मलाला यूसुफजई के खिलाफ पाकिस्तान में आया विवादास्पद वीडियो, स्कूल संगठनों का फूटा गुस्सा
पाकिस्तान में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने मलाला यूसुफजई के खिलाफ डॉक्यूमेंट्री जारी करते हुए उन्हें इस्लाम और पैगंबर के खिलाफ बताया है।
इस्लामाबाद, जुलाई 13: सिर्फ 17 साल की उम्र में कट्टरपंथियों के खिलाफ जंग छेड़कर नोबेल प्राइज सम्मान हासिल करने वाली पाकिस्तान की कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को लेकर पाकिस्तान में भयानक बवाल खड़ा हो गया है। मलाला यूसुफजई के खिलाफ स्कूल संगठनों ने अभियान छेड़ दिया है और बकायदा वीडियो जारी कर उन्हें इस्लाम के खिलाफ ठहराया है। मलाला यूसुफजई के खिलाफ पाकिस्तान में एक डॉक्यूमेंट्री जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि मलाला इस्लाम, शादी के खिलाफ पश्चिमी देशों का एजेंडा चला रही हैं।

मलाला के खिलाफ डॉक्यूमेंट्री
मलाला यूसुफजई, जो सोमवार को 24 साल की हो गईं हैं, उन्हें बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ आवाज उठाने, उनकी शिक्षा के लिए संघर्ष करने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए अभियान चलाने के लिए 2014 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। मलाला यूसुफजई को भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ सामूहिक तौर पर नोबेल प्राइज मिला था और सिर्फ 17 साल की उम्र में नोबेल प्राइड हासिल कर मलाला यूसुफजई ने एक रिकॉर्ड कायम किया था। लेकिन, अब पाकिस्तान में उनके खिलाफ डॉक्यूमेन्ट्री जारी किया गया है।

स्कूल संगठनों ने खोला मोर्चा
ऑल-पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल्स फेडरेशन के अध्यक्ष काशिफ मिर्जा ने गुलबर्ग में अपने कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मलाला के खिलाफ एक डॉक्यूमेट्री जारी किया है, जिसमें उन्हें इस्लाम का विरोधी ठहराया गया है। स्कूल संगठनों ने कहा कि मलाला पश्चिमी देशों के एजेंडे को चला रही हैं और उनके इशारे पर इस्लाम के खिलाफ बोल रही है। स्कूल संगठनों ने कहा कि ''मलाला शादी के खिलाफ बयान दे रही है, जो इस्लाम के खिलाफ है, और उनका इरादा पश्चिमी देशों के एजेंडे पर चलते हुए इस्लाम को कमजोर करना है।'' इसके साथ ही स्कूल संगठनों ने पाकिस्तान के 2 लाख प्राइवेट स्कूलों में मलाला की असलियत छात्रों को बताने का ऐलान किया है। स्कूल संगठनों ने कहा कि 2 लाख प्राइवेट स्कूलों के जरिए 2 करोड़ छात्रों को लगातार मलाला के एजेंडे के बारे में बताया जाएगा और पूरे पाकिस्तान में उसे एक्सपोज किया जाएगा। स्कूल संगठनों ने कहा कि ''हमारा लक्ष्य सााफ है कि हम मलाला को युवाओं के बीच एक्सपोज करना चाहते हैं, ताकि मलाला के चक्कर में पाकिस्तान के युवा नहीं फंसे''

शादी पर बयान से विवाद
स्कूल संगठनों ने कहा कि मलाला ने ''लिव-इन-रिलेशनशिप'' की वकालत की थी, जो इस्लाम के खिलाफ है और इसे व्यभिचार माना जाता है। स्कूल संगठनों ने कहा कि ''शादी पैगंबर की सुन्नत है और साझेदारी व्यभिचार है''। स्कूल संगठन के अध्यक्ष मिर्जा ने कहा कि '' मलाला ने शादी की परंपरा को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है और सुझाव दिया है कि 'साझेदारी' शादी करने से बेहतर है। उन्होंने कहा कि, "मलाला ने लोगों को पाप में जीने की वकालत करते हुए शादी की संस्था और परिवार के ढांचे पर हमला किया है, लिव-इन-रिलेशनशिप को कोई भी मुसलमानों सही नहीं ठहरा सकता है और हर मुसलमान इसकी निंदा करता है''

पश्चिमी देशों की साजिश
इसी तरह मिर्जा ने अपनी पुस्तक "आई एम मलाला" में कहा कि, नोबेल शांति विजेता मलाला की किताब में काफी विवादास्पद सामग्रियां शामिल हैं, जो इस्लाम की शिक्षाओं, कुरान, इस्लाम की विचारधारा और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना और पाकिस्तान सेना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि ''यह किताब उन पश्चिमी ताकतों के इशारे पर लिखी गई है, जिन्होंने मलाला का इस्तेमाल अपने गुप्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया है'' ''मलाला ने अपनी विवादित किताब में इस्लाम और पाक सेना को 'आतंकवादी' घोषित किया है। उन्होंने कुरान की आयतों की भी आलोचना की है कि दो महिलाओं की गवाही एक पुरुष के बराबर है और बलात्कार के मामले में चार गवाह होने ही चाहिए, इस बात की भी आलोचना की है'', जो कुरान के खिलाफ है।












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