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FC-31: पाकिस्तान जो 5th जेनरेशन फाइटर जेट खरीद रहा, क्या चीन ने उसकी टेक्नोलॉजी चुराई है? भारत से निकलेगा आगे?

FC-31 News: पाकिस्तान ने इस साल जनवरी में घोषणा की थी, कि वो चीन से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट FC-31 खरीदने की योजना बनाई है और पाकिस्तान की इस घोषणा ने दक्षिण एशिया में काफी हलचल पैदा कर दी है।

मिलिट्री ऑब्जर्वर्स का मानना है, कि पाकिस्तान का एफसी-31 खरीदने का ये फैसला भारतीय उपमहाद्वीप में शक्ति संतुलन को बदल देगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है, कि ज्यादा से ज्यादा यह चाय के प्याले में आए तूफान जैसा ही होगा।

china pakistan FC-31 deal

भारत ने भी पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर अपने महत्वाकांक्षी AMCA प्रोजेक्ट के डिजाइन को मंजूरी दे दी है और माना जा रहा है, कि अगले 10 सालों में भारत के पास अपना खुद का फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट होगा।

दूसरी तरफ, डिफेंस एक्सपर्ट्स का दावा है, कि चीन का FC-31 फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी अमेरिका के F-35 पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान और F-22 रैप्टर विमान से चुराई गई है। वहीं, कई डिफेंस एक्सपर्ट्स ये भी कह रहे हैं, कि असल में चीनी FC-31 एक पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान भी नहीं है और आर्म्स रेस में ये फ्रांसीसी एयरोस्पेस निर्माता डसॉल्ट एविएशन के 4.5 पीढ़ी के राफेल फाइटर जेट से मुकाबला हार जाएगा, जिसे भारत ने खरीदा है।

क्या चीन ने चुराई है FC-31 के लिए टेक्नोलॉजी?

एफसी-31 खरीदने में पाकिस्तान की दिलचस्पी को लेकर अटकलें काफी समय से चल रही थीं। हालांकि, इस्लामिक रिपब्लिक के पास आर्थिक संसाधनों की कमी और F-16 और मिराज के पुराने बेड़े को बदलने के विकल्प के कारण चीनी लड़ाकू जेट ही उसका एकमात्र विकल्प है। पाकिस्तान के चीनी JF-17 बेड़े को भी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी तरफ, FC-31 को अभी तक चीन ने अपनी वायुसेना में शामिल नहीं किया है और इस फाइटर जेट का कोई युद्ध ट्रायल नहीं हुआ है, फिर भी पाकिस्तान का इसे खरीदने का फैसला हैरान करने वाला है। और कुछ एक्सपर्ट्स ये भी कह रहे हैं, कि हो सकता है चीन की दबाव की वजह से पाकिस्तान ये फैसला लेने पर मजबूर हुआ हो।

यूरोपियन टाइम्स की एक पुरानी रिपोर्ट में भारतीय वायु सेना के पूर्व उप प्रमुख एयर मार्शल अनिल खोसला (सेवानिवृत्त) ने इस सौदे को "सुविधा का विवाह" कहा था।

उन्होंने कहा था, कि "पाकिस्तान को ये फाइटर जेटने के बाद चीन के लिए नया बाजार खुल सकता है। इसके अलावा, इससे बीजिंग को इस्लामाबाद पर और अधिक निर्भर बनाकर उस पर अधिक नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।"

चीनी फाइटर जेट FC-31/J-31, साल 2014 से उड़ान भर रहा है, लेकिन हैरानी की बात ये है, कि अभी तक इसे ना ही चीनी आर्मी ने और ना ही किसी और देश की सेना ने इसका अधिग्रहण किया है। लेकिन, इसके बाद भी पाकिस्तानी एयरफोर्स ने इसे खरीदने का फैसला किया है।

FC-31 फाइटर जेट की डिजाइन

पाकिस्तानी एयरफोर्स के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने इस साल जनवरी में चीन से FC-31 स्टील्थ फाइटर जेट के अधिग्रहण की पुष्टि की थी।

