जानिए कौन है वो लड़की, जिसे पीएम मोदी के साथ मिला 'चेंजमेकर अवॉर्ड'

नई दिल्लीः बुधवार को सुबह से ही ट्विटर पर #GlobalGoalKeeperAward काफी तेजी से ट्रेंड कर रहा है। भारत में स्वच्छता अभियान चलाने के लिए बिल एंड मिलेंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से पीएम मोदी को यह अवॉर्ड दिया गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि पीएम मोदी के साथ-साथ इस कार्यक्रम में एक भारतीय लड़की को भी इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। दरअसल, राजस्थान की निवासी पायल जांगिड़ को भी चेंजमेकर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

बाल विवाह को खत्म करने के लिए कर रही हैं संघर्ष

बाल विवाह को खत्म करने के लिए कर रही हैं संघर्ष

पायल जांगिड़ को बाल श्रम और बाल विवाह पर रोक लगाए जाने को लेकर चलाए जा रहे अभियान के लिए यह सम्मान दिया गया है। पायल अभी 17 साल की हैं। बिल एंड मिलेंडा गेट्स फाउंडेशन ने पायल को यह अवॉर्ड देने के बाद ट्वीट किया कि जांगिड़ को गोलकीपर्स ग्लोबल गोल्स अवॉर्ड्स में चेंजमेकर सम्मान मिला । यह पुरस्कार बाल श्रम और बाल विवाह को खत्म करने के लिए पायल के इस अभियान को मान्यता प्रदान करता है।

बाल पंचायत प्रमुख के तौर पर किया काम

बाल पंचायत प्रमुख के तौर पर किया काम

पायल मूल रूप से राजस्थान के ही हिंसला गांव की रहने वाली हैं। उनके परिजनों ने उन पर कम उम्र में ही विवाह करने का दबाव बना रहे थे। लेकिन पायल परिवार के दबाव में नहीं आईं और स्कूल जाने का फैसला किया। पायल ने अपने गांव में बाल मित्र ग्राम कार्यक्रम के तहत गठित बाल परिषद में बाल पंचायत प्रमुख के तौर पर काम किया। यह नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी के बचपन बचाओ आंदोलन के तहत आता है।

बाल विवाह के विरोध में आगे रहीं पायल

बाल विवाह के विरोध में आगे रहीं पायल

पायल की इस उपलब्धि पर कैलाश सत्यार्थी ने भी उन्हें बधाई दी। कैलाश सत्यार्थी ने पायल की प्रशंसा करते हुए लिखा कि पायल बाल श्रम, बाल विवाह और घूंघट प्रथा का विरोध करने में सबसे आग रही हैं। मंगलवार को अवॉर्ड मिलने के बाद कैलाश सत्यार्थी ने ट्विटर पर पायल के साथ कुछ तस्वीरें भी शेयर की।

कैलाश सत्यार्थी ने किया ट्वीट

कैलाश सत्यार्थी ने किया ट्वीट

कैलाश सत्यार्थी ने ट्विटर पर लिखा कि 'सुमेधा जी और हमारी बेटी पायल को न्यूयॉर्क में बिल एंड मिलेंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से अवॉर्ड पाता देख काफी गर्व हो रहा है। उसने शादी से इंकार कर दिया और उसने पूरे गांव को बाल मजदूरी से मुक्त किया।

पिता को सिखाती हैं न करें मारपीट

पिता को सिखाती हैं न करें मारपीट

अपने अभियान के बारे में बताते हुए पायल ने कहा कि हम बच्चों के घर जाते हैं और उनके माता-पिता को समझाते हैं कि शिक्षा का क्या महत्व है और स्कूल जाना क्यों महत्वपूर्ण है। मैं बच्चों के पिता से कहती हूं कि वे कभी भी अपने बच्चे या पत्नी के साथ मारपीट न करें। बल्कि उन्हें प्यार दें। अगर वह अपने परिवार से प्यार करेंगे तो सारी चीजें अच्छी हो जाएंगी।

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