जाधव मामले में पाक सरकार के खिलाफ उठने लगी आवाज
जाधव मामले में पाकिस्तान में उठने लगी सरकार के खिलाफ आवाज, लोग पूछ रहे हैं कि क्यों जाधव को काउंसल एक्सेस नहीं दिया गया।
कराची। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जिस तरह से कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी है उसके बाद पाकिस्तान के भीतर भी सरकार के खिलाफ आवाज उठने लगी है। पाकिस्तान में भी अब लोग यह सवाल पूछने लगे हैं कि कुलभूषण जाधव को काउंसल क्यों नहीं दिया गया। लेकिन बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान में यह आवाज तब उठी है जब उसे विश्व समुदाय में शर्मसार होना पड़ा है।

आईसीजे ने जाधव मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि भारत के कुलभूषण जाधव को काउंसल एक्सेस मुहैया कराया जाए और जबतक मामले की सुनवाई नहीं पूरी हो जाती है उन्हें फांसी नहीं दी जाए। जाधव को पिछले वर्ष मार्च माह में गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद भारत ने 16 बार जाधव को काउंसल एक्सेस मुहैया कराने की मांग की थी, लेकिन इसे पाकिस्तान ने हर बार खारिज कर दिया था। पाकिस्तान मानवाधिकार कार्यकर्ता आसमा जहांगीर ने कहा कि यह बात सामने आनी चाहिए कि जाधव को वकील मुहैया नहीं कराने की बात सबसे पहले किसने कही थी।
जहांगीर ने कहा कि क्या पाकिस्तान के इस फैसले से भारत की जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों की मुश्किलें बढ़ेंगी। क्या कोई एक व्यक्ति अंतर्राष्ट्रीय नियमों को बदल सकता है। जहांगीर के सवालों को पाकिस्तान के एक बड़े वकील ने आगे बढ़ाते हुए कहा कि पाकिस्तान को जाधव को वकील काउंसलर एक्सेस मुहैया कराना चाहिए था। पाकिस्तान के वकील यासिर लतीफ हमदानी ने कहा कि आईसीजे यह कभी नहीं कहता कि जाधव को काउंसल एक्सेस मुहैया ना कराइए।
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यासिर ने आईसीजे के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि आईसीजे में भारत की अपील के बाद कोर्ट नेमहज 10 दिन के भीतर अपना निर्णय दे दिया। उन्होंने कहा कि आईसीजे भारत की अपील को आपात समय में इसलिए सुनने को तैयार हुआ क्योंकि पाकिस्तान ने इस बात का भरोसा नहीं दिया था कि वह जाधव को फांसी पर नहीं लटकाएगा। इसी वजह से यह फैसला आया है।












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