नागरिकता कानून पर इमरान खान की गीदड़ भभकी, भारत को दी परमाणु युद्ध की धमकी
नई दिल्ली। भारत में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, लोग इस कानून के खिलाफ सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन इस बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर से नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर भारत को गीदड़ भभकी दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी है। मंगलवार को ग्लोबल रिफ्यूजी फोरम में बोलते हुए इमरान खान ने कहा कि मैं पूरी दुनिया को बताना चाहता हूं कि उन्हें दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी शरणार्थी समस्या के बारे में अवगत होना चाहिए।
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बड़ी शरणार्थी समस्या खड़ी होगी
नागरिकता संशोधन एक्ट का हवाला देते हुए इमरान खान ने कहा कि हम पाकिस्तानी सिर्फ इस बात को लेकर चिंतित नहीं हैं कि इस एक्ट के बाद बड़ी शरणार्थी समस्या खड़ी होगी बल्कि इसकी वजह से टकराव हो सकता है। दो परमाणु संपन्न देशों के बीच इसके चलते टकराव हो सकता है। इस दौरान इमरान खान ने जम्मू कश्मीर से खत्म किए गए आर्टिकल 370 का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि दुनिया के लोगों को कश्मीर के हालात को देखना चाहिए। इमरान खान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की ओर से कई बार यह साफ किया जा चुका है कि आर्टिकल 370 भारत का अंदरूनी मामला है।

कश्मीर राग भी अलापा
इमरान खान ने कहा कि हम अपने पहले के अनुभव से जानते हैं कि बीमारी से बेहतर है उसके पहले परहेज करना। अगर दुनिया इस समय कदम उठाती है और भारत सरकार पर दबाव डालती है कि वह गैर कानूनी गतिविधि को रोके तो हम आने वाली बड़ी समस्या का टाल सकते हैं। खान ने कहा कि भारत से लाखों मुसलमान भाग जाएंगे क्योंकि कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब इमरान खान ने कश्मीर का राग अलापा है, इससे पहले भी वह यूएन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का राग अलाप चुके हैं।

पहले भी कर चुके हैं विरोध
बता दें कि इससे पहले नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ इमरान खान ने अपनी भड़ास निकाली थी। इमरान खान ने ट्वीट करके कहा था कि इमरान ने ट्वीट किया, 'भारत की लोकसभा द्वारा जो नागरिकता बिल पास किया गया है, हम उसकी खिलाफत करते हैं, ये कानून पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय समझौते और मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन करता है। ये आरएसएस के हिंदू राष्ट्र का एजेंडा है जिसे मोदी सरकार आगे बढ़ा रही है।' इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता का प्रावधान है।












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