सुबह में दोस्ती करा दो, शाम में मुंह फुला लो... भारत से बातचीत की बात पर पाकिस्तान फिर पलटा
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान का लीडरशिप भारत से दोस्ती करना चाहता है, लेकिन चुनावी राजनीति और देश में बढ़ा भारत विरोध उन्हें ऐसा करने नहीं देता है।

Pakistan News: पाकिस्तान के नेता अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी जिस तरह से अपनी बातें चंद घंटों के अंदर बदल देते हैं और किसी मुद्दे पर यूटर्न ले लेते हैं, उससे यही पता चलता है, कि या तो अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की उन्हें समझ नहीं है, या वो नशे में बात करते हैं, या फिर उनकी बातों का कोई मोल नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक दिन पहले ही कहा था, कि उनका देश भारत से तीन-तीन लड़ाई लड़ने के बाद सबक सीख चुका है, लेकिन कुछ ही घंटों के बाद शहबाज शरीफ ने अपने बयान से यूटर्न ले लिया।

पाकिस्तान का यूटर्न
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक दिन पहले ही अरब देशों के न्यूज चैनल अल अरबिया को दिए गये इंटरव्यू में कहा था, कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति से अपील की है, कि वो भारत के साथ बातचीत के टेबल पर साथ आने में मदद करे। लेकिन, शाम होते होते पाकिस्तान का प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने ही प्रधानमंत्री की बातों का खंडन कर दिया। पाकिस्तानी पीएमओ ने नया बयान जारी करते हुए कहा है, कि "प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया है, कि भारत के साथ बातचीत तभी हो सकती है, जब देश कश्मीर में "5 अगस्त 2019 की अपनी अवैध कार्रवाई" को उलट दे, जिसका उद्देश्य भारतीय कब्जे वाले मुस्लिम-बहुल राज्य कश्मीर की जनसांख्यिकी को अवैध रूप से बदलना था"। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया है, कि 'भारत द्वारा इस कदम को वापस लिए बिना बातचीत संभव नहीं है।'
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प्रधानमंत्री की बातों का मोल नहीं?
किसी भी देश के प्रधानमंत्री के मुंह से निकले एक एक शब्दों का मोल होता है, यहां तक की तालिबान के मुख्य नेता भी अगर कोई बात कहते हैं, भले ही वो मानवाधिकार के खिलाफ ही क्यों ना हो, फिर भी वो अपनी बातों पर कायम रहते हैं, चाहें पूरी दुनिया से उनपर प्रेशर क्यों ना बनें, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बातों की कोई अहमियत नहीं होती। वो सुबह में भारत से अच्छे संबंधों की बात करते हैं, बातचीत करने की बात करते हैं, और शाम को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री मंत्रालय उनकी बातों का खंडन कर देता है। इसीलिए अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।
भारत से बातचीत करने की कही थी बात
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने भी इस बात का जिक्र किया है, कि एक दिन पहले ही शहबाज शरीफ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कश्मीर सहित अन्य ज्वलंत मुद्दों को हल करने के लिए गंभीर बातचीत करने का आह्वान किया था और कहा था, कि संयुक्त अरब अमीरात का नेतृत्व भारत और पाकिस्तान को वार्ता की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यूएई के अल अरबिया समाचार चैनल के साथ एक इंटरव्यू में शहबाज शरीफ ने कहा था, कि "भारतीय नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेरा संदेश है कि आइए हम टेबल पर बैठें और कश्मीर जैसे ज्वलंत मुद्दों को हल करने के लिए गंभीर और ईमानदार बातचीत करें"।












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