कर्ज का पहाड़, महंगाई हर हद पार, बिजली-पेट्रोल से मचा है हाहाकार.. कैसे जिंदा रह पाएगा पाकिस्तान?
Pakistan Debt Trap: पिछले हफ्ते पाकिस्तानी रुपये ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए डॉलर के मुकाबले 300 रुपये के बैरियर को तोड़ दिया। यानि, डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया 300 प्वाइंट को पार कर गया है।
इसके अलावा, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत भी 300 रुपये प्रति लीटर के बॉर्डर को पार कर गई। जबकि, बिजली की एक यूनिट की कीमत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई है, जिसमें आने वाले हफ्तों में और ज्यादा बढ़ोतरी का अनुमान है।

पाकिस्तान का अब निकल जाएगा दम
पाकिस्तान में महंगाई अब चरम सीमा को पार कर चुका है और पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है, कि देश में अब गरीबों के लिए अपने बुनियादी जीवन-यापन का खर्च उठाना लगभग असंभव हो गया है।
इसका असर ये हुआ है, कि देश के कई हिस्सों में अब उग्र प्रदर्शन किए जा रहे हैं और प्रदर्शनकारी सार्वजनिक रूप से बिजली का बिल जलाने सड़कों पर उतर रहे हैं। खुदरा विक्रेता अर्थव्यवस्था की बदहाली की मार झेलते झेलते अब "शटर डाउन" दिवस मना रहे हैं।
और पाकिस्तान में ये सब अचानक नहीं हुआ है। इसका तानाबुना लंबे समय से बुना जा रहा था और पाकिस्तान में ऐसे हालात बनने की आशंका, लंबे वक्त से जताई जा रही थी।
भ्रष्ट, नकारे और कई मामलों में अनपढ़ राजनेताओं को बार-बार वोट देकर पाकिस्तान के लोगों ने सत्ता में लाया है और जाहिर तौर पर, जनता अपने कर्मों का सजा भुगत रही है। यह उस दिखावटी लोकतंत्र का परिणाम है, जिसने सामंती जमींदारों, भूमि हड़पने वालों और गैंगस्टरों को, एक असहाय राष्ट्र को डराने और उन्हें वोट देने के लिए मजबूर करने में सक्षम बनाया है।
ऐसे राजनेताओं का सत्ता में आने के बाद सर्फ एक लक्ष्य रहता है, खुद की समृद्धि। पाकिस्तान के नेताओं ने भी जनता को धिक्कर दिया है।
क्या पाकिस्तान को ठीक किया जा सकता है और देश को वापस पटरी पर लाया जा सकता है? उत्तर है, हां। लेकिन, ऐसा करने के लिए उस साहस और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी, जिसकी लेस मात्र भी अतीत में नहीं देखी गई है। आज की स्थिति में, 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने और एक "निर्वाचित" सरकार को सत्ता सौंपने के संवैधानिक आदेश के साथ एक पाकिस्तान में फिलहाल संक्रमणकालीन सरकार है।
और यह आपदा के लिए एक नुस्खा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत, चुनाव उन्हीं पुराने बदमाशों को सत्ता में वापस लाएंगे, जो निस्संदेह ताबूत में आखिरी कील ठोंक देंगे।
अगर गंभीरता से सोचा जाए, तो पाकिस्तान को बचाने के लिए उपायों के दो सेट शामिल करने होंगे, एक अल्पकालिक और दूसरा दीर्घकालिक।

