पाकिस्तान में केयरटेकर PM बनाने की प्रक्रिया शुरू, विपक्ष ने कहा- संविधान को घोंटा गला, मार्शल लॉ लगा
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने पाकिस्तान के लिए कार्यवाहक प्रधान मंत्री की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया की शुरूआत कर दी है, जबकि शहबाज शरीफ ने इमरान खान पर देश के संविधान का गला घोंटने का आरोप लगाया है।
इस्लामाबाद, अप्रैल 04: पाकिस्तान की राजनीति में तूफान मचा हुआ है और रविवार को इमरान सरकार द्वारा नेशनल असेंबली को भंग किए जाने और नया चुनाव कराने की सिफारिश को राष्ट्रपति ने मान लिया है और अब इमरान खान को आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया गया है। वहीं, अब राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश में केयरटेकर प्रधानमंत्री बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

केयरटेकर प्रधानमंत्री की तलाश
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने पाकिस्तान के लिए कार्यवाहक प्रधान मंत्री की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया की शुरूआत कर दी है और राष्ट्रपति ने इमरान खान और नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ को इस बाबत पत्र भेज दिया है। राष्ट्रपति ने दोनों नेताओं से 'अगला प्रधानमंत्री कौन हो?' इस बाबत सुझाव मांगा है, लेकिन विपक्ष की तरफ से काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। वहीं, बिना अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराए संसद को भंग करने को लेकर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है, हालांकि, माना जा रहा है कि, संसद और सुप्रीम कोर्ट में कौन ज्यादा ताकतवर है और क्या संसद के फैसले को सुप्रीम कोर्ट पलट सकता है, इसको लेकर काफी विवाद की वजह से आज सुप्रीम कोर्ट का किसी नतीजे पर पहुंचना काफी मुश्किल है।

विपक्ष ने कहा- संविधान का घोंटा गला
वहीं, पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने इमरान खान पर देश के संविधान का गला घोंटने का आरोप लगा कहा कहा कि, देश में 'सिविलियन मार्शल लॉ' लगा दिया गया है और उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान के इस कदम 'असंवैधानिक' करार दिया है। विपक्ष के एक और बड़े नेता पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी और जेयूआई-एफ नेता असद महमूद, एमक्यूएम-पी के संयोजक खालिद मकबूल सिद्दीकी, बीएनपी-एम प्रमुख अख्तर मेंगल और अन्य नेताओं के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि, पीएम इमरान खान, उनकी पार्टी के सदस्यों ने पाकिस्तान के संविधान को खुलेआम चुनौती दी है। उन्होंने कहा, "3 अप्रैल को पाकिस्तान के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद किया जाएगा," उन्होंने कहा कि, पीएम इमरान खान ने नागरिक मार्शल लॉ लगाया, जबकि जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी 3 नवंबर 2007 को इसी तरह का असंवैधानिक निर्णय लिया था।
विदेशी चिट्ठी पर बोले शहबाज शरीफ
"विदेशी धमकी पत्र" विवाद के बारे में बोलते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि, पाकिस्तान के राजदूत असद मजीद ने 16 मार्च को विदाई रात्रिभोज की मेजबानी की थी और सभी अमेरिकी अधिकारियों को आमंत्रित किया था। यहां तक कि उन लोगों को भी, जिन पर पीएम इमरान खान ने आरोप लगाया था। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि, अपने ट्वीट में, असद मजीद ने अच्छे संबंधों और सहयोग के लिए डोनाल्ड लू को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि, "अगर पत्र 7 मार्च की तारीख का था और इसमें डोनाल्ड लू की संलिप्तता को उजागर किया गया था, तो 16 मार्च को रात्रिभोज के दौरान राजदूत अमेरिकी अधिकारी को क्यों आमंत्रित किया गया था?

पाकिस्तान के लिए काला दिन
वहीं, जेयूआई-एफ नेता मौलाना असद महमूद ने कहा, "कल [3 अप्रैल] पाकिस्तान के इतिहास में सबसे काला दिन था।" उन्होंने कहा कि पीएम इमरान खान संस्थानों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। महमूद ने कहा कि वे [संयुक्त विपक्ष] एक "खतरे के पत्र" की आड़ में लगाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि, इमरान खान ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की विश्वनीयता के बारे में कई बयान दिए हैं, लिहाजा इमरान खान को देश की जनता का विश्वास सुप्रीम कोर्ट से तोड़ने की कोशिश करने के आरोप में जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नेशनल असेंबली (एनए) के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी द्वारा प्रधान मंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने और उसके बाद संसद भंग करने के राष्ट्रपति के फैसले पर विचार कर रही है। रविवार को, पाकिस्तान के शीर्ष अदालत ने स्थिति का स्वत: संज्ञान लिया था और एक संक्षिप्त सुनवाई के बाद एक लिखित आदेश जारी किया था, जिसमें अदालत ने कहा कि वह "जांच करना चाहेगी कि क्या इस तरह की कार्रवाई (अनुच्छेद के आधार पर अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करना) है। 5) संविधान के अनुच्छेद 69 में निहित निष्कासन (अदालत के अधिकार क्षेत्र से हटाना) द्वारा संरक्षित है।"












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