पाकिस्तान को IMF से लोन मिलने का रास्ता करीब करीब साफ, चीन-सऊदी के बाद UAE से भी ग्रीन सिग्नल

अगले वित्त वर्ष तक पाकिस्तान को 25 अरब डॉलर का कर्ज और चुकाना होगा। लिहाजा, आईएमएफ से लोन हासिल करने के बाद भी पाकिस्तान की मुसीबतें कम नहीं होने वाली हैं।

Pakistan UAE IMF

Pakistan UAE IMF: पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिलने का रास्ता करीब करीब साफ होता नजर आ रहा है और पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को घोषणा की है, कि संयुक्त अरब अमीरात ने आईएमएफ को बताया है, कि वो पाकिस्तान को एक अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने के लिए तैयार है।

चीन और सऊदी अरब के बाद संयुक्त अरब अमीरात के इस आश्वासन के बाद पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिलने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है, बशर्ते आईएमएफ कोई नई शर्त ना रख दे।

पाकिस्तान पिछले कई महीनों से आईएमएफ प्रोग्राम में जाने के लिए संघर्ष कर रहा है और अगर डील पर बात बन जाती है, को आईएमएफ से पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर का नया कर्ज मिलेगा।

इशाक डार ने ट्विटर पर पुष्टि की है, कि "यूएई के अधिकारियों ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर के अपने द्विपक्षीय समर्थन के लिए आईएमएफ से पुष्टि की है।"

पाकिस्तान को कितना फायदा होगा?

पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने कहा, कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) अब संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों से 1 अरब डॉलर का जमा लेने के लिए आवश्यक दस्तावेजीकरण में लगा हुआ है।

पिछले हफ्ते, वाशिंगटन स्थित आईएमएफ ने पाकिस्तान को बताया था, कि उसे आईएमएफ से 2 अरब डॉलर का कर्ज मिलने की पुष्टि हुई है। यानि, सऊदी अरब पाकिस्तान के बैंक में 2 अरब डॉलर रखने के लिए तैयार है।

आपको बता दें, कि आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने शर्त रखी थी, कि लोन लेने के लिए उसे अपने सहयोगी देशों से लिखित में आश्वासन हासिल करना होगा।

हालांकि, अगर इस बार आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर का कर्ज मिल भी जाता है, फिर भी उसे जून में एक बार फिर से आईएमएफ के कार्यक्रम में जाना होगा और फिर से उसी तरह की माथापच्ची करनी होगी।

पाकिस्तान का नाजुक विदेशी मुद्रा भंडार

पाकिस्तान के पास एक महीने से भी कम समय का विदेशी मुद्रा भंडार है और वह आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज का इंतजार कर रहा है, जो पिछले साल नवंबर महीने से फंसा हुआ है।

वहीं, एक दिन पहले ही आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है, कि पाकिस्तान अभी डिफॉल्ट स्तर पर नहीं पहुंचा है।

क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, कि आईएमएफ पाकिस्तान की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों का समर्थन हासिल कर रहा है।

वहीं, उन्होंने ये भी कहा, कि "पाकिस्तान अभी तक उस स्तर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन इस तरह के जोखिमों को टालने के लिए देश को एक स्थायी नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है"।

आपको बता दें, कि पाकिस्तान ने आईएमएफ के बेलऑउट पैकेज को बार बार तोड़ा है, और इसीलिए आईएमएफ इस बार पाकिस्तान को लोन देने से पहले उससे सारी शर्तें मनवाने में लगा है।

पाकिस्तान के सामने कितनी बड़ी चुनौती है?

आपको बता दें, कि पाकिस्तान को साल 2026 तक, यानि अगले 3 सालों में 77.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है।

यानि, जो पाकिस्तान 1.1 अरब डॉलर के कर्ज की किश्त के लिए आईएमएफ के सामने महीनों से गिड़गिड़ा रहा है और जिस पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले कई महीनों से 3 अरब डॉलर के आसपास ही पैसे बचे हों, उस पाकिस्तान को अगर फिलहाल आईएमएफ से लोन मिल भी जाता है, तो उसके लिए चैन से बैठने जैसी कोई बात नहीं होगी।

पाकिस्तान को अप्रैल 2023 से जून 2026 तक 77.5 अरब अमेरीकी डालर के बाहरी ऋण का पुनर्भुगतान करना है। अमेरिकी थिंक टैंक ने चेतावनी दी है, कि ये कर्ज चुकाना पाकिस्तान के लिए असंभव है, लिहाजा पाकिस्तान के लिए दिवालिया होना तय है।

जियो न्यूज ने शुक्रवार को बताया, कि यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) द्वारा गुरुवार को प्रकाशित विश्लेषण में चेतावनी दी गई है, कि आसमान छूती महंगाई, राजनीतिक संघर्ष और बढ़ते आतंकवाद के बीच, पाकिस्तान अपने बड़े पैमाने पर बाहरी ऋण दायित्वों के कारण डिफ़ॉल्ट के जोखिम का सामना कर रहा है।

USIP की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 तक पाकिस्तान को 77.5 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाने की जरूरत है, और जिस पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था ही 350 अरब डॉलर की है, उसके लिए ये कर्ज चुकाना नामुमकिन की तरह है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसी साल जून महीने तक पाकिस्तान के सामने 4.5 अरब डॉलर का एक लोन चुकाना है और पाकिस्तान इतने पैसों की व्यवस्था कहां से करता है, ये देखने वाली बात होगी। इनमें से 1.4 अरब डॉलर चीन का सेफ डिपोजिट है, जो पाकिस्तान के स्टेट बैंक में रखा गया था और 1 अरब डॉलर का चीनी कॉमर्शियल लोन का कर्ज है, जिसे पाकिस्तान सरकार ने लिया था।

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