क्या हो सकते हैं अल्पावधि उपाय?
पाकिस्तान कर्ज में डूब चुका है। लिहाजा, ट्रेकियोस्टोमी (फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए किया जाने वाला ऑपरेशन) को तुरंत लागू करने की आवश्यकता है।
पाकिस्तान के हालात को ऐसे समझिए, कि पाकिस्तान की सरकारी बजट में टैक्स कलेक्शन के जरिए 7 ट्रिलियन रुपये जुटाने का अनुमान है, लेकिन उसी बजट में पाकिस्तान सरकार का खर्च 14.5 ट्रिलियन रुपये है। तो फिर सरकार कर्ज कहां से चुका पाएगी? कर्ज छोड़िए, सरकार अपना खर्च कैसे निकालेगी?
ट्रिब्यून ने लिखा है, कि "हम कर्ज के जाल में हैं, सचमुच हम मौत के जाल में हैं। इससे बचने का एकमात्र तरीका सभी ऋण पुनर्भुगतान, ब्याज और मूलधन पर तत्काल रोक लगाना है। यह सभी ऋणदाताओं - संस्थागत और निजी संस्थानों पर भी लागू होना चाहिए। साथ ही समझदारीपूर्ण ऋण पुनर्गठन पर बातचीत इस उम्मीद के साथ शुरू होनी चाहिए, कि सभी ऋणदाता पर्याप्त छूट लेने के लिए तैयार हों।"
लेकिन, ये कदम कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है, और निश्चित रूप से पाकिस्तान की मौजूदा केयरटेकर सरकार ये कदम उठा भी नहीं सकती है, क्योंकि इसके वित्त मंत्री वर्ल्ड बैंक के पूर्व अधिकारी हैं
ऐसा कोई कदम नहीं है जो वर्तमान परिवर्तन सरकार उठाएगी, खासकर जब से इसके वित्त मंत्री विश्व बैंक के पूर्व कार्यकारी हैं, तो वो और उनके जैसे लोग, डिफॉल्ट होने को अभिशाप मानते हैं।
लेकिन, पाकिस्तान के पास इसके अलावा अब कोई ऑप्शन नहीं बचा है। उसे डिफॉल्ट होना ही होगा, जितनी लेट से वो खुद को डिफॉल्ट घोषित करेगा, उसके लोग उतने दर्द में जीते रहेंगे।
डिफ़ॉल्ट होने के खराब परिणाम होंगे, लेकिन वे कहीं भी मृत्यु के समान गंभीर नहीं होंगे।
लेकिन, डिफॉल्ट होने के बाद पाकिस्तान को अपना घर व्यवस्थित करने का मौका मिलेगा। पाकिस्तान को अपने निर्यात में भारी कटौती करनी होगी, जो फिलहाल नियंत्रण से बाहर है, और सरकारी व्यय के लिए शून्य बजट बनाना होगा।
ये तात्कालिक कदम हैं, जो पाकिस्तान को उठाने की होंगे, नहीं तो देश की स्थिति किस तरह से बदतर होगी, उसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।
क्या हो सकते हैं लंबे वक्त के लिए उपाय?
पाकिस्तान को अपनी राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन लाना ही होगा, उसकी फिर से डिजाइनिंग करनी होगी, ताकि बदमाशों, सामंतों, भूमि हड़पने वालों और गैंगस्टरों को संसद तक जाने से रोका जा सके। और इसके बजाय, देश को चलाने में अपनी भूमिका निभाने के लिए सक्षम, निष्ठावान और शालीन लोगों के लिए दरवाजे खोलें।
पाकिस्तान की सेना को यह बताना बंद करना होगा, कि देश में टैक्स सिस्टम क्या होना चाहिए, देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए या फिर जैसा ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने आज ही कहा है, कि 'व्यापारियों के लिए डॉलर एक्सचेंज में पारदर्शिता लाई जाएगी', ये बताना बंद करना होगा, क्योंकि वो सेना प्रमुख हैं, अर्थशास्त्री या पाकिस्तान स्टेट बैंक के गवर्नर नहीं।
ऐसा करना असंभव है, नहीं... लेकिन, पाकिस्तान में ये असंभव से बस एक पायदान ही नीचे है। क्योकि, हमने भारत में आज तक नहीं देखा है, कि जल, थल या वायु सेना के प्रमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए, रुपये के गिरने पर बात कर रहे हों। पाकिस्तान को जिंदा रहना है, तो ये करना ही होगा। सेना को सीमा पर भेजना ही होगा और ऐसा नहीं करने पर.. पाकिस्तान का अंत अब तुरंत होना निश्चित है।












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