पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी ले रही है आखिरी सांस, PTI में अकेले पड़े 'कप्तान', अक्टूबर से पहले गेम ओवर
इमरान खान की पार्टी के तमाम सीनियर लीडर्स एक के बाद एक इस्तीफा दे रहे हैं और अब इमरान खान को बहुत जल्द नजरबंद कर कर दिया जाएगा।

Imran Khan News: इमरान खान ने एक इंटरव्यू के दौरान कबूल किया है, कि उनके पास अब किसी के भी फोन नहीं आ रहे हैं और अब वो अपने घर में बिल्कुल अकेले हो गये हैं।
पाकिस्तानी सेना से खुलेआम पंगा लेने वाले इमरान खान का भविष्य कैसा होगा, अब ये एक अनिश्चित सवाल बन गया है, क्योंकि उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है।
खबरों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चार और नेताओं ने 9 मई को हुई घटनाओं को लेकर इमरान खान की पार्टी से अलग होने की घोषणा की है।
जियो न्यूज के मुताबिक, इमरान खान के पूर्व विशेष सहायक तारिक महमूद अल हसन, प्रांतीय असेंबली के पूर्व सदस्य (एमपीए) मलिक खुर्रम अली खान और नेशनल असेंबली के पूर्व सदस्य (एमएनए) जमशेद थॉमस ने रविवार को 9 मई को विरोध प्रदर्शन की निंदा की और पार्टी से बाहर निकलने की घोषणा कर दी।
जियो न्यूज ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में शिरीन मजारी, फवाद चौधरी, इमरान इस्माइल, आमिर महमूद कियानी, अली जैदी, मलीका बुखारी सहित कई पार्टी नेताओं ने पीटीआई छोड़ दी है। ये वो नाम हैं, जो इमरान खान की पार्टी के कोर ग्रुप का हिस्सा थे और जब इमरान खान प्रधानमंत्री थे, उस वक्त ये नाम, उनकी मंत्रिमंडल में शामिल होते थे।
इन नेताओं के अलावा शाह महमूद कुरैशी इकलौते ऐसे बड़े नाम हैं, जो इमरान खान के साथ खड़े हैं, जबकि इमरान सरकार में आंतरिक मंत्री रहे शेख रशीद को लेकर कहा जा रहा है, कि उन्होंने सेना को बता दिया है, कि वो राजनीति से अलग हो चुके हैं, लिहाजा उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है। शेख रशीद के शहबाज शरीफ से भी अच्छे संबंध रहे हैं, लिहाजा अब वो अपने घर से शांत होकर तमाशा देख रहे हैं।
इमरान खान क्या कर रहे हैं?
पार्टी बचाने के लिए अब अकेले पड़े इमरान खान हाथ पांव मार रहे हैं। उनके पास कोई सलाहकार नहीं है और बताया जा रहा है, कि बहुत जल्द उन्हें नजरबंद कर लिया जाएगा, जिसके बाद उनके घर का फोन कनेक्शन, इंटरनेट कनेक्शन भी हटा दिया जाएगा। उनसे मोबाइल फोन छीन लिया जाएगा, यानि इमरान खान के बाहरी दुनिया के सारे संपर्क काट दिए जाएंगे।
लेकिन, उससे पहले इमरान खान अपनी पार्टी बचाने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से 9 मई को हुए हिंसक प्रदर्शन की जांच के लिए कमेटी बनाने की मांग की है। उन्होंने सरकार को भी बातचीत का ऑफर दिया था, लेकिन शहबाज सरकार ने उनके बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
यानि, शहबाज शरीफ और उनका गठबंधन, इमरान खान से किसी भी तरह की बातचीत करने के मूड में नहीं है।
वहीं, इस हफ्ते की शुरुआत में, पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान ने सिंध को छोड़कर पूरे देश में अनुच्छेद 245 लागू करने और 9 मई के दंगों के मद्देनजर पार्टी कार्यकर्ताओं पर चल रही कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक संवैधानिक याचिका दायर की है।
इस याचिका में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और नवाज शरीफ, मरियम नवाज, आसिफ अली जरदारी, बिलावल भुट्टो जरदारी और मौलाना फजलुर रहमान सहित सत्तारूढ़ गठबंधन के अन्य नेताओं को शीर्ष अदालत में प्रतिवादी बनाया गया है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स इमरान खान की इस कोशिश को 'दिया बुझने से पहले की फड़फड़ाहट' बता रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि सेना ने इमरान खान और उनकी पार्टी को कुचल दिया है।
कुचल दी गई इमरान खान की पार्टी?
इमरान खान ने सीएनएन को दिए गये एक इंटरव्यू में दावा किया, कि वो जिस किसी को टिकट देंगे, वही चुनाव जीत जाएगा।
वहीं, इमरान खान ने एक इंटरव्यू में पार्टी से जाने वाले नेताओं को सशर्त वापसी करने के लिए भी कहा, लेकिन कोई भी नेता वापस नहीं लौटा। दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना ने इमरान खान और उनकी पार्टी को कुचलने के लिए पूरी ताकत लगा दी है।
डॉन के मुताबिक, रावलपिंडी में सैन्य ठिकानों पर हुए हमले को लेकर इमरान खान के 500 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के खिलाफ आर्मी एक्ट चलाने को मंजूरी दे दी गई है। वहीं, पूरी संभावना है, कि आज नहीं तो कल, इमरान खान भी आर्मी एक्ट के फंदे में कसे जाएंगे और या तो उन्हें उम्रकैद या फिर फांसी की सजा दी जाएगी। दोनों ही सूरत में इमरान खान का खेल खत्म ही माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है, कि शहबाज शरीफ और सेना की अक्टूबर में चुनाव कराने की कोई मंशा नहीं है। क्योंकि, अक्टूबर में अगर चुनाव होते, तो अब सिर्फ 4 महीने बचे हैं और सरकार को चुनावी तैयारी काफी पहले शुरू कर देनी चाहिए थे।
पाकिस्तान में ना तो नये वोटर कार्ड्स को लेकर काम हुए हैं और ना ही परसीमन के काम किए गये हैं, लिहाजा अक्टूबर में चुनाव कराए जाने की कोई संभावना नहीं है और इन चार महीनों में इमरान खान और उनकी पार्टी का अस्तित्व मिटाना, पाकिस्तान सेना के लिए बाएं हाथ का खेल साबित होगा।
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हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इमरान खान के पास अभी भी लोकप्रियता बरकरार है और देश की जनता भी जान रही है, कि उनके साथ क्या हो रहा है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए पहली शर्त ये है, कि इमरान खान और उनकी पार्टी का अस्तित्व में होना और अगले चार महीने में उनका अस्तित्व बच पाएगा, इसकी संभावना नहीं के बराबर है।












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