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सीमा पर तैनात चीन की सेना भी अब सीखेगी हिंदी

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    बीजिंग। चीन की नेशनल कांग्रेस ने मिलिट्री डिप्टी की वार्षिक बैठक में आग्रह किया है कि तटीय क्षेत्रों और सरहद पर सुरक्षा के लिए पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) को विदेशी भाषाओं और उनके कल्चर का भी पता होना चाहिए। चीन 20 देशों के साथ 22,117 किमी की बॉर्डर शेयर करता है। इस कोर्स में पड़ोसी देशों और जनजातीय अल्पसंख्यकों की भाषाओं और उनके कल्चर को रखा गया है। चीनी सेना भारत और रूस जैसी बड़े और ताकतवर देशों की भाषाओं को सीखेगी, जिससे आपसी बातचीत या विवाद के दौरान ज्यादा दिक्कतों का सामना करना नहीं पड़ेगा।

    सीमा पर तैनात चीन की सेना भी अब सीखेगी हिंदी

    चीन की सेना के लिए हिंदी, रूसी, मंगोलियाई और कोरियाई समते उईघर और तिब्बती जनजाति की भाषाओं के ज्ञान को प्राथमिकता दी गई है। चीन मिलिट्री ऑनलाइन रिपोर्ट के मुताबिक, झिंजियांग से तुर्की और उईघर भाषाओं से ग्रेजुएट करीब 400 स्टूडेंट्स को सीमा पर पीएलए को 5 माह ट्रेनिंग देने के लिए भेजा जाएगा।

    नेशनल कांग्रेस में सैनिकों को भी भू-राजनीति, इतिहास और वर्तमान मामलों में उनकी समझ को बढ़ाने की उम्मीद जताई है, ताकि सीमा सुरक्षा कर्मियों को केवल युद्ध जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि सीमा के मुद्दों को जानने और आपस में बातचीत करना भी आसान होगा।

    बता दें कि ऐसा ही आइडिया इससे पहले भारत ने भी अपने आईटीबीपी जवानों को चीनी भाषा मेंडरिन सीखाई जा रही है। मध्‍य प्रदेश के सांची में स्थित बौद्ध यूनिवर्सिटी में चीन की सीमा पर तैनात इंडो-तिब्‍बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की चीनी भाषा सिखाई जा रही है। इस भाषा को सीखाने का मकसद चीन की सीमा के समय तैनाती में सुरक्षा कार्यों को और मजबूती प्रदान करना है।

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    English summary
    china, PLA, china army, multilingual china, india china border

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