Indian Navy के सबसे बड़े बेस के पास युद्धपोतों का निर्माण करेगा पाकिस्तान, भारत के प्रोजेक्ट सीबर्ड से डरा?
India-Pakistan Defence News: भारत जब भारतीय नौसेना के लिए स्वेज नहर के पूर्व में एक विशालकाय सैन्य बंदरगाह का निर्माण कर रहा है, उस वक्त पाकिस्तान की तरफ से भी जानकारी आ रही है, कि उसने अपनी नौसेना के लिए एशिया का सबसे बड़ा फ्लीट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अपनी नौसेना के लिए सबसे बड़ा फ्लीट तैयार करने की योजना बना रहा है, जिसमें 50 सरफेस युद्धपोत और 11 पनडुब्बियां शामिल होंगी। पाकिस्तानी नौसेना जिन 50 सरफेस जहाजों को ऑपरेट करना चाहती है, उनमें से 20 फ्रिगेट और कार्वेट जैसे "प्रमुख सतह जहाज" होने की उम्मीद है।

पाकिस्तान क्यों बनाना चाहता है विशाल सैन्य फ्लीट?
पाकिस्तान का विशालकाय नौसेना फ्लीट बनाने का फैसला, भारतीय नौसेना से मुकाबला करना है, क्योंकि इंडियन नेवी का प्रभुत्व पश्चिम में अदन की खाड़ी और पूर्व में मलक्का जलडमरूमध्य के बीच फैला हुआ है। हालांकि पाकिस्तानी नौसेना का ऑपरेशनल क्षेत्र, उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत जितना विशाल नहीं है, लेकिन यह भारतीय उपमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय नौसेना है।
पाकिस्तान, भारत के नौसैनिक निर्माण को सीधे खतरे के रूप में देखता है, क्योंकि इससे भारत को समुद्र में महत्वपूर्ण युद्ध लड़ने की क्षमता मिलती है, जो संभावित संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
डिफेंस वेबसाइट QUWA पर एक लेख इस बात पर जोर दिया गया है, कि पाकिस्तान का डिफेंस सेक्टर अभी भी ज्यादातर जहाज निर्माण और नौसैनिक सब-सिस्टम के लिए टर्नकी सपोर्ट की पेशकश नहीं कर सकता है। पाकिस्तान के पास अभी भी डीजल इंजन, गैस टर्बाइन, सेमीकंडक्टर, कंपोजिट मैन्युफैक्चरिंग, या फिर एडवांस ग्रेड स्टील को बनाने की क्षमता नहीं है।
QUWA के लेख में कहा गया है, कि "पाकिस्तान को डिफेंस सेक्टर में मूल प्रणालियों के निर्माण की दिशा में भी काम करना चाहिए और डिफेंस सेक्टर में स्थानीय विक्रेताओं, जैसे राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं, जैसे स्टिंग्रे टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी बनाने पर विचार करना चाहिए।"
पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान को डिफेंस सेक्टर में भारतीय मॉडल को अपनाना चाहिए, जिसने पिछले कुछ सालों में अपने डिफेंस मैन्युफैक्चर को बढ़ाने के लिए विदेशी विक्रेताओं और भारतीय विक्रेताओं के बीच ज्वाइंट वेंचर बनाने की दिशा में काफी काम किया है और इसके लिए सबसे बड़ा कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' है।
हाल ही में, जर्मन थिसेनक्रुप ने भारतीय शिपबिल्डर मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) के साथ डिफेंस प्रोडक्शन के लिए साझेदारी की है, और स्पेनिश नवंतिया ने भारत के लिए AIP-टेक्नोलॉजी वाले पनडुब्बियों के निर्माण के लिए बोली लगाने के लिए लार्सन एंड टुब्रो के साथ हाथ मिलाया है।
हालांकि, पाकिस्तान की डिफेंस कंपनियों के लिए ये काम इतना आसान नहीं है, क्योंकि ज्यादातर पाकिस्तानी कंपनियां चीन के साथ काम करने की वजह से और परणाणु हथियार बनाने के लिए सामानों की 'तस्करी' करने के आरोपों में अमेरिका से ब्लैकलिस्टेड हैं। लिहाजा, विदेशी कंपनियां किसी भी हाल में पाकिस्तानी कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर के मैदान में नहीं उतरेंगी।
लेकिन, कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KSEW) को लेकर पाकिस्तान का प्लान ये है, कि यहां सबसे ज्यादा युद्धपोतों का निर्माण किया जाए। और दिलचस्प बात यह है, कि, पाकिस्तान ने ये फैसला उस वक्त किया है, जब कुछ दिन पहले पता चला है, कि भारत अमेरिकी सेना के वर्जीनिया स्थिति विशाल नॉरफ़ॉक नौसैनिक अड्डे के समान ही अपना विशालकाय सैन्य अड्डा बना रहा है।
भारत का ये पहला नौसेना को समर्पित बंदरगाह होगा, जहां से सिर्फ सैन्य जहाज ही ऑपरेट होंगे।
भारत का प्रोजेक्ट सीबर्ड क्या है?
