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क्या भारत में आएगा POK? पाकिस्तान के कब्ज़े वाली कश्मीर में सेना और पुलिस को मारकर भगा रहे वहा‍ं के लोग

PoK News: भारत में लोकसभा चुनाव के लिए आज चौथे चरण का मतदान हो रहा है, जबकि पिछले एक हफ्ते से पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) धधक रहा है। भारतीय चुनाव में पीओके का मुद्दा बार बार उठा है और भारत ने हमेशा से कहा है, कि पीओके भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान को पीओके खाली करना चाहिए।

वहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के निवासियों ने क्षेत्र की खराब आर्थिक स्थिति और विकास की कमी से परेशान होकर पिछले सप्ताह से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया है। पिछले एक हफ्ते से पीओके के कई इलाके जल रहे हैं।

Pakistan-occupied Kashmir

पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह

लोगों का बगावत तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तान पुलिस ने जम्मू कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बैनर तले हो रहे विरोध प्रदर्शन को कुचलने की कोशिश की। ये संगठन पीओके में जल विद्युत उत्पादन लागत के अनुसार बिजली, रियायती गेहूं का आटा और सब्सिडी की मांग कर रही थी। इसका कहना था, कि पाकिस्तान सरकार फौरन कुलीन वर्ग के विशेषाधिकारों का अंत करे।

जब पुलिस कर्मियों ने कोटली और पुंछ जिलों के रास्ते मुजफ्फराबाद के लिए निकाली गई एक रैली को रोकने की कोशिश की, तो स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों के बीच झड़प शुरू हो गई। सुरक्षा बलों और आंदोलनकारी प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों में एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं, जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं।

CNN-News18 की रिपोर्ट में घटनाक्रम से परिचित PoK के एक अधिकारी ने कहा है, कि "(यह) विरोध (पाकिस्तान) संघीय सरकार की खराब आर्थिक स्थिति और अज्ञानता के कारण है। वे पिछले 70 वर्षों से अज्ञानता के शिकार हैं।"

अधिकारी ने कहा, कि "पीढ़ियों से उन्हें आर्थिक रूप से फलने-फुलने की इजाजत नहीं दी गई है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान के राजनीतिक एजेंडे को निपटाने के लिए उनका उपयोग किया जाता है।"

अधिकारी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला, कि यह केवल अत्यधिक बिजली बिल, बढ़ते बिल, उच्च कर और बेरोजगारी नहीं है, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुआ है, बल्कि यह पाकिस्तान पुलिस की क्रूरता और पाकिस्तान सेना द्वारा किए गए अत्याचारों के खिलाफ भी बगावत है।

पाकिस्तान विरोधी भावना इस हद तक बढ़ गई है, कि रावलकोट में पोस्टर देखे गए जहां कुछ नागरिकों ने भारत के साथ विलय की मांग की है। घटनाक्रम से परिचित सरकारी अधिकारियों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया है, कि ये नए घटनाक्रम नहीं हैं और ये विरोध प्रदर्शन पहले भी हो चुके हैं। हालांकि, उन्होंने कहा, कि अब सोशल मीडिया की वजह से दुनिया को पीओके की स्थिति के बारे में पता चलता है।

अधिकारी ने कहा, कि "एक तरफ, केंद्र शासित प्रदेश कश्मीर ज्यादा रोजगार (अवसरों) और पर्यटन के साथ नई दुनिया की शुरुआत कर रहा है, जबकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जीवन जीने के लिए आवश्यक बुनियादी आवश्यकताओं का भारी अभाव है।"

उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का उपयोग आतंक केंद्रों और (आतंकवादियों के) लॉन्चिंग पैड के लिए किया जाता है, लेकिन (इसके निवासियों को) कुछ भी नहीं दिया जाता है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान हमें पाक अधिकृत कश्मीर लौटा दे।"

पाकिस्तानी पुलिस की बर्बरता

न्यूज-18 ने पीओके के अधिकारियों के हवाले से कहा है, कि पाकिस्तानी पुलिस के बर्बर हमले में दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल में करने के लिए पाकिस्तानी पुलिस के साथ साथ रेंजर्स और फ्रंटियर फोर्स के जवानों को पीओके भेजा गया है।

जबकि, प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प में एक एएसआई की मौत हो गई है। जबकि, आंसू गैस के गोले चलने के बाद गुस्साए लोगों ने असिस्टेंट कमिश्नर की भी पिटाई कर दी है।

भारत में चल रहे चुनाव में पीओके का मुद्दा बार बार उठा है और खासकर पीओके में बगावत की तस्वीरें कश्मीरी नेताओं के मुंह पर तमाचा जैसा है, जो भारतीय कश्मीर में अशांति की बात करते हैं। पिछले दिनों ही फारूक अब्दुल्ला ने कहा है, कि अगर पाकिस्तान से बात नहीं की गई, तो कश्मीर का हाल गाजा जैसा हो सकता है, लेकिन पीओके में बगावत की तस्वीरों को फारूक अब्दुल्ला को देखनी चाहिए, जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लोगों को तरसना पड़ रहा है।

फारूक अब्दुल्ला शायद भूल गये हैं, या फिर वो देखना नहीं चाहते, कि भारत अब बदल गया है। भारत में नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कश्मीर का जैसा विकास किया है, उसे देखकर पीओके के लोग पाकिस्तान से पूछ रहे हैं, कि पाकिस्तान का सालों तक समर्थन कर उन्हें क्या हासिल हुआ है? और यही वजह है, कि पीओके में हो रहे प्रदर्शन में कई जगहों पर भारतीय झंडे लहराने की भी रिपोर्ट है।

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