Pakistan Blast: पाकिस्तान बम धमाके का वीडियो आया सामने, जानिए कितना खतरनाक है पूरा क्षेत्र?
Pakistan Blast Video: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रविवार को आतंकवादियों के पूर्व गढ़ में जमीयत उलेमा इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) की एक राजनीतिक रैली में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया, जिसमें कम से कम 44 लोग मारे गए हैं और करीब 200 लोग घायल हो गए हैं।
इस भीषण बम धमाके के कुछ घंटों के बाद, विस्फोट के क्षण को दिखाने वाले कई वीडियो ऑनलाइन सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें देखा जा रहा है, कि बम धमाका कितना खतरनाक था। वीडियो में देखा जा रहा है, कि सभा में संबोधन चल रहा था और उसी वक्त जोरदार धमाका होता है।

बम धमाके का वीडियो वायरल
इस खबर के साथ हम कुछ वीडियो अटैच करेंगे, जो काफी खतरनाक है और वो दृश्य कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है।
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एक वीडियो में दिख रहा है, कि सभा के अंदर नारे लगाए जा रहे हैं और एक शख्स पीछे से वीडियो बना रहा होता है। अचानक बीच सभा में जोरदार धमाका होता है।
वहीं, एक अन्य वीडियो में, विस्फोट मंच के करीब हुआ दिखाई पड़ता है, जहां पार्टी के कई वरिष्ठ नेता बैठे थे और उनमें से एक रैली को संबोधित कर रहा था।
इस विस्फोट में जेयूआई-एफ पार्टी को निशाना बनाया गया था, जो एक प्रभावशाली तेजतर्रार मौलवी के नेतृत्व में चलाई जा रही पार्टी है, जिसने केन्द्र में शहबाज शरीफ की सरकार को समर्थन दिया हुआ है। इस क्षेत्र में जेयूआई-एफ पार्टी का बड़ा जनाधार है और इस बैठक में शामिल होने के लिए इसके सैकड़ों समर्थक खार शहर आए थे।
समाचार एजेंसी एएफपी ने पीड़ितों की मदद करने की कोशिश करने वाले अब्दुल्ला खान के हवाले से कहा, कि "तम्बू एक तरफ से ढह गया था, जिससे भागने की कोशिश कर रहे लोग फंस गए थे।"
कितना खतरनाक है ये पूरा क्षेत्र?
जिस बाजूर जिला में ये भीषण आत्मघाती बम धमाका हुआ है, वो पूरा क्षेत्र एक वक्त पाकिस्तान तालिबान, जिसका नाम तहरीक-ए-तालिबान है और जिसे शॉर्ट फॉर्म में टीटीपी कहा जाता है, उसका गढ़ हुआ करता था।
ये बात उस समय की है, जब अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार थी और उस वक्त आतंकियों के लिए अफगानिस्तान-पकिस्तान की सीमा के अंदर आना-जाना आसान नहीं था और उस वक्त, अशरफ गनी की सरकार ने टीटीपी के करीब 1800 कुख्यात आतंकियों को गिरफ्तार कर अलग अलग अफगान जेलों में बंद कर रखा था।
वहीं, पाकिस्तानी सेना ने बाजूर जिले में आतंकियों के खिलाफ जोरदार ऑपरेशन चलाया था और इस क्षेत्र से टीटीपी को खदेड़ दिया था, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद, तालिबान ने टीटीपी के सभी आतंकियों को जेल से रिहा कर दिया।
वहीं, तालिबान ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की तरफ से लगाए गये सीमा को तोड़ दिया, लिहाजा अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान का सीमा पूरी तरह से खुला हुआ है, जिससे आतंकियों के लिए बॉर्डर पार करना आसान हो गया है।
कट्टरपंथियों का गढ़ है ये क्षेत्र
दूसरी तरफ, कट्टरपंथी पाकिस्तानी मौलवी और राजनीतिक दल के नेता मौलाना फजलुर रहमान के समर्थक, जिनका जेयूआई-एफ आम तौर पर क्षेत्रीय इस्लामवादियों का समर्थन करता है, उनकी पार्टी एक बाजार के करीब एक हॉल में बाजूर में बैठक कर रहे थे।
पार्टी के अधिकारियों ने कहा, कि फजलुर रहमान रैली में नहीं थे, लेकिन आयोजकों ने तंबू लगाए थे, क्योंकि बहुत सारे समर्थक इस कार्यक्रम में पहुंचे थे, और पार्टी के स्वयंसेवक लाठी लेकर भीड़ को नियंत्रित करने में मदद कर रहे थे।
उसी दौरान जेयूआई-एफ के अधिकारी, जमीयत उलेमा इस्लाम पार्टी के नेता अब्दुल रशीद के मंच पर आगमन की घोषणा कर रहे थे, और उसी वक्त पाकिस्तान के सबसे खूनी हमलों में से एक में ये भीषण बम विस्फोट हुआ।
आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से विस्फोट कर दिया
प्रांतीय पुलिस ने एक बयान में कहा, कि हमला एक आत्मघाती हमलावर ने किया है, जिसने मंच के करीब अपने विस्फोटक जैकेट में विस्फोट कर दिया, जहां पार्टी के कई वरिष्ठ नेता बैठे थे।
बयान में कहा गया है, कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि इस्लामिक स्टेट समूह - जो अफगानिस्तान में काम करता है और अफगान तालिबान का दुश्मन है, वो हमले के पीछे हो सकता है, और अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं।
वहीं, पाकिस्तान तालिबान यानि टीटीपी ने समाचार एजेंसी द एसोसिएटेड प्रेस को भेजे एक बयान में कहा, कि बमबारी का उद्देश्य इस्लामवादियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना था।
जबकि, अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर कहा, कि "ऐसे अपराधों को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।"
हालांकि, इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक टीटीपी ने नहीं ली है, लेकिन इन इलाकों में आतंकवादियों के लिए बम धमाके करना काफी आसान हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है, कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का एक बड़ा हिस्सा, कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रभावित है और वो ऐसे आतंकवादी विचारधारा वाले आतंकियों की मदद करने से पीछे नहीं हटता। लिहाजा, स्थानीय लोगों से मिल रहे संरक्षण और समर्थन की वजह से, इन इलाकों में बम धमाके करना आतंकी संगठनों के लिए काफी आसान हो जाता है।












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