की तुलना में भारत से ही ज्यादा देने की कोशिश की गई है।'' डेरेक का इशारा इस तरफ था, जिसमें कुछ लोगों का कहना है, कि अमेरिका को खुश करने के लिए पीएम मोदी ने सार्वजनिक मंच से पुतिन के सामने यूक्रेन का मुद्दा उठाया। हालांकि, जानकारों का कहना है, कि भारत ने पश्चिम को खुश करने की कोशिश नहीं की है, बल्कि भारत ने साफ संदेश दिया है, कि वो तटस्थता की नीति पर मजबूती से खड़ा है और अपने उस सिद्धांत के साथ खड़ा है, जिसमें भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी कहा था, कि भारत युद्ध को विकल्प नहीं मानता है, बल्कि भारत शांति के रास्ते पर हर देश को चलने के लिए प्रोत्साहित करता है।

क्या चीन के लिए दिया गया संकेत?

रूस ने पिछले कुछ महीनों से चीन के साथ अपने संबंध काफी ज्यादा मजबूत कर लिए हैं और एक तरह से रूस चीन का छोटा भाई बनने तक के लिए सहमत हो गया है। लिहाजा,कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत ने राष्ट्रपति पुतिन को यह संदेश देने की कोशिश की होगी, कि चीन के साथ उसके नजदीकी संबंध के बीच भारत को क्रॉस करने की कोशिश नहीं की जाए। यूक्रेन युद्ध के बाद से चीन और भारत ने सबसे ज्यादा तेल रूस से खरीदे हैं और पहले नंबर पर चीन है, तो दूसरे नंबर पर भारत। लेकिन, रूस की कोशिश चीनी निवेश हासिल करने और भविष्य में कारोबार को और भी ज्यादा बढ़ाने पर है। लेकिन, भारत ये भी नहीं चाहेगा, कि उसका सबसे अच्छा दोस्त दुश्मन का छोटा पार्टनर बन जाए। ऐसे में कुछ एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है, कि रूस को कमजोर होता हुआ देखकर अब भारत पश्चिम से रिश्ते मजबूत रखना चाहता है, ताकि चीन के खिलाफ उसे थोड़ी बढ़त मिल सके। हालांकि, आम भारतीयों का रूख अभी भी रूस को लेकर इमोशनल है, लेकिन देश का हित क्या हो सकता है, सरकार इसपर ज्यादा ध्यान दे रही है।

पाकिस्तान से नजदीकी पर नाराजगी

पाकिस्तान से नजदीकी पर नाराजगी

24 फरवरी को जिस दिन यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, उसी दिन पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने मॉस्को का दौरा किया था और उससे पहले रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी पाकिस्तान का दौरा कर चुके थे और इस बार जब एससीओ शिखर सम्मेलन में पुतिन और पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मिले, तो दोनों के बीच गर्मजोशी देखी गई और इस मौके पर पुतिन ने पाकिस्तान के साथ गैस-पाइपलाइन पर काम आगे बढ़ाने के साथ साथ दोनों देशों के बीच रिश्ते को मजबूत बनाने पर चर्चा की। शहबाज शरीफ से बातचीत के क्रम में पुतिन ने कहा कि, साउथ ईस्ट एशिया में पाकिस्तान हमारा विश्वसनीय पार्टनर बन सकता है। इस पर पाकिस्तान के पीएम शरीफ ने पुतिन से कह दिया कि, रूस सुपर पावर है और इस्लामाबाद मास्को के साथ रिश्तों को प्रगाढ़ करने के इच्छुक है। जाहिर है, भारत के लिए रूस का पाकिस्तान के नजदीक जाना भी असहज करने वाला है, लिहाजा पीएम मोदी ने पुतिन को गले नहीं लगाकर इस बात को लेकर नाराजगी का भी संकेत दिया हो।

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    अमेरिकी मीडिया में तारीफ

    अमेरिकी मीडिया में तारीफ

    वहीं, मोदी और पुतिन की मुलाकात अमेरिकी मीडिया में छाई हुई है और अमेरिकी मेनस्ट्रीम मीडिया ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए लिखा है, कि यूक्रेन युद्ध को लेकर पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फटकार लगाई है। वॉशिंगटन पोस्ट ने एससीओ सम्मेलन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत को लेकर 'मोदी ने यूक्रेन पर पुतिन को फटकार लगाई' शीर्षक के साथ एक स्टोरी प्रकाशित की है, जिसमें पीएम मोदी की तारीफ करते हुए लिखा गया है, कि भारतीय प्रधानमंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से कहा कि, 'यह युद्ध का समय नहीं है।' वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि, यह एक चौंकाने वाली बात थी और पीएम मोदी ने पुतिन को फटकार लगाते हुए कहा कि, 'आज का युग युद्ध का नहीं है और मैंने आपसे इस बारे में फोन पर बात की है।' वॉशिंगटन पोस्ट ने इसे 'दुर्लभ तिरस्कार' बताया है और लिखा है, कि पीएम मोदी की इन बातों के सामने रूसी राष्ट्रपति काफी ज्यादा प्रेशर में दिख रहे थे।

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