बांग्लादेश में सभी धर्म के लोग बराबर हैं: शेख हसीना

शेख हसीना
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि यहाँ सभी धर्मों के लोगों का मुक्ति युद्ध (लिबरेशन वॉर) में बलिदान का साझा इतिहास है.

हसीना ने कहा एक बार फिर से आश्वस्त किया कि बांग्लादेश में धर्म के नाम पर किसी से भेदभाव नहीं होगा.

हसीना ने कहा, ''बांग्लादेश बनने में सभी धर्मों के लोगों ने अपने ख़ून का बलिदान दिया है और बराबरी के साथ इस मुल्क में रहेंगे.''

बांग्लादेश के विजय दिवस के मौक़े पर राजधानी ढाका स्थित अपने सरकारी आवास से प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए कहा ये बातें कही हैं.

अवामी लीग ने 23 बंगबंधु एवेन्यू स्थित अपने केंद्रीय कार्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था.

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बैठक को संबोधित करते हुए शेख हसीना ने कहा, ''बांग्लादेश में मूर्तियों और ख़ास करके बंगबंधु की मूर्ति को लेकर बहस चलाने की कोशिश की गई. लेकिन बांग्लादेश ग़ैर-सांप्रदायिक सोच वाला देश है. यहाँ सभी धर्मों के लोगों को अपने धार्मिक रिवाजों को पालन करने की आज़ादी है और हमारी सरकार इसी इच्छाशक्ति के साथ काम करती है.''

हसीना ने कहा, ''इस्लाम और पैग़ंबर मोहम्मद से भी हमें यही सीख मिलती है. हमें हर स्थिति का सामना धैर्य के साथ करना चाहिए और यही हमारा कर्तव्य है. हमारा मुख्य लक्ष्य यह है कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं न कि किसने क्या कहा, उस पर ध्यान देना.''

हाल ही में बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक समूह हज़रत-ए-इस्लाम के नए प्रमुख जुनैद बाबूनगरी ने कहा था कि देश की सभी मूर्तियों को गिरा देंगे और कोई मायने नहीं रखता है कि कौन सी मूर्ति किसकी है. हज़रत-ए-इस्लाम ने बंगबंधु शेख मुजीबउर रहमान की 100वीं जयंती पर उनकी मूर्ति लगाने का विरोध किया था.

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शेख हसीना ने अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं से पार्टी को मज़बूत करने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के राष्ट्रपिता के विचारों को जन-जन तक फैलाने की ज़रूरत है.

बंगबंधु के सम्मान में उनके नाम पर यूनेस्को की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्राइज़ देने के फ़ैसले पर शेख हसीना ने कहा कि बांग्ला राष्ट्र के लिए मुजीब की जन्म शताब्दी पर यह बेहतरीन उपहार है.

संयुक्त राष्ट्र ने फ़ैसला किया है कि 'यूनेस्को-बांग्लादेश बंगबंधु शेख मुजीबउर रहमान इंटरनेशनल प्राइज़' शुरू किया जाएगा और इसे रचनात्मक अर्थव्यवस्था और इंडस्ट्री के क्षेत्र में दिया जाएगा, जिससे युवाओं, महिलाओं और प्रवासियों को वैश्विक स्तर पर रोज़गार मिला हो. यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड ने इस संदर्भ में बांग्लादेश के प्रस्ताव को स्वीकार किया था.

यह पहली बार है जब संयुक्त राष्ट्र ने बंगबंधु के नाम पर अंतरराषट्रीय सम्मान देने का फ़ैसला किया है. प्राइज़ हर साल दिया जाएगा और इसकी राशि 50 हज़ार डॉलर होगी.

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शेख हसीना की धार्मिक सद्भावना

साल 2018 में दुर्गा पूजा के मौक़े पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने राजधानी ढाका स्थित ढाकेश्वरी हिंदू मंदिर को 1.5 बीघा ज़मीन दी थी.

उन्होंने ढाकेश्वरी मंदिर की छह दशक पहले से चली आ रही मांग को पूरा कर दिया था. मंदिर के पुराने स्वरूप को बनाए रखने के लिए ज़मीन की मांग की जा रही थी.

इससे पहले भी शेख हसीना मंदिरों के रखरखाव का आश्वासन दे चुकी हैं. अब इस तोहफ़े के बाद मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पैरोकार के तौर पर उनकी छवि और मज़बूत होने की बात कही जा रही थी.

शेख हसीना 2018 में 15 अक्टूबर को ढाकेश्वरी मंदिर गई थीं. यहीं उन्होंने 1.5 बीघा ज़मीन तोहफ़े में देने की घोषणा की थी. ये ज़मीन मंदिर के पास ही मौजूद है. इस ज़मीन की क़ीमत 43 करोड़ रुपए आंकी गई है.

ढाकेश्वरी बांग्लोदश का सबसे बड़ा मंदिर है और इसके नाम पर ही राजधानी ढाका का नाम पड़ा है. मंदिर पिछले कई सालों से ज़मीन ख़रीदने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दाम बहुत अधिक होने के कारण मुश्किलें आ रही थीं.

ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक शेख हसीना ने मंदिर में कहा था, ''इस समस्या को सुलझाने के लिए हमने पहले से ही क़दम उठाए हैं. अब आगे का काम आपके ऊपर है.''

लेकिन, अब हसीना सरकार ने मध्यस्थता के ज़रिए मंदिर को छूट के साथ 10 करोड़ टका की क़ीमत पर जमीन दिला दी. साथ ही उन्होंने हिंदू कल्याण ट्रस्ट के फंड को भी 21 करोड़ से 100 करोड़ टका तक बढ़ाने का फ़ैसला किया था.

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बांग्लादेश की ताक़त

एक वक़्त था जब बांग्लादेश (उस वक़्त उसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था) पाकिस्तान का सबसे ग़रीब इलाक़ा था. 1971 में आज़ादी के बाद भी बांग्लादेश भीषण ग़रीबी में रहा. 2006 के बाद से बांग्लादेश की तस्वीर से धूल छंटने लगी और तरक़्क़ी की रेस में पाकिस्तान से आगे निकल गया. बांग्लादेश की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर पाकिस्तान से 2.5 फ़ीसदी आगे निकल गई.

बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है. 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हसीना का लक्ष्य है कि इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए और 2021 में बांग्लादेश जब अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाए तो यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाए.

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले क़रीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी बड़ी भूमिका है. विदेशों से जो ये पैसे कमाकर भेजते हैं उनमें सालाना 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2018 में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया. बांग्लादेश की सफलता में रेडिमेड कपड़ा उद्योग की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है. कपड़ा उद्योग बांग्लादेश के लोगों को सबसे ज़्यादा रोज़गार मुहैया कराता है. कपड़ा उद्योग से बांग्लादेश में 40.5 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

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