PAK का नया तमाशा! ट्रंप को Nobel के लिए किया नॉमिनेट, भारत-पाक संघर्ष की आड़ में खुद को बताया 'शांति दूत'
पाकिस्तान की कूटनीति का नया तमाशा सामने आया है। अपने घर में आतंकी हमलों और सीमा पार की नापाक हरकतों से दुनिया भर में बदनाम PAK ने अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को 2026 नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए नामित किया है।
ट्रंप को यह सम्मान देने की वजह बताई गई- भारत-पाक हालिया संघर्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति की कूटनीतिक भूमिका! हद तो तब हो गई जब इस नॉमिनेशन की घोषणा खुद पाक सरकार ने शान से X (पूर्व ट्विटर) पर की और खुद को शांति की मिसाल दिखाने की कोशिश की।

कौन सा संघर्ष और कौन सी शांति?
दरअसल, मई की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 निर्दोष मारे गए) के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान नियंत्रित इलाकों में आतंकियों के ठिकानों पर जबरदस्त कार्रवाई की। इस पर पाकिस्तान बौखलाया और चार दिन तक सीमा पर भारी गोलाबारी हुई।
भारत ने पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया और 10 मई को संघर्षविराम की बात पाकिस्तान की ओर से उठाई गई। मगर पाक सरकार ने अब ट्रंप की 'डिप्लोमैसी' का झूठा सेहरा बांधते हुए उन्हें नोबेल के लिए नॉमिनेट कर डाला।
आर्मी चीफ से लेकर व्हाइट हाउस तक नाटक
नॉमिनेशन का ड्रामा तब और मजेदार हो गया जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर (Asim Munir) खुद ट्रंप से व्हाइट हाउस में मिले। पहले से तय लंच मीटिंग में वो ट्रंप से नोबेल की सिफारिश की बात कह चुके थे। पाकिस्तानी मीडिया और अधिकारी इस मीटिंग को भी 'डिप्लोमैटिक विक्ट्री' बताने में जुटे हैं, जबकि सच ये है कि पाकिस्तान ने खुद ही संघर्ष को हवा दी थी और अब शांति का नाटक रच रहा है।
पाकिस्तान सरकार ने अपने ट्वीट में क्या-क्या कहा?
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि,' पाकिस्तान सरकार ने 2026 नोबेल शांति पुरस्कार के लिए औपचारिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप को सिफारिश करने का फैसला किया है। यह सिफारिश हालिया भारत-पाकिस्तान संकट के दौरान उनकी निर्णायक कूटनीतिक पहल और महत्वपूर्ण नेतृत्व के सम्मान में की गई है।'
भारत पर आक्रामकता का आरोप
पाक सरकार ने ट्वीट में आगे लिखा कि, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत की अकारण और अवैध आक्रामकता को देखा, जो पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन था। इस आक्रमण में निर्दोष लोगों की दुखद मौत हुई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे।'
ऑपरेशन बुनयानुम मारसूश का दावा
'पाकिस्तान ने अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए 'ऑपरेशन बुनयानुम मारसूश' शुरू किया। यह कार्रवाई पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा और प्रतिरोध की बहाली के लिए की गई, जिसमें नागरिकों को नुकसान पहुंचाने से बचा गया।'
ट्रंप की कूटनीतिक भूमिका की तारीफ
'क्षेत्रीय तनाव के चरम पर ट्रंप ने जबरदस्त रणनीतिक सूझबूझ और शानदार नेतृत्व दिखाया। इस दौरान उन्होंने इस्लामाबाद और नई दिल्ली से मजबूत कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा, जिससे तेजी से बिगड़ती स्थिति को संभाला गया और संघर्षविराम संभव हो पाया। इससे दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच बड़े संघर्ष को रोका जा सका, जिससे लाखों लोगों की जान बची।'
मिडल ईस्ट में शांति प्रयासों की उम्मीद
पाकिस्तान ने कहा कि ट्रंप का नेतृत्व उनके व्यावहारिक कूटनीति और प्रभावी शांति निर्माण की विरासत को दर्शाता है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि उनके प्रयास मिडल ईस्ट समेत वैश्विक स्थिरता में योगदान करते रहेंगे, खासकर गाजा और ईरान के मौजूदा संकट के संदर्भ में।
नोबेल की सियासत और पाकिस्तान का चेहरा
ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने शांति की आड़ में अपनी साख बचाने की कोशिश की हो। पहले आतंकी भेजना और जब जवाब मिले तो शांति की दुहाई देना- पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है। ट्रंप को नोबेल दिलाने की ये चाल भी पाकिस्तान की अपनी कूटनीतिक विफलताओं को ढकने की कोशिश भर नजर आती है।
ट्रंप बोले- कुछ भी कर लूं, नोबेल नहीं मिलेगा!
पाकिस्तान की ओर से नोबेल शांति पुरस्कार की सिफारिश पर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपनी खास अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, 'मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैंने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मिलकर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा गणराज्य के बीच एक शानदार संधि कराई है। यह युद्ध, जो दशकों से चला आ रहा था, बेहद हिंसक रक्तपात और मौत के लिए कुख्यात था, और अधिकतर अन्य युद्धों से भी ज्यादा भयावह था।'
उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि, 'रवांडा और कांगो के प्रतिनिधि सोमवार को वॉशिंगटन आएंगे और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। यह अफ्रीका के लिए एक महान दिन है और सच कहूं तो पूरी दुनिया के लिए एक महान दिन है! मुझे इसके लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने के लिए भी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे सर्बिया और कोसोवो के बीच युद्ध खत्म करने के लिए भी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे मिस्र और इथियोपिया के बीच शांति बनाए रखने के लिए भी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा (एक विशाल इथियोपियाई बांध, जिसे अमेरिका ने मूर्खता से फंड किया था, नाइल नदी में पानी का बहाव काफी घटा देता है), और मुझे मिडल ईस्ट में अब्राहम समझौते कराने के लिए भी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा।'
ट्रंप ने आगे कहा कि, 'जबकि अगर सब ठीक रहा तो इस पर और कई देश हस्ताक्षर करेंगे और यह मिडल ईस्ट को 'युगों' के बाद एकजुट करेगा! नहीं, मुझे कोई नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा चाहे मैं कुछ भी कर लूं, चाहे वो रूस-यूक्रेन हो या इजरायल-ईरान, चाहे जो भी नतीजा हो, लेकिन लोग जानते हैं और मेरे लिए यही सबसे बड़ा सम्मान है!'












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