भारत का प्रोजेक्ट सीबर्ड, जिसका नाम आईएनएस (Indian Naval Ship) कदंब है, वो नौसेना की तरफ से ऑपरेट होने वाला पहला ऑपरेशनल बेस है। यह नौसेना को व्यापारी जहाजों की आवाजाही की चिंता किए बिना अपने ऑपरेशनल बेड़े की संचालन की अनुमति देता है।
भारतीय नौसेना के अन्य दो ऑपरेशनल बंदरगाह मुंबई और विशाखापत्तनम में हैं, लेकिन ये दोनों बंदरगाह, वाणिज्यिक बंदरगाहों के भीतर स्थित हैं। लिहाजा, युद्ध के समय इन दोनों बंदरगाहों से व्यावारिक जहाजों के बीच से सैन्य जहाजों का ऑपरेशन मुश्किल हो सकता है।
भारत अब हिंद महासागर में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर बन चुका है, लिहाजा INS कदंब भारत को दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक के करीब होने का लाभ प्रदान करता है और अभी भी पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों की स्ट्राइक रेंज से बाहर है। यह एक प्राकृतिक गहरे पानी का बंदरगाह है, जो एक एयरक्राफ्ट कैरियर, विध्वंसक, गुप्त युद्धपोत और पनडुब्बियों को समायोजित कर सकता है। बेस के मुख्य कार्यों में सतह और पनडुब्बी बेड़े का रखरखाव, ओवरहाल और मरम्मत शामिल है।

भारतीय नौसेना की ताकत से डरा पाकिस्तान?
पाकिस्तान ने 2015 में अपनी एक विशालकाय नौसेना बनाने का प्लान रखा था और उसने 2015 में, चीन से आठ S26 एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) से सुसज्जित हैंगर-क्लास पनडुब्बियों (SSP) को खरीदने के लिए पहला कॉन्ट्रैक्ट किया था। इस परियोजना के तहत, पाकिस्तान KSEW में चार जहाजों का निर्माण करेगा, और बाकी का निर्माण चीन शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन में किया जाएगा।
पहली चार जहाजें 2023 तक पाकिस्तान की नौसेना को सौंपी जानी थी, जबकि KSEW से अंतिम चार जहाजों को 2028 तक पाकिस्तान को सौंपा जाना था, लेकिन इंजन को लेकर जर्मनी की इजाजत नहीं मिलने की वजह से इस प्रोजेक्ट में काफी देर हो गई और आखिरकार पाकिस्तान के लिए आठ हैंगर II पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी को अप्रैल 2024 में वुहान के वुचांग शिपबिल्डिंग यार्ड में लॉन्च किया गया।
पाकिस्तान अपने KSEW शिपयार्ड में जहाजों के निर्माण की क्षमता को बढ़ा रहा है और KSEW ने सिंक्रोलिफ्ट शिफ्ट लिफ्ट-एंड-ट्रांसफर सिस्टम का उपयोग शुरू कर दिया है।
KSEW ने एक नए निर्माण हॉल और फैब्रिकेशन सुविधा का भी विस्तार किया है, जो बड़े नौसैनिक युद्धपोतों के निर्माण और ओवरहाल के सभी पहलुओं को कवर करेगा और पुराने जहाजों में नए उप-प्रणालियों को एकीकृत करेगा।
KSEW की क्षमता निर्माण का मतलब है, कि यह 8,000 टन तक के जहाजों का समर्थन कर सकता है, जो दर्शाता है, कि यह भविष्य में फ्रिगेट, विध्वंसक या सहायक जहाजों जैसे भारी जहाजों के निर्माण के लायक हो सकता है। KSEW ने पहले ही पाकिस्तानी नौसेना के लिए चार बाबर-क्लास के कार्वेट का निर्माण किया है। पहले दो जहाज, पीएनएस बदर और पीएनएस तारिक को 2022 और 2023 में लॉन्च किया गया था।
वहीं, इस क्लास के दूसरे जहाज PNS बदर को मई 2022 में KSEW ने लॉन्च किया था, जबकि चौथा जहाज कराची शिपयार्ड में निर्माणाधीन है। इस क्लास के पहले और तीसरे जहाज तुर्की में बनाए गए हैं। सभी चार जहाज 2025 तक पाकिस्तानी नौसेना के साथ ऑपरेशन में आ जाएंगे।
सैटेलाइट तस्वीरों से KSEW में एक नई छोटी पनडुब्बी देखे जाने की पुष्टि हुई है। आधिकारिक तौर पर पाकिस्तानी नौसेना ने इसकी विशिष्टताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। लेकिन, बौनी पनडुब्बियों से उथले पानी में संचालन और नौसेना विशेष बलों की तैनाती की उम्मीद की जाती है।
KSEW जिन्ना-क्लास के युद्धपोतों का निर्माण करेगा, और पाकिस्तान नौसेना ने अपने कार्यक्रमों के मुताबिक एक नया युद्धपोत डिजाइन करने के लिए ASFAT (सैन्य कारखाने और शिपयार्ड प्रबंधन) के साथ पहले ही एक अनुबंध पर हस्ताक्षर कर दिया है। इस अनुबंध के तहत जिन्ना क्लास के चार जहाज बनाए जाएंगे।
पाकिस्तानी नौसेना ने तुर्की एसटीएम-500 शैलो-वॉटर अटैक सबमरीन बनाने में भी दिलचस्पी दिखाई है।
व्यक्त की है। इन पनडुब्बियों का उपयोग विशेष बलों की तैनाती और बारूदी सुरंग युद्ध क्षमताओं के लिए किया जाता है। STM-500 को IDEAS 2022 प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया था। एक बार समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद, KSEW द्वारा इन पनडुब्बियों का निर्माण करने की उम्मीद है।
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