फ्रांस को दुश्मन मानने वाला पाकिस्तान क्यों झुक गया? इमरान करते थे नफरत, शहबाज ने बोले प्यारे-प्यारे बोल

फ्रांस में 2020 में नवंबर के महीने में एक टीचर पर क्लासरूम में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने का आरोप लगा था, जिसके बाद पाकिस्तान में बवाल मच गया था।

इस्लामाबाद, सितंबर 21: पिछले साल फ्रांस के नाम पर पाकिस्तान में भीषण विद्रोह हो गया था और फ्रांसीसी राजदूत को देश से बाहर निकालने के नाम पर पाकिस्तान के कई शहर जल उठे थे। लेकिन, एक साल के भीतर ही पाकिस्तान फ्रांस के सामने घुटनों पर आ गया है और जिस फ्रांस से पाकिस्तानी नफरत करते थे, वही पाकिस्तान के लोग इस साल फ्रांसीसी मदद को दोनों हाथों से स्वीकार कर रहे हैं। पिछले साल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फ्रांस के राष्ट्रपति का फोन नहीं उठाया था, लेकिन इस साल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ फ्रांस के साथ प्यारी-प्यारी बातें कर रहे हैं।

खैरात मिलते ही बदल गये बोल

खैरात मिलते ही बदल गये बोल

दरअसल, विनाशकारी बाढ़ के दौरान फ्रांस ने पाकिस्तान की मदद के लिए काफी मदद भेजे हैं और इतिहास गवाह रहा है, कि खैरात मिलते ही पाकिस्तानी कदमों को चाटने लगते हैं और एक बार फिर से पाकिस्तान यही कर रहा है। मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 77वें सत्र से इतर प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बैठक हुई है और रिपोर्ट है कि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने फ्रांस से एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट से निकलने के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति से गुहार लगाई है। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबित, मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया, वहीं जलवायु परिवर्तन प्रेरित बाढ़ के बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को एक स्थायी स्तर पर ठीक करने और पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के बारे में बात की गई।

वित्तीय मदद जुटाने में मदद करेगा फ्रांस

वित्तीय मदद जुटाने में मदद करेगा फ्रांस

जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया है, कि वित्तीय मदद जुटाने के लिए फ्रांस पाकिस्तान की मदद करेगा। इसके साथ ही इस साल के अंत में फ्रांस इंटरनेशनल फाइनेंस पार्टनर्स के साथ एक सम्मेलन का आयोजन करेगा, जिसका मकसद पाकिस्तान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और पुनर्निर्माण में योगदान देना होगा। इसके साथ ही, फ्रांस ने पाकिस्तान से वादा किया है, कि वो पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भी वित्तपोषण करेगा। यानि, फ्रांस पाकिस्तान को पैसे देगा। फ्रांस से मदद का आश्वासन मिलने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फ्रांस को पाकिस्तान के विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण साथी करार दे दिया। (पिछले साल प्रदर्शन की तस्वीर)

खैरात मिलते ही बदल गये बोल

खैरात मिलते ही बदल गये बोल

शहबाज शरीफ ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कहा कि, पाकिस्तान के लिए फ्रांस का काफी अहम महत्व है और फ्रांस ने पाकिस्तान में आईटी, कृषि, रक्षा और सुरक्षा और व्यापार में निवेश करने की बात कही है और फ्रांस के साथ पाकिस्तान अपने रिश्तों को मजबूत करेगा। आपको बता दें कि, शहबाज शरीफ एक तरफ फ्रांस के साथ रिश्तों को मजबूत करने की बात कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ इसी पाकिस्तान में फ्रांसीसी राष्ट्रपति का सिर कलम तक करने की मांग की गई और पाकिस्तानी संसद के अंदर फ्रांस के खिलाफ भारी भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तान के गुस्से की वजह फ्रांस में एक मीडिया संस्थान में बनाया गया पैगंबर मोहम्मद का विवादित कार्टून है, जिसको लेकर पाकिस्तानी मुस्लिम कट्टरपंथियों ने फ्रांस के साथ किसी भी तरह के संबंध रखने का जोरदार विरोध किया था, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं, कि क्या खैरात मिलने के बाद पाकिस्तान का गुस्सा शांत हो गया और क्या पाकिस्तानियों को पैसे दे दिए जाएं, तो वो किसी भी बात का सौदा करने के लिए तैयार हो जाएंगे? (पिछले साल प्रदर्शन की तस्वीर)

पाकिस्तान में हुआ था हिंसक प्रदर्शन

पाकिस्तान में हुआ था हिंसक प्रदर्शन

पिछले साल अप्रैल महीने में पाकिस्तान में फ्रांस के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए गये थे। पाकिस्तान में कट्टरपंथी समूह फ्रांस के खिलाफ जहर उगल रहे थे और पाकिस्तान में ईशनिंदा को लेकर कट्टरपंथी रुख के चलते चर्चा में आई तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के समर्थक फ्रांस के खिलाफ सड़कों पर खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे थे। खुद को इस्लाम का रक्षक बताने वाली तहरीक ए लब्बैक समर्थकों की मांग थी, कि पाकिस्तान सरकार फ्रांस से सभी तरह के रिश्ते खत्म करे। जिसके बाद फ्रांस सरकार को पाकिस्तान में रहने वाले फ्रांसीसी नागरिकों और कंपनियों को लेकर खतरे का अलर्ट जारी करना पड़ा था। पाकिस्तान के अंदर फ्रांसीसी सामानों का बहिष्कार कर दिया गया था और इमरान खान की सरकार ने देश की संसद में फ्रांस के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने के लिए समझौता तक किया था। (टीएलपी नेता)

फ्रांस के नाम पर क्यों जला था पाकिस्तान?

फ्रांस के नाम पर क्यों जला था पाकिस्तान?

दरअसल, पाकिस्तान में ये बवाल मचा था फ्रांस के नाम पर। फ्रांस में 2020 में नवंबर के महीने में एक टीचर पर क्लासरूम में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने का आरोप लगा था। जिसके बाद टीचर की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। हालांकि, बाद में आरोप लगाने वाली छात्रा अपने बयान से मुकर गई थी और खुलासा हुआ था कि जिस दिन उसने टीचर पर कार्टून दिखाने का आरोप लगाया था, उस दिन वो खुद स्कूल में नहीं थी। लेकिन, पाकिस्तान में इस घटना पर अब बवाल मच गया था। फ्रांस के राष्ट्रपति ने क्लासरूम में कार्टून दिखाए जाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता करार दिया था और टीचर की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की थी। इसके बाद से ही पाकिस्तान में फ्रांस को लेकर भारी नाराजगी थी और फ्रांस के कट्टरपंथी नेता और मौलाना पाकिस्तान सरकार पर फ्रांस से हर रिश्ते खत्म करने की मांग कर रहे थे, लेकिन एक साल बाद ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री फ्रांस को मदद देने के लिए शुक्रिया कह रहे हैं और आगे और मदद पाने के लिए अपनी जीभ लपलपा रहे हैं।

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