कोरोना वैक्सीन के सवाल पर भागे फाइजर के सीईओ, सारे दावे हुए फुस्स, भारत को दिखाई थी अकड़
फाइजर कंपनी ने भारत में वैक्सीन बेचने से पहले कई ऐसी शर्तें रख दी थी, जिसे मानने से इनकार करने के अलावा भारत के पास कोई और विकल्प नहीं था।

Pfizer CEO: कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों पर अरबों डॉलर कमाने के आरोप लगे हैं और कई बार ऐसे भी आरोप लगाए गये हैं, कि जैसे ही वैक्सीन की बिक्री घटने लगती है, ठीक वैसे ही कोरोना वायरस के ग्राफ में इजाफा होने लगता है। वहीं, अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी फाइजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अल्बर्ट बोर्ला का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो पत्रकारों के सवाल पर भागते दिख रहे हैं।

क्यों भागे फाइजर से सीईओ?
दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का ये मामला है, जब बुधवार को पत्रकारों ने फाइजर कंपनी के सीईओ अल्बर्ट बोर्ला से कोविड वैक्सीन की प्रभावकारिता को लेकर सवाल पूछा था। रिपोर्ट के मुताबिक, फाइजर के सीईओ से काफी कड़े सवाल पूछे गये थे, लेकिन उन सवालों का जवाब देने के बजाए फाइजर के सीईओ ने भागना ठीक समझा। अल्बर्ट बोर्ला ने पत्रकारों के पूछे गये एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया और वो बिना उत्तर दिए वहां से निकलना सही समझा। रेबेल न्यूज ने ट्विटर पर अपने पत्रकारों का अल्बर्ट बोरला से भिड़ने का छह मिनट लंबा वीडियो साझा किया किया, जिसमें उन्होंने पत्रकार के सवाल से भागते हुए देखा जा सकता है।

पत्रकार ने क्या क्या पूछा था?
जर्नलिस्ट एज्रा लेवंत ने फाइजर के सीईओ से पूछा था, कि "मिस्टर बोर्ला, क्या मैं आपसे पूछ सकता हूं, कि आपको कब पता चला कि टीकों ने कोविड ट्रांसमिशन फैलाना बंद नहीं किया है? आप इसे सार्वजनिक रूप से कहने से पहले, आखिर कब जानते थे? इस सवाल का जवाब देने के बदले अल्बर्ट बोर्ला 'थैंक्यू वेरी मच' बोलकर आगे बढ़ने लगते हैं। हालांकि, जर्नलिस्ट एज्रा लेवंत यहीं नहीं रूके और उन्होंने इसके बाद एक फॉलो-अप सवाल उठाया, कि फाइजर ने टीकों के प्रसारण (कोविड के) को नहीं रोकने के बारे में एक रहस्य क्यों रखा हुआ है। उन्होंने पूछा, कि "आपने कहा था, कि यह वैक्सीन 100% प्रभावी है, फिर आपने उसे 90% कहा , फिर 80%, और फिर 70%, लेकिन अब हम जानते हैं, कि आपका वैक्सीन वायरस के प्रसार को नहीं रोक रहे हैं। आप उस राज को क्यों रखते हैं?" इस सवाल का भी फाइजर के सीईओ ने कोई उत्तर नहीं दिया।
करोड़ों की कमाई पर भी छाई चुप्पी
वहीं, एक और अमेरिकी पत्रकार ने फाइजर के सीईओ से लोगों की जान के बदले करोड़ों कमाने का आरोप लगा और पूछा, कि "क्या यह दुनिया से माफी माँगने का समय है?" इसके साथ ही पत्रकार ने ये भी पूछा, कि क्या वो लोगों से कमाए गये पैसों को वापस करना चाहेंगे, जिन्होंने एक ऐसी वैक्सीन के लिए अपना पैसा खर्च किया, जो प्रभावी नहीं है। जो एक अप्रभावी टीका है? पत्रकार ने आगे पूछा, कि पिछले कुछ सालों में आपने जो कुछ किया है, क्या आपको उस पर शर्म नहीं आती?" इन सवालों पर भी फाइजर के सीईओ ने चुप्पी साधे रखा और कुछ भी नहीं बोला। दोनों पत्रकारों ने फाइजर के सीईओ से इस बात पर भी सवाल किया, कि उन्होंने वैक्सीन से कितना पैसा कमाया और दावोस में उनकी गुप्त मुलाकात किन-किनसे हो रहा है।
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भारत-फाइजर में नहीं बनी थी बात
भारतीय सूचना और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी ट्विटर पर वीडियो साझा करते हुए कहा, कि फाइजर ने क्षतिपूर्ति की शर्तों को स्वीकार करने के लिए भारत सरकार को धमकाने की कोशिश की थी। आपको बता दें, कि फाइजर ने कोविड वैक्सीन बनाने के बाद बड़े बड़े दावे किए थे और भारत में भी फाइजर के टीके को लाने की कोशिश हुई थी, लेकिन भारत सरकार की फाइजर से बात नहीं बनी थी। राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा, कि "बस सभी भारतीयों को याद दिलाने के लिए, कि फाइजर ने क्षतिपूर्ति की शर्तों को स्वीकार करने के लिए भारत सरकार को धमकाने की कोशिश की। जबकि, राहुल, चिदंबरम और जयराम रमेश की कांग्रेस तिकड़ी ने कोविड के दौरान विदेशी टीकों के मामले को आगे बढ़ाया था।" आपको बता दें कि, फाइजर के सीईओ उस वक्त मीडिया के सवालों से भागे हैं, जब फाइजर ने घोषणा की है, कि वो गरीब देशों के लिए बिना लाभ लिए दवाओं को कोविड टीकों का निर्माण करेगा।












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