हज के लिए पैदल निकले शिहाब चित्तूर को पाक ने नहीं दिया था वीजा, सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा पाकिस्तानी शख्स
शिहाब चोत्तुर जून 2023 में हज पहुंचने के लिए केरल स्थित अपने घर से रवाना हुआ है। 8,640 किलोमीटर की लंबी दूरी को वह पैदल ही पूरा करने वाला है। इस यात्रा के दौरान शिहाब को पाकिस्तान, ईरान, इराक और कुवैत से मक्का जाएगा।

Image: FB/ Shihab Chottur
पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में लाहौर हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें एक भारतीय नागरिक के लिए ट्रांजिट वीजा का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। 29 वर्षीय भारतीय नागरिक शिहाब चोत्तुर हज यात्रा के लिए पैदल ही सऊदी अरब मक्का जाना चाहता है। इसके लिए शिहाब को पाकिस्तान में प्रवेश करना होगा लेकिन पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा कारणों से इसकी अनुमति नहीं दी थी।

याचिकाकर्ता ने दिया तर्क
याचिकाकर्ता और लाहौर के निवासी सरवर ताज ने अपनी याचिका में, जिसकी एक प्रति पीटीआई के पास उपलब्ध है, तर्क दिया कि जिस तरह पाकिस्तान सरकार बाबा गुरु नानक देव की जयंती के दौरान कई भारतीय सिखों को वीजा जारी करती है या फिर अन्य अवसरों पर हिंदुओं को देश में उनके पवित्र स्थानों की यात्रा करने के लिए, अनुमति देती है, पाकिस्तान सरकार को भी इस मुस्लिम व्यक्ति को उसकी धार्मिक यात्रा के लिए वीजा देना चाहिए।

शिहाब चोत्तुर को वाघा सीमा पर रोका
शिहाब चोत्तुर जून 2023 में हज पहुंचने के लिए केरल स्थित अपने घर से रवाना हुआ है। 8,640 किलोमीटर की लंबी दूरी को वह पैदल ही पूरा करने वाला है। इस यात्रा के दौरान शिहाब को पाकिस्तान, ईरान, इराक और कुवैत से गुजरते हुए सऊदी अरब पहुंचना होगा। शिहाब चित्तूर को पाकिस्तान के आव्रजन अधिकारियों ने अक्टूबर में वाघा सीमा पर रोक दिया था क्योंकि उनके पास वीजा नहीं था।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी
शिहाब ने वाघा सीमा पर आव्रजन अधिकारियों से अनुरोध किया कि वह पैदल ही हज करने जा रहे हैं क्योंकि वह पहले ही 3,000 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं और उन्हें मानवीय आधार पर देश में प्रवेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने शिहाब की यह दलील नहीं मानी और उसे आगे यात्रा करने से रोक दिया।

लाहौर हाईकोर्ट ने खारिज की अपील
पिछले महीने लाहौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शिहाब की ओर से दायर ताज की एक अपील खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था, ‘‘याचिकाकर्ता भारतीय नागरिक से ताल्लुक नहीं रखता है, न ही अदालत का रुख करने के लिए उसके पास पावर ऑफ अटॉर्नी है।'' हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से भारतीय नागरिक शिहाब चित्तूर का पूरा विवरण भी मांगा था जिसे याचिकाकर्ता प्रस्तुत नहीं कर सका।

मानवीय आधार पर वीजा देने की अपील
हालांकि लाहौर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती देते हुए पाकिस्तानी नागरिक सरवर ताज ने कहा कि इस तरह के मामलों को प्यार और स्नेह के आधार पर तय किया जाना चाहिए न कि तर्क या संहिताबद्ध कानून के आधार पर ताकि समानता और निष्पक्ष खेल की धारणाओं को पूरा किया जा सके। सरवर ने कहा कि खंडपीठ का आदेश अवैध मान्यताओं और अनुमानों पर आधारित है।












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