रमजान में पाकिस्तानियों की महंगाई से निकली जान, 500 रुपये दर्जन केला, 1600 में अंगूर...सारे फल हुए महंगे
पाकिस्तान को अगर जून महीने तक आईएमएफ से लोन नहीं मिलता है, तो वो आधिकारिक तौर पर डिफॉल्ट कर जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि देश डिफॉल्ट कर चुका है, सिर्फ ऐलान होना बाकी है।

Pakistan Inflation: पाकिस्तान की स्थिति हर बीतते दिनों के साथ बदतर होती जा रही है और देश का सामाजिक-आर्थिक संकट हर बीतते दिन के साथ गहराता जा रहा है। देश उच्च मुद्रास्फीति से जूझ रहा है और कमोडिटी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। इस्लामिक राष्ट्र विशेष रूप से फल और आटे की ऊंची कीमतों से बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है, जिसके कारण कुछ शहरों में भगदड़ भी मची है, जिसमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान में केले की कीमतों में इतना इजाफा हो गया है, कि लोगों के लिए रोजा का महीना संकट के समान हो गया है।
पाकिस्तान में भीषण महंगाई
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में रमजान के महीने में केले की कीमत 500 रुपये दर्जन हो गई है। पिछले एक हफ्ते में केले की कीमतों में 11.07 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लिहाजा रोजा खोलने के लिए लोगों के पास विकल्प सीमित हो गये हैं। केला एक वक्त गरीबों का फल माना जाता था, लेकिन पाकिस्तान में केला अमीरों का फल हो गया है। संवेदी मूल्य सूचकांक (एसपीआई) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, कि 22 मार्च को समाप्त सप्ताह में पाकिस्तान में महंगाई दर 46.65 प्रतिशत हो गई है, जबकि पिछले सप्ताह यह 45.64 प्रतिशत थी। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (पीबीएस) के आंकड़ों के मुताबिक, समा टीवी ने बताया है, कि सप्ताह-दर-सप्ताह आधार पर, टमाटर, आलू और गेहूं के आटे की कीमत में पिछले हफ्ते के मुकाबले इस हफ्त 1.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
फलों को सिर्फ आंख से देखते लोग!
22 मार्च को समाप्त हुए चालू सप्ताह के लिए एसपीआई में 1.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बड़ी वृद्धि देखी गई है। पाकिस्तान में टमाटर (71.77 प्रतिशत), गेहूं का आटा (42.32 प्रतिशत), आलू (11.47 प्रतिशत), केला (11.07 प्रतिशत), चाय लिपटन (7.34 प्रतिशत), दाल मैश (1.57 प्रतिशत), चाय तैयार (1.32 प्रतिशत) और गुड़ (1.03 प्रतिशत), और गैर-खाद्य पदार्थ जैसे जॉर्जेट (2.11 प्रतिशत), लॉन (1.77 प्रतिशत) और लंबा कपड़ा (1.58 प्रतिशत) की वृद्धि दर्ज की गई है। दूसरी ओर, चिकन (8.14 प्रतिशत), मिर्च पाउडर (2.31 प्रतिशत), एलपीजी (1.31 प्रतिशत), सरसों का तेल और लहसुन (1.19 प्रतिशत), दाल चना और प्याज की कीमतों (1.06 प्रतिशत) की गिरावट देखी गई। पाकिस्तान में अंगूर 1600 रुपये किलो बिक रहा है, तो खजूर, जिसे रमजान के महीने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, वो 1000 रुपये किलो बिक रहा है। लिहाजा, दुकानदारों का कहना है, कि पिछले साल के मुकाबले बिक्री काफी ज्यादा गिर गई है और बाजार में काफी कम लोग नजर आते हैं।
खाली नजर आ रहे हैं बाजार
अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हालात ये हो गये हैं, कि पाकिस्तान में सारे के सारे फल और सब्जियां काफी ज्यादा महंगे हो गये हैं। कराची के व्यापारी मुहम्मद इशाक ने अरब न्यूज से बात करते हुए कहा, कि पिछले साल उन्होंने 350 रुपये किलो खजूर बेचा था, जो इस साल 1000 रुपये किलो बिक रहा है। उन्होंने कहा, कि दुकानों में लोग फल खरीदने के लिए नहीं आते हैं। लिहाजा, फलों की बिक्री बुरी तरह से कम हो गई है। दुकानदारों का कहना है, कि बाढ़ की वजह से पाकिस्तान में इस साल फसल बर्बाद हुए हैं, जिसका गंभीर असर देखा जा रहा है। वहीं, डॉलर बचाने के लिए सरकार ने विदेशों से सामान की खरीददारी पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिससे डिमांड तो काफी है, लेकिन सप्लाई कम हो गई है, लिहाजा फलों और सब्जियों की कीमतों में आग लगी हुई है। एक ट्विटर यूजर ने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा है, कि "पाकिस्तानियों के लिए घर पर कृत्रिम फल रखने का सही समय है।" जबकि दूसरे ने चुटकी लेते हुए लिखा है, कि "नए पाकिस्तान में आपका स्वागत है।" एक तीसरे यूजर ने कहा है, कि "केले का बहिष्कार करो।"
आटे के लिए हाथापाई की नौबत
डॉन के मुताबिक, हाल ही में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आटा वितरण केंद्रों के पास दो लोगों की मौत हो गई है। देश भर में खाद्य वितरण स्थलों पर भूखे लोगों की भारी संख्या देखी जा रही है और आटा खरीदने के लिए लोगों के बीच लड़ाई होना काफी आम बात हो गई है। कई जगहों पर दुकानों को लूटने की भी खबर आई है। लेकिन, शहबाज सरकार के पास लोगों को राहत देने का कोई रास्ता नहीं है। पाकिस्तान में इस वक्त आटे की कीमत 3,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति पैकेट तक पहुंच गई है। वहीं,आईएमएफ से पाकिस्तान को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। आईएमएफ ने पाकिस्तान को अभी तक 1.1 अरब डॉलर का लोन पारित नहीं किया है। पाकिस्तान इससे पहले आईएमएफ से 22 बार राहत पैकेज ले चुका है और इस बार वो 23वीं बार लोन लोन लेने की कोशिश में है, लेकिन आईएमएफ ने साफ कर दिया है, कि जब तक पाकिस्तान एक एक शर्त को पूरा नहीं करता है, उसे लोन नहीं मिलेगी।












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