'अब दोस्त देश भी सोचते हैं, कि हमलोग भिखारी हैं', पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ का बड़ा बयान

पाकिस्तान वर्तमान में एक गंभीर आर्थिक संकट और बढ़ती मुद्रास्फीति का सामना कर रहा है, और विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है। देश का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है।

इस्लामाबाद, सितंबर 16: अपनी खराब आर्थिक नीतियों की वजह से वैसे तो पाकिस्तान हमेशा से आर्थिक संकट में फंसा रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान में आर्थिक संकट काफी ज्यादा गहरा गया है और आईएमएफ के बेलऑउट पैकेज से पाकिस्तान को कुछ और महीनों की मोहलत मिल गई है। लेकिन, इन सबके बीच भीषण बाढ़ ने पाकिस्तान को और भी ज्यादा परेशान कर दिया है और इन सबके बीच देश को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि, अब मित्र देशों ने भी हमें भिखारी के तौर पर देखना शुरू कर दिया है।

शहबाज शरीफ ने क्या कहा?

शहबाज शरीफ ने क्या कहा?

बाढ़ प्रभावित पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को देश की विनाशकारी आर्थिक स्थिति को संबोधित किया है और अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, 'मित्र देशों ने पाकिस्तान को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में देखना शुरू कर दिया है, जो हमेशा पैसे मांगता रहता है'। शहबाज शरीफ वकीलों के एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। पाकिस्तानी अखबर द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा कि, "आज जब हम किसी मित्र देश में जाते हैं या फोन करते हैं, तो वे सोचते हैं कि हम भीख मांगने आए हैं।" उन्होंने आगे कहा कि, '75 साल बाद आज पाकिस्तान कहां खड़ा है? यहां तक कि छोटी अर्थव्यवस्थाओं ने भी पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया था और हम पिछले 75 सालों से भीख का कटोरा लेकर भटक रहे हैं'।

इमरान को ठहराया जिम्मेदार

इमरान को ठहराया जिम्मेदार

इसके बाद आगे बोलते हुए शहबाज शरीफ ने आसमान छूती महंगाई के लिए इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि, इमरान खान की पिछली सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ समझौते का उल्लंघन किया, जिससे मौजूदा सरकार को कठिन शर्तों पर सहमत होने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, "आईएमएफ ने सहमति की शर्तों को पूरा नहीं करने पर अपने कार्यक्रम को वापस लेने की धमकी भी दी थी।" उन्होंने कहा कि, जब हमने अप्रैल महीने में सत्ता संभाली, उस वक्त देश आर्थिक तौर पर डिफॉल्टर होने के कगार पर था, लेकिन गठबंधन की सरकार ने,कठिन मेहनत के जरिए देश को डिफॉल्ट होने से बचाया और कुछ हद तक आर्थिक अस्थिरता को दूर किया'। इसके साथ ही शहबाज शरीफ ने अपनी सरकार की तारीफ करते कहा कि, उनकी सरकार देश को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।

भीषण आर्थिक संकट में फंसा है पाकिस्तान

भीषण आर्थिक संकट में फंसा है पाकिस्तान

आपको बता दें कि, पाकिस्तान वर्तमान में एक गंभीर आर्थिक संकट और बढ़ती मुद्रास्फीति का सामना कर रहा है, और विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है। देश का एक तिहाई हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और हर सात में से एक व्यक्ति बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। वहीं, द आइलैंड आनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में बंदरगाह, रेल और भूमि के बुनियादी ढांचे के निर्माण के वित्तपोषण के लिए चीनी वैश्विक परियोजना, चीन के लिए ऋण का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है। जिन लोगों पर चीन का सबसे अधिक विदेशी कर्ज है, उनमें पाकिस्तान 77.3 अरब डॉलर, अंगोला 36.3 अरब डॉलर, इथियोपिया 7.9 अरब डॉलर, केन्या 7.4 अरब डॉलर और श्रीलंका 6.8 अरब डॉलर हैं।

बाढ़ से जीडीपी को भारी नुकसान

बाढ़ से जीडीपी को भारी नुकसान

पाकिस्तान में विनाशकारी मानसूनी बारिश और बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है और यूक्रेन युद्ध के बाद पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है। शनिवार को पाकिस्तान सरकार की रिपोर्ट के मुताबितक, बाढ़, यूक्रेन युद्ध और अन्य कारकों की वजह ले पाकिस्तान को वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए अपनी जीडीपी विकास दर को पांच प्रतिशत से घटाकर तीन प्रतिशत करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। पाकिस्तान के नेशनल फ्लड रिस्पांस एंड कॉर्डिनेशन सेंटर (एनएफआरसीसी) के अध्यक्ष मेजर जनरल जफर इकबाल ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के लिए संयुक्त ब्रीफिंग के दौरान कहा कि, कम से कम एक तिहाई पाकिस्तान जलमग्न हो गया है और भीषण बाढ़ की वजह से पाकिस्तान को कम से कम 30 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

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