Video: पाकिस्तान में तीन और लड़कियों को बनाया गया हिन्दू से मुसलमान, चुप्पी तोड़ो इमरान खान
पाकिस्तान में 3 और हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इस्लामाबाद: हिन्दू लड़कियों के लिए नर्क बने पाकिस्तान में अब भी हिन्दू समुदाय को निशाना बनाने की घटनाओं में कमी नहीं आई है। पिछले एक महीने में पाकिस्तान में तीन और हिन्दू लड़कियों का पहले अपहरण किया गया और फिर धर्मपरिवर्तन करवा दिया गया। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार हो रहा है लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान चुप्पी साधे हुए हैं।

तीन लड़कियों का धर्मपरिवर्तन
पाकिस्तान एक कट्टरपंथी देश है और उस देश से किसी और धर्मवालों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। पाकिस्तान का सिंध इलाका जो पहले से ही कट्टरपंथियों के लिए बदनाम है, वहां तीन और हिन्दू लड़कियों को अगवा करने के बाद उनका धर्मपरिवर्तन करवाया गया है। तीनों लड़कियों को जान से मारने की धमकी देकर हिन्दू से मुसलमान बनाया गया। धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली तीन लड़कियों में से 2 लड़कियां नाबालिग हैं। नया पाकिस्तान बनाने की बात करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूरी घटना पर चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि, पुलिस मामले की लीपापोती में लगी हुई है।

धर्मपरिवर्तन और शादी
बताया जा रहा है कि 13 साल की हिन्दू लड़की कविता बाई को पहले कट्टरपंथियों ने अपहरण कर लिया और फिर बकायदा उसका धर्मपरिवर्तन कराया गया। धर्मपरिवर्तन का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इतना ही नहीं रिपोर्ट ये भी है कि धर्मपरिवर्तन के बाद 13 साल की नाबालिग बच्ची की जबरदस्ती शादी करवा दी गई। आप वीडियो में देख रहे होंगे कि सैकड़ों लोंगों के बीच हिन्दू लड़की का एक मौलाना धर्मपरिवर्तन करवा रहा है और लोग उसका वीडियो बना रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आरती मेघवार नाम की लड़की का अपहरण दाहरकी से किया गया था जबकि कविता को काशमोर से अगवा किया गया था। वहीं तीसरी लड़की रीना मेघवार को 13 फरवरी को किडनैप किया गया था और फिर दादू इलाके में एक अधेड़ के साथ उसकी शादी करवा दी गई। रीना के परिजनों के मुताबिक उन्होंने कई पुलिस अधिकारियों से इसकी शिकायत की लेकिन हर जगह से उन्हें भगा दिया गया।

हिन्दू लड़कियों का सबसे ज्यादा धर्मपरिवर्तन
अमेरिकन रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के दक्षिण सिंध में रहने वाले अल्पसंख्यक हिन्दुओं का सबसे ज्यादा धर्मपरिवर्तन किया जाता है। 30 दिसंबर 2020 को नेहा का धर्मपरिवर्तन किया गया था जो एक क्रिश्चियन लड़की थी। पाकिस्तानी स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में बेहद खतरनाक खुलासे किए गये हैं। पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग अलग बहानों के साथ हिन्दू लड़कियों को किडनैप कर लिया जाता है। ज्यादातर वारदातों में देखा गया है कि गरीब हिन्दू परिवारों की बेटियों को ही अगवा किया जाता है। ये हिन्दू परिवार किसी अमीर मुस्लिम के खेत में काम करते हैं और खेत का मालिक उन्हें काफी कर्ज दिए रहता है। फिर अचानक गरीब हिन्दू की बेटी को किडनैप कर उन्हें किसी अधेड़ मुस्लिम के हाथों बेच दिया जाता है। पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर हिन्दू लड़कियों को शादी के लिए अगवा किया जाता है। किडनैप करने के बाद पहले उनका धर्म परिवर्तन किया जाता है और जल्द से जल्द उन्हें बेच दिया जाता है।

पुलिस मौलवी मजिस्ट्रेज सब शामिल
मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकल स्तर पर एक पूरा का पूरा गिरोह धर्मपरिवर्तन के पीछे शामिल होता है। जिसमें मौलवी, पुलिस अधिकारियों के साथ साथ मजिस्ट्रेट भी शामिल होते हैं। किसी हिन्दू लड़की का अपहरण होने के बाद मौलवी उसके धर्मपरिवर्तन कर मुसलमान बनाते हैं। भ्रष्ट पुलिस अधिकारी मुकदमा दर्ज नहीं करते हैं और अगर मुकदमा दर्ज भी होता है तो मजिस्ट्रेट उस मुकदमे को खारिज कर देते हैं। चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्टिविस्ट जिबरान नासिर इस सिंडिकेट को 'माफियाराज' करार देते हुए बताते हैं कि पाकिस्तान में ''हिन्दू लड़कियों का शिकार'' किया जाता है।

टार्गेट पर हिन्दू लड़कियां
हिन्दू लड़कियां ज्यादातर इसलिए इनके टार्गेट पर होती हैं क्योंकि स्थानीय पुलिस से लेकर स्थानीय नेता तक को पहले धर्म की दुहाई दी जाती है और अगर कोई नेता विरोध करता है तो मौलवी उसके खिलाफ फतवा जारी करने की धमकी देते हैं। चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्टिविस्ट जिबरान नासिर बताते हैं पाकिस्तान में अब सिर्फ 3.6 प्रतिशत ही अल्पसंख्यक रह गये हैं। पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है और अगर कोई हिन्दू परिवार उस विरोध के खिलाफ थाने में जाता है तो उसके ऊपर ईश-निंदा का आरोप मढ़ दिया जाता है। पाकिस्तान में ईश-निंदा के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है। लिहाजा, ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराने पीड़ित परिवार नहीं जाता है।












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