Pakistan: सिंधियों ने की 'सिंधुदेश' बनाने की मांग, कराची में हिंसक प्रदर्शन, मोदी से क्या मांगा?
Pakistan: कराची में एक अलग 'सिन्धुदेश' की मांग को लेकर हुआ विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़पों में बदल गया। सिंधी संस्कृति दिवस पर शुरू हुए इस विरोध में भारी पथराव, जबरदस्त तोड़फोड़ और पुलिस से सीधी भिड़ंत देखने को मिली।
"आजादी" और "पाकिस्तान मुर्दाबाद" के लगे नारे
जिए सिंध मुत्तहिदा महाज (JSSM) के बैनर तले बड़ी संख्या में सिंधी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। इस दौरान भीड़ ने 'आजादी' और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए। यह मांग सिंधी राष्ट्रवादी दलों की दशकों पुरानी भावना को दर्शाती है - कि सिंध पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बने।

सिंध का प्राचीन नाम था 'सिन्धुदेश'
सिंधु नदी के पास स्थित यह प्रांत 1947 के बंटवारे के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बना। महाभारत और ऐतिहासिक ग्रंथों के मुताबिक, आधुनिक सिंध को प्राचीन काल में 'सिन्धुदेश' के नाम से जाना जाता था। आज यह पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है।
रैली का रूट बदलते ही भड़की भीषण हिंसा
तनाव तब बढ़ गया जब प्रशासन ने अचानक प्रदर्शनकारियों की रैली का मार्ग बदल दिया। इससे हजारों लोग भड़क गए और भीड़ के कुछ हिस्सों ने सुरक्षाबलों पर पथराव कर दिया, कई जगह तोड़फोड़ की और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया।
45 लोग गिरफ्तार, 5 पुलिसकर्मी घायलस्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा के बाद कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 'डॉन' अखबार की रिपोर्ट कहती है कि झड़प में पांच पुलिसकर्मी घायल भी हुए। सरकार ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने वालों को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।
'हम पर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन'
सिंधी संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार लंबे समय से सिंध में राजनीतिक दमन कर रही है। निर्वासित अध्यक्ष शफी बुरफ़त के नेतृत्व वाले JSSM ने इस साल संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि सिन्धुदेश को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी जाए।
JSSM ने प्रधानमंत्री मोदी से भी की अपील
JSSM ने अपनी मांग रखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी समर्थन मांगा। संगठन का दावा है कि सिंध और भारत के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद गहरे हैं, और भारत को उनकी आवाज उठानी चाहिए।
पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप
संगठन ने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों पर "भारी मानवाधिकार उल्लंघन" का आरोप लगाया है। इनमें पत्रकारों और कार्यकर्ताओं का जबरन गायब होना, यातना, और फर्जी मुठभेड़ों में हत्या शामिल हैं। JSSM का कहना है कि पाकिस्तान सरकार उनके आंदोलन के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों का गलत इस्तेमाल कर रही है।
सिंधुदेश की मांग को मिली नई दिशा
हाल ही में एक पाकिस्तानी टीवी डिबेट में दावा किया गया कि MQM प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने पूर्व सिंधी गृह मंत्री जुल्फिकार मिर्जा से कहा था कि 18वें संवैधानिक संशोधन के बाद "सिंधुदेश कार्ड अब हमारे हाथ में है।" इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और गरमा दिया है।
भारत में भी यह मुद्दा चर्चा में- राजनाथ सिंह
भारत में भी यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सिंध क्षेत्र एक दिन फिर भारत का हिस्सा बन सकता है। नई दिल्ली में 'सिंधी समाज सम्मेलन' में उन्होंने बताया कि कई सिंधी हिंदुओं ने 1947 के फैसले को कभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि सिंध सांस्कृतिक और सभ्यतागत रूप से हमेशा भारत का हिस्सा रहा है। भारत के राष्ट्रगान में सिंधु नदी का उल्लेख भी इसका प्रतीक है।
सिंध के अंदर भारत के साथ विलय की मांग नहीं
सिंध में अभी ऐसा कोई बड़ा राजनीतिक आंदोलन नहीं है जो भारत के साथ विलय की मांग कर रहा हो। वहां के संगठन पाकिस्तान के भीतर अधिक स्वायत्तता या एक स्वतंत्र सिन्धुदेश की मांग कर रहे हैं।
सिन्धुदेश आंदोलन की जड़ें 1967 से
औपनिवेशिक काल में सिंध ब्रिटिश भारत के अधीन एक अलग प्रशासनिक क्षेत्र था। 1947 के बाद यह पाकिस्तान बन गया। एक अलग 'सिन्धुदेश' की पहली मांग 1967 में जी.एम. सैयद और पीर अली मोहम्मद रशीदी ने उठाई थी। 1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद इस आंदोलन को और गति मिली, जब सिंधी समुदाय बंगाली भाषा आंदोलन से प्रेरित हुआ. उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी अपनी जातीय, भाषा और ऐतिहासिक पहचान पर जोर दिया।
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