मुस्लिम देशों ने छोड़ा हाथ तो यूरोप के चरणों में गिरे शहबाज.. दर्जन भर राजदूतों के सामने गिड़गिड़ाया पाकिस्तान
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को कम से कम 3 राजदूतों ने इस बैठक के बारे में जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक ये बैठक IMF लोन प्रोग्राम की समाप्ति से सिर्फ 11 दिन पहले हुई।
गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान कभी भी डिफॉल्ट हो सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि 30 जून को खत्म होने वाले 6.5 बिलियन डॉलर के मौजूदा IMF लोन प्रोग्राम के रिवाइवल की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
इस बीच शहबाज शरीफ ने IMF से लोन हासिल करने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंतिम प्रयास के तहत सोमवार को करीब 1 दर्जन प्रभावशाली देशों के राजदूतों से गुहार लगाई है ताकि वे IMF से लोन दिलवाने में उनकी मदद कर सकें।

पाकिस्तानी वेबसाइट द ट्रिब्यून एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शहबाज शरीफ सोमवार को राजधानी इस्लामाबाद में लगभग एक दर्जन देश जिनमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, जापान, चीन, सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत शामिल थे, उनके साथ बैठक की।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को कम से कम 3 राजदूतों ने इस बैठक के बारे में जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक ये बैठक IMF लोन प्रोग्राम की समाप्ति से सिर्फ 11 दिन पहले हुई। ऐसे में कहा जा रहा है कि ये IMF से लोन हासिल करने की ये संभवतः शहबाज शरीफ की आखिरी कोशिश है।पाकिस्तान IMF से 6.5 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज लेना चाहता है।
बैठक में शामिल एक राजदूत ने ट्रिब्यून एक्सप्रेस को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री ने विदेशी राजदूतों को उन प्रयासों से अवगत कराया जो वित्त मंत्री इशाक डार और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पिछले कई महीनों में किए हैं।
सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री शरीफ चाहते हैं कि शेष 2.6 बिलियन डॉलर में से कम से कम 1.2 बिलियन डॉलर की किश्त पहले मिल जाए। कुछ राजदूतों ने शहबाज शरीफ को आश्वासन दिया कि वे अपनी सरकार को पाकिस्तान की स्थिति से अवगत कराएंगे। सूत्रों के मुताबिक ये राजदूत, आईएमएफ कर्मचारियों के भी संपर्क में हैं।
हालाकि इस बैठक को लेकर पीएम कार्यालय ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। अधिकारियों के अनुसार, शहबाज शरीफ ने विदेशी राजनयिकों को बताया कि फरवरी में सरकार ने सभी सहमत कदम उठाए, जिसमें 170 अरब रुपये का मिनी बजट, बिजली और गैस शुल्क में वृद्धि, ब्याज दरों में वृद्धि और विनिमय दर को बाजार की ताकतों पर छोड़ना शामिल है।
गौरतलब है कि IMF लोन प्रोग्राम 30 जून तक समाप्त होने वाला है। इस वर्ष मूडीज और फिच ने पाकिस्तान को डाउनग्रेड कर दिया है। डिफॉल्ट को टालने के लिए पाकिस्तान IMF के साथ 'लोन प्रोग्राम' को बचाने की कोशिश में लगा है।
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