FC-31 को J-31 भी कहा जाता है और इस स्टील्थ लड़ाकू विमान को चीन की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (SAC) ने विकसित किया है और FC-31/J-31 सिंगल-सीट वाला, ट्विन-इंजन, मीडियम स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसके बारे में ग्लोबल टाइम्स के विश्लेषकों का कहना है, कि चीनी फाइटर जेट अमेरिका के F-35 से बेहतर नहीं है, तो भी तुलना करने के लायक तो है ही।

बीजिंग स्थित सैन्य विशेषज्ञ वेई डोंगक्सू के हवाले से लेख में कहा गया है, कि जेट की स्टील्थ इसे "पहले और आश्चर्यजनक हमले शुरू करने" की अनुमति देती है। विमान में J-20 के कुछ सेंसर फ़्यूज़न और डेटा प्रोसेसिंग क्षमताएं होने की उम्मीद है, जैसा कि रिपोर्ट से संकेत मिलता है, और यह हवा से हवा और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों और बमों को अपने साथ ले जा सकता है।

पाकिस्तान की वायुसेना के लिए चीनी फाइटर्स जेट कोई नया नहीं है और पाकिस्तान के पास पहले से ही J-10C लड़ाकू विमान है। इसके अलावा, पाकिस्तानी बेड़े में JF-17 जेट, HQ-9BE लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, HQ-16FE मध्यम दूरी की SAMs और YLC-8E एंटी-स्टील्थ 3D सर्विलांस रडार प्रणाली है।

भारतीय राफेल के आगे कब तक टिकेगा?

कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स का दावा है, कि चीनी एफसी-31 भारतीय राफेल के जैसा भी नहीं है। तुलना करने पर पता चलता है, कि राफेल लड़ाकू विमान इस वक्त दुनिया के सबसे एडवांस 4.5 फाइटर जेट की सीरिज में सबसे आगे है और इसे हर तरह के मिशनों को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है।

राफेल फाइटर जेट को सात अलग अलग तरह के मिशनों को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है। जैसे ये फाइटर जेट वायु-रक्षा/वायु श्रेष्ठता/वायु पुलिसिंग, टोही, परमाणु निरोध, हवा से जमीन पर सटीक हमला, नजदीकी हवाई समर्थन, जहाज-रोधी हमले और एक जेट से दूसरे जेट में इंधन भरने में सक्षम है।

दूसरी ओर, एफसी-31 के बारे में सीमित जानकारी से पता चलता है, कि इसे नजदीकी हवा में सहायता और हवा से जमीन पर बमबारी करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके डिज़ाइन से यह भी पता चलता है, कि इसे वाहक उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया होगा।

कई पर्यवेक्षकों ने एफसी-31 और अमेरिकी एफ-35 के बीच काफी समानता देखी है। एफसी-31 की सपाट पूंछ और जुड़वां इंजन एफ-22 से लिए गए प्रतीत होते हैं, और सामने का हिस्सा एफ-35 जैसा दिखता है। जिसकी वजह से कहा जा रहा है, कि चीन ने इसकी टेक्नोलॉजी चुराई होगी।

फ्रांसीसी राफेल अभी तक अफगानिस्तान, लीबिया, इराक, सीरिया और माली युद्ध में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है और माली में इसने साल 2013 में अपने सबसे लंबे मिशन को अंजाम दिया था, जब इसने 9 घंटे 35 मिनट तक उड़ान भरी थी।

एयर मार्शल खोसला का कहना है, कि पाकिस्तान के एफसी-31 खरीदने से भारत को चिंतित होने की जरूरत नहीं है, बल्कि भारत को ध्यान देने की जरूरत है। भारत अभी तेजस-1 और तेजस-2 फाइटर जेट पर काम कर रहा है और AMCA प्रोजेक्ट भी अब परवान चढ़ चुका है, लिहाजा चीनी FC-31 फाइटर जेट खरीदकर पाकिस्तान कुछ ही समय के लिए अपनी पीठ थपथपा सकता है।

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