SCO समिट से पहले मोदी-जिनपिंग आमने-सामने, बॉर्डर से व्यापार तक बड़े मुद्दों पर हुई बात; PAK को लगेगा झटका!
SCO Summit 2025: चीन के तियानजिन (Tianjin) में आज से शुरू हो रहे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत हुई। 2018 के बाद पीएम मोदी की यह पहली चीन यात्रा है। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है- खासकर अमेरिका और पाकिस्तान की।
तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अपनी बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन संबंधों में हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमा प्रबंधन के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों ने समझौता किया है, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है और दोनों देशों के बीच सीधे उड़ानें भी शुरू होंगी।
मोदी ने कहा कि दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हैं और ये कदम मानवता के भले के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपने रिश्तों को विश्वास, सम्मान और समझदारी के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

दरअसल, यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने भारत और चीन सहित कई देशों पर टैरिफ (शुल्क) युद्ध छेड़ रखा है। भारत पर 50% और रूस पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि चीन पर 200% टैरिफ की धमकी दी गई है। ऐसे में SCO मंच को अमेरिका के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।
गलवान के बाद पहली अहम यात्रा
पीएम मोदी की यह यात्रा 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। उनके लिए यह मौका है कि वे अपने दो बड़े तेल खरीदार देशों-भारत और चीन-के साथ मंच साझा करें। ट्रंप प्रशासन के दबाव के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा है।
SCO की अहमियत
SCO में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं। यह संगठन दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है और वैश्विक आबादी के 40% से ज्यादा का प्रतिनिधित्व करता है। इस बार शिखर सम्मेलन को अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बताया जा रहा है।
US और पाकिस्तान पर नजर
अमेरिका इस शिखर सम्मेलन में मौजूद नहीं होगा, लेकिन उसकी नीतियां और टैरिफ चर्चा का बड़ा हिस्सा बनेंगी। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक 'स्टिमसन सेंटर' के अनुसार, 'अमेरिका भले ही मेज पर न हो, लेकिन हमेशा मौजूद रहता है।' वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी इसमें शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। पहलगाम आतंकी हमले और भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद यह उनकी पहली सीधी मुलाकात होगी।
किन मुद्दों पर हो सकती है बातचीत?
बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी निष्पक्ष व्यापार साझेदारी (Fair Trade Partnership) पर जोर देंगे और चीन से भारत की अहम जरूरतें-जैसे दुर्लभ खनिज (Rare Minerals), उर्वरक (Fertilizers) और उपकरण (Equipment)-पूरी करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि चाहेंगे।
सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा
इसके साथ ही, सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी उठ सकता है, खासकर पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में। अगर चीन इस हमले पर कोई बयान देता है, तो यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। इसके अलावा, दोनों नेता पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद पैदा हुई तल्खियों को कम करने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने पर चर्चा कर सकते हैं।












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