Explainer: पाकिस्तान में परवान पर पहुंचा चुनाव प्रचार, जेल में बंद इमरान खान के भविष्य का क्या होगा?
Pakistan Election 2024: पाकिस्तान में 8 फरवरी को चुनाव होना अब तय हो गया है और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है, जिसके तहत 20 दिसंबर, यानि दो दिनों के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जो 22 दिसंबर तक, यानि सिर्फ 3 दिनों तक चलेगी। यानि, 22 दिसंबर को तय हो जाएगा, कि चुनाव में कौन कौन नेता शामिल हो रहे हैं और पाकिस्तान चुनाव आयोग, 23 दिसंबर को उम्मीदवारों के नाम को सार्वजनिक कर देगा।
लिहाजा, तमाम राजनीतिक दल उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने के लिए आनन-फानन तैयारियां कर रही हैं। वहीं, अभी तक मिला जानकारियों के मुताबिक, नवाज शरीफ और उनके भाई शहबाज शरीफ लाहौर की अलग अलग सीटों से चुनावी मैदान में उतरेंगे, लेकिन जिस नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, वो नाम है इमरान खान।

इमरान खान जेल में बंद हैं और एक जांच एजेंसी के हाथ से निकलकर दूसरी जांच एजेंसी के हाथ में सौंपे जा रहे हैं, लिहाजा सवाल ये हैं, कि लोकप्रियता के रथ पर सवार होने के बाद भी क्या पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, जिनकी तीन साल जेल की सजा को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट सस्पेंड कर चुका है, क्या वो चुनावी मैदान में उतर पाएंगे या नहीं?
कानूनी चक्कर में फंसे हैं इमरान खान
लाहौर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान की तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में उनकी पांच साल की अयोग्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर पाकिस्तान के शीर्ष चुनाव निकाय को नोटिस जारी किया है, जो उन्हें फरवरी में आम चुनाव लड़ने से रोक देगा।
इमरान खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है, कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी है, लिहाजा चुनाव आयोग के इस फैसले को रद्द किया जाए, जिसमें कहा गया है, कि वो पांच सालों तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
जिसपर पाकिस्तानी हाई कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने आदेश देते हुए कहा, कि वह औपचारिक रूप से सुनवाई से पहले इमरान खान याचिका के अधिकार क्षेत्र पर फैसला करेगी, लेकिन पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) की तरफ से कोर्ट में कोई मौजूद ही नहीं हुआ था। लिहाजा, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा और इसके अलावा, कोर्ट में कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
चुनाव आयोग के वकील का हाई कोर्ट में पेश नहीं होना बताता है, कि चुनाव आयोग आखिरकार इमरान खान को लेकर क्या चाहता है, क्योंकि अब जबकि 22 दिसंबर तक ही नामांकन प्रक्रिया होना है, तो 5 दिनों में हाईकोर्ट फैसला कैसे ले पाएगा, कि इमरान खान चुनाव लड़ने के योग्य हैं या नहीं?
पाकिस्तान इलेक्शन कमीशन ने 8 अगस्त को 71 वर्षीय इमरान खान को अयोग्य घोषित कर दिया था, जिन्हें तोशखाना भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया गया था।
इमरान खान चाहते हैं, कि उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए, क्योंकि वह आम चुनाव में भाग लेना चाहते हैं, जिसकी तारीख ईसीपी ने 8 फरवरी घोषित की हुई है।
इमरान खान 2018 में पंजाब प्रांत के मियांवाली से नेशनल असेंबली के लिए चुने गए थे।

दूसरी पार्टियों ने कसी कमर
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल पहले ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के लिए संभावित उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए संसदीय बोर्ड का गठन कर चुके हैं और माना जा रहा है, कि एक से दो दिनों के अंदर तमाम पार्टियां उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करने वाली हैं।
16 दिसंबर को पीएमएल-एन के एक वरिष्ठ नेता मलिक अबरार ने अरब न्यूज़ को बताया था, कि "हमारे संसदीय बोर्ड ने साक्षात्कार और हमारे उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए अब तक 10 बैठकें की हैं।"उन्होंने कहा, कि "उम्मीदवारों की अंतिम सूची उम्मीद है कि अगले सप्ताह प्रकाशित की जाएगी।"
हालांकि, उनका ये बयान चुनावी कार्यक्रम के ऐलान से पहले का था, लिहाजा माना जा सकता है, कि एक या दो दिनों में नवाज शरीफ की पार्टी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर देगी।
पीएमएल-एन सूत्रों के हवाले से पाकिस्तानी मीडिया ने कहा है, कि नवाज और उनके भाई शहबाज, लाहौर से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
वहीं, नवाज शरीफ की ही पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री रह चुके शाहिद खाकन अब्बासी, जो मुरी के रहने वाले हैं, लेकिन पिछली बार लाहौर से चुने गए थे, उन्होंने आगामी चुनाव नहीं लड़ने का विकल्प चुना है।
बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के दो पूर्व प्रधान मंत्री, सैयद यूसुफ रजा गिलानी और राजा परवेज अशरफ, क्रमशः मुल्तान और गुजर खान से चुनाव लड़ेंगे।
पीएमएल-एन की मुख्य आयोजक मरियम नवाज कराची से चुनाव लड़ेंगी, जबकि पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी, दो सीटों कराची और लरकाना से उम्मीदवार होंगे। पूर्व राष्ट्रपति और पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी नवाबशाह से अपनी किस्मत आजमाएंगे।
मौलाना फजलुर रहमान डेरा इस्माइल खान से चुनाव लड़ेंगे तो जमात ए इस्लामी के अमीर सिराज-उल-हक पेशावर से चुनाव लड़ेंगे।
आपको बता दें, कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पाकिस्तान में चुनावी कार्यक्रम का ऐलान हो गया है और 8 फरवरी को संसदीय चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। वहीं, करीब करीब तय हो गया है, कि इमरान खान चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।












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