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पाकिस्तान में कपास पर बवाल: मील मालिकों ने इमरान खान को लताड़ा, कहा- भारत के अलावा विकल्प नहीं

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कराची: पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने भारत से कॉटन और चीनी खरीदी को लेकर यू-टर्न क्या लिया, पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने सरकार के इस यू-टर्न का भारी विरोध करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने इमरान खान सरकार के इस कदम को भारी निराशाजनक बताया है और कहा है कि पाकिस्तान का पीछे हटना पाकिस्तान के लिए भारी घाटे का सौदा साबित होने वाला है।'

टेक्सटाइल इंडस्ट्री का विरोध

टेक्सटाइल इंडस्ट्री का विरोध

पाकिस्तान एप्रेल फॉरम के चेयरमैन जावेज बिलवानी ने कहा है कि इमरान खान सरकार का पलटना पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए खतरनाक साबित होने वाला है और सरकार ये कदम निराशा से भरा है। उन्होंने कहा कि भारत से कॉटन एक्सपोर्ट करना पाकिस्तान के हित में था। उन्होंने सरकार के कॉमर्स मिनिस्ट्री के एडवाइजर अब्दुल रज्जाक दाउद के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत के साथ कॉटन आयात करना पाकिस्तान की इस वक्त की वास्तविक जरूरत है। उन्होंने कहा कि इमरान खान सरकार को एक बार फिर से भारत से कॉटन खरीदने के फैसले पर अमल करना चाहिए।

खतरे में पाकिस्तान की कॉटन इंडस्ट्री

खतरे में पाकिस्तान की कॉटन इंडस्ट्री

पाकिस्तान का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट सेक्टर लगातार ड्यूटी फ्री कॉटन की डिमांड कर रहा है और ड्यूटी फ्री कॉटन पाकिस्तान को भारत से ही सस्ता मिल सकता है। किसी और देश से कॉटन खरीदने पर उसे पाकिस्तान तक लाने की लागत ही इतनी बढ़ जाती है, कि वो घाटे का सौदा साबित होने लगता है। लिहाजा, पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री लगातार सरकार पर भारत से कॉटन खरीदने के लिए दबाव बना रही थी और इमरान खान ने भारत से कॉटन खरीदने को मंजूरी भी दे दी थी। लेकिन, भारत से कॉटन खरीदने को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल आ गया है और फौरन इमरान खान अपने फैसले से पलट गये हैं।

पाकिस्तान में खत्म हो गया कॉटन

पाकिस्तान में खत्म हो गया कॉटन

पाकिस्तान एप्रेल फॉरम के चेयरमैन जावेज बिलवानी ने कहा है कि ईसीसी के फैसले को पाकिस्तान की कैबिनेट ने पलटकर विश्व व्यापार के सामने काफी गलत मैसेज दिया है और इस वक्त पाकिस्तान में कपास पूरी तरह से खत्म हो चुका है। वहीं, इमरान खान सरकार के भारत से कपास खरीदने के फैसले से पलट जाने के बाद कॉटन की कीमत पाकिस्तान में काफी ज्यादा बढ़ चुकी है और पाकिस्तान सरकार अब कॉटन कहां से खरीदे उसे समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सरकार के इस फैसले के बाद पाकिस्तान का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बुरी तरह से गिर सकता है

कॉटन इंडस्ट्री में महंगाई

कॉटन इंडस्ट्री में महंगाई

पाकिस्तान में कॉटन इंडस्ट्री खतरे में आ चुकी है और पाकिस्तानी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के मुताबिक पाकिस्तान में कॉटन प्रोडक्शन की लागत में 40 प्रतिशत का इजाफा आ चुका है। पाकिस्तान में 2014-2015 में ही डेढ़ करोड़ कॉटन बेल्स की जरूरत होती थी लेकिन इस साल पाकिस्तान में महज 75 लाख बेल्स से ही प्रोडक्शन हो रहा है। जिसकी वजह से काफी ज्यादा महंगाई आ चुकी है। पाकिस्तान एप्रेल फॉरम के चेयरमैन जावेज बिलवानी के मुताबिक, पाकिस्तान के समुन्द्री झगड़े की वजह से जो कॉटन वो किसी देश से पहले 25 दिनों में मंगा लेता था उसे आने में अब 105 दिनों का वक्त लगता है और उसकी लागत में 700 फीसदी का इजाफा हो जाता है। लिहाजा, पाकिस्तान के लिए किसी और देश से कॉटन खरीदना और फिर उसका प्रोडक्शन करना काफी ज्यादा महंगा होने वाला है, जिससे कॉटन कपड़े इतने महंगे हो जाएंगे कि उसे खरीदना असंभव जैसा हो जाएगा।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री की स्थिति खराब

टेक्सटाइल इंडस्ट्री की स्थिति खराब

2019/2020 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस कदर ताव में आये थे कि उन्होंने भारत से साथ हवाई और भूमि संपर्क को खत्म कर दिया था। वहीं, भारत-पाकिस्तान रेल मार्ग भी बंद करने का फैसला पाकिस्तान ने लिया था। लेकिन 2021 में इमरान खान वापस भारत के सामने लेट चुके हैं। पाकिस्तान को इस साल 12 मिलियन बेल्स कपास की जरूरत है। पाकिस्तान की मिनिस्ट्री ऑफ नेशनल फूड सिक्योरिटी का अनुमान है कि पाकिस्तान सिर्फ 7.7 मिलियन बेल्स का ही उत्पादन कर सकता है। लिहाजा 5.5 मिलियन बेल्स का आयात उसे किसी भी हाल में करना होगा और इतनी मात्रा में कपास पाकिस्तान को सिर्फ और सिर्फ भारत से ही मिल सकता है। कपास की कमी होने पर पाकिस्तान इसका आयात अमेरिका, ब्राजील और उजबेकिस्तान से भी करता है मगर इन देशों से कपास खरीदना पाकिस्तान के लिए काफी ज्यादा महंगे का सौदा होता है लिहाजा कपास निर्मित वस्तुओं की कीमत इतनी बढ़ जाती है कि पूरी इंडस्ट्री की हालत खराब हो चुकी है।

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English summary
Pakistan cotton industry irks imran khan cabinet decision to not import cotton from india.
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